आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के नारों के बीच मध्य प्रदेश के युवाओं के रोजगार मांगने की जमीनी हकीकत संसद के पटल पर बेनकाब हो गई है। दीनदयाल जन आजीविका योजना-शहरी (DJAY-S) के तहत जब 13 राज्यों के 25 चुनिंदा शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आवेदन मांगे गए, तो मध्य प्रदेश का युवा सबसे आगे कतार में खड़ा नजर आया। एमपी से अकेले ही 284 से अधिक युवाओं ने सीधे लोन के लिए आवेदन दिए। इसमें सबसे बड़ी संख्या उन युवाओं की थी जो गिग वर्कर, निर्माण श्रमिक, वाहन चालक और स्वच्छता कर्मी के रूप में रात-दिन हाड़तोड़ मेहनत करते हैं और अपना काम शुरू करना चाहते हैं। काम की तलाश और अपना उद्यम शुरू करने की यह तड़प राज्य में बेरोजगारी की भयावह स्थिति को दर्शाती है। ₹15.83 करोड़ की थी मांग, पर हाथ में आया महज ₹84 लाख युवाओं ने काम मांगा और सरकार से मदद की गुहार लगाई, लेकिन सरकारी फाइलों और बैंकिंग सिस्टम ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मध्य प्रदेश के युवाओं ने अपने छोटे-छोटे उद्यमों को खड़ा करने के लिए 15.83 करोड़ रुपए (1,583.17 लाख रुपए) के लोन की मांग की थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बैंकों की बेरुखी के चलते केवल 27.4% आवेदनों (123 आवेदन) को मंजूरी मिल सकी और वास्तव में जमीन पर केवल 84.1 लाख रुपये ही बांटे जा सके, जो कुल मांगी गई राशि का महज 5.3% है। यानी कुल मांग का एक बहुत बड़ा हिस्सा फाइलों में ही दम तोड़ गया। इसके विपरीत, स्वीकृत आवेदनों से ज्यादा 138 आवेदनों को सीधे खारिज कर दिया गया, जिसने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने से पहले ही घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। गुजरात सबसे आगे अगर दूसरे राज्यों से मध्य प्रदेश की तुलना करें, तो ऋण वितरण और युवाओं को प्रोत्साहन देने के मामले में मध्य प्रदेश की स्थिति बेहद निराशाजनक रही है। गुजरात ने जहां 11.06 करोड़ रुपए की मांग के मुकाबले 1.31 करोड़ रुपए जमीन पर उतारे और 96 आवेदनों को लोन दिया, वहीं तमिलनाडु ने 100 आवेदनों को सफलतापूर्वक 61.79 लाख रुपए बांटे। मध्य प्रदेश में आवेदनों को खारिज करने की दर (138 अस्वीकृत आवेदन) पूरे देश में सबसे ऊंचे स्तर पर है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां केवल 35 आवेदन खारिज हुए, वहीं मध्य प्रदेश में 138 युवाओं के सपनों को सीधे कागजों पर रिजेक्ट कर दिया गया। यह तुलना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश का बैंकिंग तंत्र और प्रशासनिक ढांचा युवाओं को संबल देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। पीएमईजीपी में भी झटका: पांच साल में सब्सिडी आधी से भी कम सिर्फ दीनदयाल जन आजीविका योजना ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की सबसे बड़ी रोजगार सृजन योजना प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) में भी मध्य प्रदेश को बड़ा झटका लगा है। संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2021-22 में मध्य प्रदेश को जहाँ 209.58 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी बांटी गई थी, वह लगातार घटते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में महज 84.29 करोड़ रुपये पर सिमट गई। पांच सालों में सब्सिडी का आधा से भी कम हो जाना यह साबित करता है कि राज्य में नए उद्योगों और युवाओं के स्टार्टअप्स को मिलने वाली सरकारी मदद पर अघोषित ब्रेक लगा गया है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्य में पिछले वर्ष सब्सिडी बढ़कर 142.31 करोड़ रुपये हो गई है।
योजना के 5 मुख्य टार्गेट 1. केंद्र और राज्य की योजनाओं से हितग्राहियों को जोड़ना इसके तहत ऑनलाइन पंजीकृत आवेदकों की सोशल इकोनॉमिक प्रोफाइलिंग की जाएगी। उन्हें पात्रता के अनुसार केंद्र और राज्य की योजनाओं का फायदा दिया जाएगा। केंद्र सरकार की योजनाओं की बात करें तो प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना का फायदा दिया जाएगा। साथ ही जनधन योजना, श्रम योगी मानधन योजना, वन नेशन वन कार्ड, जननी सुरक्षा योजना, मातृ वंदना योजना और आयुष्मान भारत योजना से भी इन्हें जोड़ा जाएगा। एमपी सरकार ने बजट में लाड़ली बहना योजना के हितग्राहियों को बीमा का फायदा देने का ऐलान किया है। 2. स्व सहायता समूहों का गठन शहरी गरीबों और कमजोर वर्ग के रजिस्टर्ड श्रमिकों के 70 फीसदी परिवारों को स्व सहायता समूहों से जोड़ने की योजना है। इसके अलावा दीनदयाल अंत्योदय योजना से छूटे हुए परिवारों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। जो स्वसहायता समूह गठित होंगे, उन्हें 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। स्व सहायता समूह के गठन के लिए 20 हजार रुपए खर्च किए जा सकेंगे। ये समूह एरिया लेवल और सिटी लेवल पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। एरिया लेवल फेडरेशन को 2 लाख रुपए और सिटी लेवल फेडरेशन को 1 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। 3. खुद का कारोबार करने के लिए वित्तीय सहायता इसके तहत हितग्राहियों को आवश्यकतानुसार पर्सनल लोन के रूप में 4 लाख और समूह लोन के रूप में 20 लाख रुपए की सहायता देने की योजना है। स्व सहायता समूहों को बैंक लिंकेज सुविधा भी दी जाएगी, जिसमें बचत कोष से 1:6 के रेश्यो या डेढ़ लाख रुपए जो भी ज्यादा हो, उतना लोन मिल सकता है। 4. सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करना एक लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले शहरों में आश्रय स्थल, शहरी आजीविका केंद्र, केयर क्लस्टर, बच्चों के लिए डे केयर सेंटर बनाए जाएंगे। सभी नगर पालिका और नगर निगमों में जरूरत के हिसाब से लेबर चौक का निर्माण किया जाएगा। 5. नवाचार और विशेष प्रोजेक्ट हितग्राहियों को गरीबी से बाहर लाने के लिए नवाचार के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। नगरीय निकाय और बाकी विभागों से समन्वय के लिए सुरक्षा योजना गारंटी केंद्र की स्थापना की जाएगी। यह सिंगल विंडो की तरह काम करेगा। इसके लिए निकाय को एकमुश्त 5 लाख रुपए दिए जाएंगे।
