मध्य प्रदेश में सूखे जैसे हालात है। मानसूनी सीजन में सिर्फ औसत 10.5 इंच बारिश ही हुई है, जबकि 12.7 इंच पानी गिर जाना था। यानी, 17 प्रतिशत बारिश कम हुई है। पिछले 13 दिन में बूंदाबांदी जरूर हुई, लेकिन भारी बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल की माने तो अगले चार दिन कुछ ही जिलों में हैवी रेन का अलर्ट है। बाकी में रिमझिम होगी। भारी बारिश नहीं होने की वजह से ओवरऑल आंकड़े में गिरावट आ रही है। हालांकि, पिछले तीन दिन से कुछ जिलों में तेज बारिश जरूर हुई, पर उतनी नहीं, जो आंकड़े के अंतर को कम कर दें। जुलाई के पहले सप्ताह तक प्रदेश के पश्चिमी हिस्से यानी, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग के जिलों में आंकड़ा प्लस में था, जो 20 जुलाई तक माइनस 12 प्रतिशत पर आ चुका है। वहीं, पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 268.1 मिमी (10.5) बारिश हो चुकी है, जो सामान्य बारिश के 323.2 मिमी (12.7) से 17% कम है। 39 जिलों में माइनस में आंकड़ा
प्रदेश के 39 जिलों में बारिश का आंकड़ा माइनस में है। पूर्वी हिस्से में सिर्फ निवाड़ी को छोड़ दें तो बाकी सभी जिलों में औसत से कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, कम बारिश वाले 39 जिलों में अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, गुना, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी और विदिशा शामिल हैं। वहीं, ज्यादा बारिश वाले 16 जिले- निवाड़ी, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, सीहोर और उज्जैन है। देवास में 18 इंच पानी गिरा, भोपाल-इंदौर बेहतर
प्रदेश में देवास सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला है। यहां 102 प्रतिशत ज्यादा पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के आंकड़ों की माने तो यहां अब तक 18 इंच बारिश हो चुकी है। इंदौर-सीहोर में 14 इंच बरसात हुई है। हरदा में 15 इंच पानी गिर चुका है। भोपाल में 13.1 इंच पानी गिरा है। आगर-मालवा, अशोकनगर, बैतूल, बुरहानपुर, गुना, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा, अनूपपुर, बालाघाट, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, मंडला, पांढुर्णा, पन्ना, सागर, सिवनी और उमरिया जिले भी बेहतर स्थिति में है। आलीराजपुर में सबसे कम सवा 2 इंच ही बारिश हुई है, जो सामान्य से 74 प्रतिशत कम है। आज इन जिलों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने मंगलवार को मुरैना, भिंड, दमोह और कटनी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश हो सकती है। नीमच, मंदसौर और रतलाम में बारिश का अनुमान नहीं है। यानी, इन जिलों में मौसम खुला रहेगा। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम आगे कैसा रहेगा मौसम?
मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि जुलाई के आखिरी सप्ताह में स्ट्रॉन्ग सिस्टम के एक्टिव होने का अनुमान है। इसके बाद लगातार बारिश का दौर रहने की संभावना है। वर्तमान में प्रदेश के आसपास सिस्टम एक्टिव है। इस वजह से बारिश का दौर चल रहा है। जून के बाद जुलाई में भी आंकड़ा कम
मौसम विभाग के अनुसार, जून में कम बारिश हुई, लेकिन जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। बाद में लगातार 9 दिन से तेज बारिश नहीं होने से लगातार चौथे दिन से आंकड़ा माइनस में आ गया है। बता दें कि इस महीने पूरे मानसून की एक तिहाई बारिश का ट्रेंड है। जैसे- भोपाल में 39 इंच सामान्य बारिश है तो 14 इंच बारिश जुलाई में होती है। बड़े शहरों में जबलपुर ही ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा 17 इंच से ज्यादा बारिश होती है। जुलाई के महीने में ही प्रदेश में कोटे की 40 प्रतिशत तक बारिश होती है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच
प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है। जुलाई में MP के 5 बड़े शहरों में ऐसा ट्रेंड इंदौर में 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड
इंदौर की बात करें तो 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 27 जुलाई 1913 में हुई थी। वर्ष 1973 को पूरे महीने 30.5 इंच पानी गिरा था। बारिश के चलते यहां भी तापमान में गिरावट देखने को मिलती है। इंदौर में महीने की एवरेज बारिश 12 इंच है। एवरेज 13 दिन यहां बारिश होती है। भोपाल में 41 इंच बारिश का रिकॉर्ड
राजधानी भोपाल में जुलाई में खूब बारिश होती है। यहां एक ही महीने में 1031.4 मिमी यानी 41 इंच के करीब बारिश होने का रिकॉर्ड है। यह साल 1986 को हुई थी। 22 जुलाई 1973 को एक ही दिन में 11 इंच बारिश हुई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है। भोपाल में बारिश के दिनों की बात करें तो जुलाई महीने में एवरेज 15 दिन बारिश होती है। यानी, हर दूसरे दिन पानी बरसता है। महीने की एवरेज बारिश 367.7 मिमी यानी 14.4 इंच है। बारिश के चलते दिन का तापमान 30 और रात में पारा 25 डिग्री से कम रहता है। जबलपुर में सबसे ज्यादा बारिश होने का रिकॉर्ड
चारों बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है। वर्ष 1930 में करीब 45 इंच पानी बरसा था, जबकि 30 जुलाई 1915 को 24 घंटे की सर्वाधिक 13.5 इंच बारिश हुई थी। पिछले साल जुलाई में 13 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 2013 और 2016 में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। जबलपुर में जुलाई की सामान्य बारिश 17 इंच है। महीने में 15 से 16 दिन पानी बरसता है। ग्वालियर में 6 बार 8 इंच से कम बारिश
भोपाल, इंदौर और जबलपुर की तुलना में ग्वालियर में सबसे कम बारिश होती है। पिछले 10 साल में 6 बार ऐसा हुआ, जब 8 इंच से कम पानी गिरा हो, जबकि यहां की एवरेज बारिश 9 इंच के करीब है। ग्वालियर में वर्ष 1935 में महीने की सबसे ज्यादा बारिश हुई थी। तब 623.3 मिमी यानी 24.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश की बात करें तो 12 जुलाई 2015 में 190.6 मिमी यानी साढ़े 7 इंच पानी बरसा था। ग्वालियर में जुलाई के महीने में एवरेज 11 दिन बारिश होती है। उज्जैन में जमकर होती है बारिश
प्रदेश के अन्य शहरों की तरह उज्जैन में भी जुलाई में जमकर बारिश होती है। कोटे की करीब 40 प्रतिशत बारिश इसी महीने हो जाती है।
