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“तुम तो मर जाओगे, मेरा क्या” बोलकर की दूसरी शादी:लव मैरिज के चार महीने बाद बीमारी, पहली शादी रहते दूसरा विवाह करने पर वारंट जारी

इंस्टाग्राम पर दोस्ती, छह महीने का प्यार, लव मैरिज और फिर परिवार की मौजूदगी में रीति-रिवाज से दूसरी बार शादी… लेकिन शादी के चार महीने बाद पति को कैंसर होने की जानकारी मिलते ही रिश्ते की तस्वीर बदल गई। पति का आरोप है कि बीमारी का पता चलते ही पत्नी ने साथ छोड़ दिया और कहा, “तुम तो कल मर जाओगे, मेरा क्या होगा?” इसके बाद उसने तलाक का मामला कोर्ट में दायर किया, लेकिन फैसला आने से पहले ही दूसरी शादी कर ली। अब इस पूरे मामले में नया मोड़ आया है। रतलाम की न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) अदालत ने पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त हुए बिना दूसरी शादी करने के मामले में महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 82(1) के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट का मानना है कि पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुई थी, इसलिए दूसरी शादी प्रथम दृष्टया अपराध की श्रेणी में आती है। दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले की पड़ताल की। पीड़ित पति, उसके वकील और दोनों अदालतों के आदेशों के आधार पर समझिए कि इंस्टाग्राम पर शुरू हुई प्रेम कहानी अदालत तक कैसे पहुंची और किन तथ्यों के आधार पर अब यह मामला आपराधिक मुकदमे में बदल गया। इंस्टाग्राम पर दोस्ती, छह महीने बाद लव मैरिज रतलाम शहर की राजस्व कॉलोनी निवासी आकाश जाट की पहचान इंस्टाग्राम के जरिए रतलाम की रहने वाली साक्षी नकुम से हुई। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती रही, लेकिन धीरे-धीरे दोस्ती गहरी होती गई। करीब छह महीने तक बातचीत और मुलाकातों के बाद दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया। परिवारों के विरोध के बीच दोनों ने 20 नवंबर 2022 को इंदौर के आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया। शादी के कुछ समय बाद दोनों परिवारों ने रिश्ते को स्वीकार कर लिया। इसके बाद 13 दिसंबर 2022 को रतलाम में पूरे सामाजिक और पारिवारिक रीति-रिवाजों के साथ दोबारा शादी कराई गई। दोनों परिवारों की मौजूदगी में हुए इस विवाह के बाद ऐसा लगा कि अब रिश्ते को सभी की मंजूरी मिल चुकी है और दोनों का जीवन सामान्य रूप से आगे बढ़ेगा। चार महीने बाद जिंदगी ने लिया मोड़ शादी के करीब चार महीने बाद आकाश की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी और कमजोरी के कारण उसने गुजरात के वडोदरा में इलाज कराया। 10 अप्रैल 2023 को आई जांच रिपोर्ट ने उसकी जिंदगी बदल दी। रिपोर्ट में श्वास नली का कैंसर होने की पुष्टि हुई। आकाश का आरोप है कि बीमारी का पता चलते ही पत्नी का व्यवहार बदल गया। पहले जो हर परिस्थिति में साथ निभाने का वादा करती थी, वही उससे दूरी बनाने लगी। इलाज के लिए उसे कई बार वडोदरा जाना पड़ा और अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। आकाश का कहना है कि इसी दौरान पत्नी ने महिला थाने में उसके खिलाफ शराब पीकर मारपीट करने और नौकरी नहीं करने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उसे थाने बुलाया, लेकिन उसने इलाज से जुड़े दस्तावेज, अस्पताल में भर्ती होने का रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट पेश की। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पत्नी ने दायर की तलाक की याचिका कुछ समय बाद साक्षी ने कुटुंब न्यायालय रतलाम में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत विवाह विच्छेद (तलाक) की याचिका दायर कर दी। याचिका में पति पर दहेज मांगने, मारपीट करने और नौकरी नहीं करने जैसे आरोप लगाए गए। आकाश का कहना है कि बीमारी के बाद पत्नी उससे अलग होना चाहती थी, इसलिए उसके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए। उस समय वह कैंसर का इलाज करा रहा था और मानसिक व शारीरिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में था। तलाक का मामला लंबित, फिर भी कर ली दूसरी शादी तलाक का मामला कुटुंब न्यायालय में विचाराधीन था। अभी अदालत ने विवाह समाप्त नहीं किया था और दोनों कानूनी रूप से