सुप्रीम कोर्ट में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, वे संवैधानिक दायरे में अपनी मांग उठा रहे थे। कोर्ट ने कहा- जिसने भी जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि मामला सिर्फ दिल्ली का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, नागपुर, बिहार समेत कई राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाओं में पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज, आंसू गैस का इस्तेमाल, महिलाओं और पत्रकारों के साथ मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाएगी। CJI ने कहा- लोकतंत्र में आंदोलन होते रहेंगे। अगर जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तो जांच का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा, इलेक्ट्रिक शॉक वाले हथियारों के इस्तेमाल, महिलाओं के साथ गलत व्यवहार और सीनियर पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई। राजद से राज्यसभा सांसद मनोज झा की याचिका में बिहार के सीवान में प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस की तरफ से AK-47 तानने और उसका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। 20 जुलाई के संसद मार्च की 2 तस्वीरें… प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई मामले पर सुनवाई से जुड़ी अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
