महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश ने भी एनालॉग पनीर पर बैन लगा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के कुछ ही घंटों में इंदौर के पालदा इलाके की एक फैक्ट्री से 450 किलो एनालॉग पनीर जब्त भी कर लिया गया। दिलचस्प बात यह है कि यह बैन अचानक नहीं आया। तीन पड़ोसी राज्यों ने जैसे ही अपने यहां एनालॉग पनीर पर रोक लगाई, उनका बचा हुआ माल गुजरात के दाहोद से आलीराजपुर, महाराष्ट्र के नागपुर से छिंदवाड़ा-सिवनी और छत्तीसगढ़ से सिंगरौली-मंडला के रास्ते मध्य प्रदेश में खपने लगा। यानी मध्य प्रदेश तीन राज्यों का डंपिंग ग्राउंड बनने लगा था। एनालॉग पनीर होता क्या है, यह सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाता है, बाजार में असली-नकली की पहचान कैसे करें; समझिए मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में… सवाल-1: एनालॉग पनीर क्या है और यह असली पनीर से कैसे अलग है? जवाब- इसे आसान भाषा में समझिए… सवाल-2: यह सेहत के लिए कितना और कैसे खतरनाक है? जवाब: सबसे पहले एक बात समझिए- सिर्फ एनालॉग पनीर होना ही खतरनाक नहीं है। सवाल-3: अगर यह इतना खतरनाक है, तो अब तक बैन क्यों नहीं था? जवाब: पहला हिस्सा एक कानूनी फर्क में छिपा है, दूसरा हिस्सा पड़ोसी राज्यों के फैसले में। राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने भी माना कि पड़ोसी राज्यों का माल यहां खपने की आशंका बढ़ गई थी, इसलिए लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए प्रदेश में भी इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया। एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने भी इस मसले पर मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों को पत्र लिखने का फैसला किया है और कहा है कि सिर्फ लेबल लगाने से एनालॉग पनीर का खतरा खत्म नहीं होता। सवाल-4: बाजार से पनीर खरीदते या खाते वक्त असली-नकली की पहचान कैसे करें? जवाब: चार तरीकों से आसानी से जांच की जा सकती है… 1. छूकर और गर्म करके परखें: असली पनीर मुंह में रखने पर घुल जाता है और गर्म करने पर सिकुड़ जाता है, जबकि एनालॉग पनीर गर्म होने पर भी लगभग वैसा ही बना रहता है और चमड़े जैसा खिंचता है। 2. पैकेट पर सामग्री सूची (इंग्रेडिएंट्स) पढ़ें: पैक्ड पनीर खरीदते वक्त FSSAI के निशान के साथ सामग्री की सूची जरूर देखें। अगर उसमें ‘Analogue’, ‘Imitation’ या ‘Vegetable Fat’ लिखा हो, तो यह डेयरी पनीर नहीं है। कानूनन कंपनी सिर्फ ‘पनीर’ नहीं लिख सकती, पैकेट पर ‘गैर-डेयरी उत्पाद’ या ‘एनालॉग’ साफ दर्ज होना जरूरी है। 3. कीमत पर ध्यान दें: अगर पनीर बाजार भाव (350-450 रुपए किलो) से काफी कम, जैसे 150-250 रुपए किलो में मिल रहा है, तो सतर्क हो जाएं। 4. होटल-रेस्तरां में मेन्यू कार्ड चेक करें: नियमानुसार अगर कोई होटल या रेस्तरां पनीर टिक्का, कढ़ाई पनीर जैसी डिश में एनालॉग पनीर इस्तेमाल कर रहा है, तो मेन्यू कार्ड पर इसकी स्पष्ट घोषणा करना अनिवार्य है। खुला बिकने वाला एनालॉग पनीर भी डेयरी पनीर से अलग डिस्प्ले होना चाहिए। अगर ऐसी कोई सूचना नहीं मिलती और शक हो, तो यह पूछने में झिझक न करें कि पनीर किस चीज से बना है। सवाल-5: बैन का ऐलान तो हो गया, क्या यह सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा? जवाब: शुरुआत तो असर दिखाने वाली ही रही है। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़ें… डिलीट किए शॉपिंग ऐप से खाली हो रहे खाते:बिना OTP स्कैम का यह कौन-सा तरीका है? आपने 6 महीने पहले कोई फूड डिलीवरी या ऑनलाइन शॉपिंग ऐप अपने फोन से अनइंस्टॉल कर दिया था। आप निश्चिंत हैं कि अब वह ऐप आपके फोन में नहीं है। अचानक एक दिन आपके मोबाइल पर मैसेज आता है कि आपके कार्ड से 50 हजार रुपए कट गए हैं। क्या ऐप डिलीट कर देना काफी नहीं है, हैकर्स को आपकी डिटेल कैसे मिलती है, और बिना OTP के पैसे कैसे निकल जाते हैं…पढ़िए पूरा एक्सप्लेनर
