पीएम मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा पॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत करते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश का युवा शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होने के साथ नशे से भी दूर रहेगा। उन्होंने कहा कि ड्रग्स कुछ समय के लिए हाई देता है, लेकिन करियर और फैमिली लाइफ को लो कर देता है। नशे की लत युवाओं का फोकस भटकाती है और उन्हें धीरे-धीरे उनके सपनों से दूर ले जाती है। मोदी ने कहा कि काशी से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ यह अभियान अब राष्ट्रीय जनआंदोलन बन गया है। इसमें 125 से ज्यादा आध्यात्मिक संगठन, सामाजिक संस्थाएं और एनजीओ जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि अगले 100 सप्ताह तक हर रविवार कला, संस्कृति, खेल और अन्य गतिविधियों के जरिए नशा मुक्ति का संदेश देशभर में पहुंचाया जाएगा। पीएम ने युवाओं से इस अभियान का नेतृत्व करने और 2047 तक विकसित भारत बनाने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। 1 करोड़ से ज्यादा युवा कार्यक्रम में शामिल, 6 जरूरी बातें… 100 हफ्तों तक हर रविवार कार्यक्रम होगा इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना और उन्हें अपने समाज में बदलाव लाने के लिए आगे बढ़ाना है। यह अभियान अगले 100 हफ्तों तक चलेगा। इसके तहत हर रविवार देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम होंगे, जिनके जरिए लोगों को नशे के नुकसान बताए जाएंगे और नशा मुक्त भारत का संदेश दिया जाएगा। यह अभियान 125 से ज्यादा आध्यात्मिक संगठनों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसके अलावा स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, सामाजिक संस्थाएं और उद्योग संगठन भी इस अभियान से जुड़े हैं। नशे के खिलाफ जन आंदोलन बनाने की कोशिश सरकार चाहती है कि इस अभियान में स्कूल, कॉलेज, युवा संगठन, सामाजिक संस्थाएं, उद्योग संगठन और आध्यात्मिक संस्थाएं मिलकर काम करें। उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मुहिम से जुड़ें और नशे के खिलाफ इसे जन आंदोलन बनाया जाए। —————————- पीएम मोदी से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पीएम मोदी बोले- जंतर-मंतर पर मुझे गालियां दीं, मेरी मां को अपशब्द कहे; ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें राह दिखाने का समय है, इन्हें माफ करना चाहता हूं पीएम मोदी ने शुक्रवार रात इंस्टाग्राम पर रील शेयर की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर कुछ शरारती बच्चों ने मुझे और मेरी मां को भद्दी-भद्दी गालियां दीं, लेकिन बचपन में गलतियां होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि बचपन गलतियों को सुधारने का अवसर भी होता है। ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें राह दिखाने का समय है, इन्हें माफ करना चाहता हूं। पूरी खबर पढ़ें…