पति-पत्नी ही थे। इसी दौरान 10 जून 2024 को साक्षी की दूसरी शादी कर दी गई। शादी का कार्यक्रम रतलाम में आयोजित हुआ। उसका नया ससुराल छतरपुर जिले के गंज क्षेत्र में बताया गया। पति का आरोप है कि बिना तलाक लिए पत्नी अपने दूसरे पति के साथ रहने लगी। बाद में उसे एक बेटी भी हुई। दूसरी शादी की जानकारी मिलने पर आकाश ने फोटो और वीडियो सहित अन्य साक्ष्य जुटाए और अदालत का दरवाजा खटखटाया। कुटुंब न्यायालय ने क्यों खारिज की तलाक याचिका 18 अप्रैल 2026 को प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय ने पत्नी की तलाक याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी ने दावा किया था कि 10 अप्रैल 2023 को उसे घर से निकाल दिया गया था। लेकिन रिकॉर्ड में सामने आया कि 6 नवंबर 2023 को वह अपने पिता के साथ विवाह पंजीयन अधिकारी के समक्ष उपस्थित हुई और विवाह प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर भी किए। यदि वह अप्रैल 2023 से अलग रह रही थी, तो नवंबर 2023 में विवाह पंजीयन की प्रक्रिया में शामिल होना उसके दावे से मेल नहीं खाता। कोर्ट ने यह भी माना कि पति कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। ऐसी परिस्थितियों में उसे घर से निकाल देने का आरोप परिस्थितिजन्य तथ्यों से मेल नहीं खाता। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पत्नी के आरोपों को स्वीकार नहीं किया और तलाक की याचिका निरस्त कर दी। दूसरी शादी पर दर्ज हुआ आपराधिक केस इस बीच पति आकाश जाट ने अपने अधिवक्ता रजनीश शर्मा के माध्यम से न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) न्यायालय में अलग से परिवाद दायर किया। इसमें पत्नी साक्षी, उसके माता-पिता, दूसरे पति और दूसरे पति की मां-पिता को पक्षकार बनाया गया। अदालत ने प्रस्तुत दस्तावेजों, दूसरी शादी के साक्ष्यों और प्रारंभिक बयान के आधार पर 20 जून 2025 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 82(1) के तहत महिला के खिलाफ मामला दर्ज किया। अदालत ने कई बार समन जारी किए, लेकिन लगातार पेशी पर अनुपस्थित रहने के कारण उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। अब उसे 25 जुलाई 2026 को अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। पीड़ित बोला- बीमारी के बाद बदल गई पत्नी आकाश जाट का कहना है, “हमारी मुलाकात सोशल मीडिया पर हुई थी। हमने अपनी मर्जी से शादी की थी। बाद में परिवार भी मान गया और दोबारा रीति-रिवाज से शादी कराई गई। लेकिन कैंसर का पता चलते ही सब कुछ बदल गया। पत्नी कहने लगी कि तुम्हारे साथ मेरा भविष्य नहीं है। तलाक भी नहीं हुआ था और उसने दूसरी शादी कर ली। इस दौरान मेरे माता-पिता भी दुनिया छोड़ गए। अब मुझे सिर्फ अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद है।” बीमारी के बाद माता-पिता का भी छूटा साथ आकाश की निजी जिंदगी भी इस दौरान पूरी तरह बदल गई। कैंसर का पता चलने के कुछ समय बाद 19 जून 2023 को उसके पिता बंशीलाल जाट का निधन हो गया। कुछ समय बाद उसकी मां सुशीला जाट की भी मृत्यु हो गई। अब आकाश घर में अकेला रहता है। इलाज, भोजन और अन्य जरूरतों के लिए वह दोस्तों की मदद पर निर्भर है। उसका बड़ा भाई रतलाम से बाहर रहता है, इसलिए दैनिक जीवन की अधिकांश जिम्मेदारियां उसे स्वयं संभालनी पड़ रही हैं। बिना फीस लड़ रहे हैं वकील आकाश के अधिवक्ता रजनीश शर्मा का कहना है कि जब उन्होंने आकाश की स्थिति देखी तो बिना फीस लिए उसका मुकदमा लड़ने का फैसला किया। उनका कहना है कि पहली शादी रहते दूसरी शादी करना कानून का उल्लंघन है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत में परिवाद दायर किया और दूसरी शादी से जुड़े दस्तावेज एवं अन्य साक्ष्य पेश किए। अधिवक्ता रजनीश शर्मा का कहना है कि भारतीय न्याय संहिता स्पष्ट रूप से कहती है कि पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त हुए बिना दूसरा विवाह नहीं किया जा सकता। इस मामले में दूसरी शादी के पर्याप्त साक्ष्य अदालत के सामने प्रस्तुत किए गए हैं। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला बनते हुए केस दर्ज किया है और आरोपी के लगातार अनुपस्थित रहने पर गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

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