शहडोल कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने अलग-अलग सरकारी सेवाओं में ढिलाई बरतने पर 14 अधिकारियों-कर्मचारियों पर कुल 9500 रुपए का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई बुधवार को ‘मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम-2010’ के तहत की गई। सभी को तीन दिनों के अंदर जुर्माने की रकम जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने धनपुरी नगरपालिका के अधिकारी अमित तिवारी पर सर्टिफिकेट जारी करने में देरी के लिए 500 रुपए का जुर्माना लगाया। इसके अलावा जमीन की नापजोख में देरी पर सोहागपुर के नायब तहसीलदार श्यामलाल मोगरे, जन्म पंजीयन की अनुमति अटकाने पर सोहागपुर के तहसीलदार दीपक पटेल और अविवादित नामांतरण न करने पर जयसिंहनगर के नायब तहसीलदार शनि द्विवेदी पर भी 500-500 रुपए की पेनल्टी लगाई गई। पंचायत सचिवों और उद्यानिकी अधिकारी पर कार्रवाई मौत का सर्टिफिकेट बनाने में ढिलाई बरतने पर ग्राम पंचायत कुबरा के सचिव रामचरित साहू, जैतपुर के प्रभुनाथ बैगा, तेंदूडोल के संग्राम सिंह, धमनीकला के अरुण मिश्रा और मैरटोला के सचिव लक्ष्मण कोल पर 500-500 रुपए का जुर्माना लगा। शादी के रजिस्ट्रेशन में देरी पर कैरहा के सचिव अजय सिंह और जन्म प्रमाण पत्र समय पर न देने पर आखेटपुर के सचिव रामकिशोर पटेल पर भी 500-500 रुपए की पेनल्टी लगाई गई। यही नहीं, लाइसेंस रिन्यू करने में देरी पर उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक झनक सिंह पर भी 500 रुपए का जुर्माना हुआ। इन्हीं दोनों पर लगा सबसे ज्यादा जुर्माना इस कार्रवाई में सबसे ज्यादा जुर्माना गोपालपुर ग्राम पंचायत के सचिव पर 1500 रुपए (डेथ सर्टिफिकेट लटकाने पर) और शहडोल नगरपालिका के अधिकारी निशांत सिंह पर 2000 रुपए (बर्थ सर्टिफिकेट जारी करने में देरी पर) लगाया गया है। समय पर काम न होने पर कार्रवाई तय लोक सेवा गारंटी कानून का मकसद जनता को सरकारी सुविधाएं तय समय सीमा के अंदर देना है। अगर कोई भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी बिना किसी जायज वजह के काम में देरी करता है, तो उस पर इस कानून के तहत जुर्माना लगाया जाता है।
