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टोल प्लाजा अनुबंध में स्टाम्प फर्जीवाड़े का आरोप…बीजेपी नेता आरोपी:जेल से छूटे आरोपी ने एसपी से शिकायत की, पुलिस ने जांच शुरू की

जबलपुर में करोड़ों रुपए के कथित टोल प्लाजा फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में नया मोड़ सामने आया है। 2022-23 में करोड़ों रुपए की ठगी के आरोपी अमित खम्परिया के मैनेजर रहे एडवोकेट अमित द्विवेदी ने दो साल जेल में रहने के बाद एसपी कार्यालय पहुंचकर भाजपा नेता और यूवी ऑनलाइन सेंटर संचालक उज्ज्वल पचौरी के खिलाफ शिकायत दी है। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपए के टोल प्लाजा पार्टनरशिप अनुबंध 500-500 रुपए के ई-स्टाम्प पर तैयार किए गए। इससे न केवल लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई, बल्कि शासन को भी राजस्व का नुकसान पहुंचा। पुलिस ने शिकायत को जांच के लिए संबंधित थाना भेज दिया है। दो साल बाद जेल से बाहर आकर की शिकायत अमित द्विवेदी का कहना है कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया और दो साल जेल में रहना पड़ा। जेल से छूटने के बाद उन्होंने एसपी को शिकायत देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि भाजपा नेता उज्ज्वल पचौरी ने गैंगस्टर अमित खम्परिया के साथ मिलकर फर्जी अनुबंध तैयार कर लोगों को करोड़ों रुपए का चूना लगाया। ऐसे होता था पूरा खेल शिकायत के अनुसार अमित खम्परिया मध्यप्रदेश के अलावा उत्तरप्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों के व्यापारियों व ठेकेदारों को टोल प्लाजा में पार्टनर बनाने का झांसा देता था। इसके बाद उन्हें मदनमहल स्थित यूवी ऑनलाइन सेंटर ले जाया जाता था, जहां 500-500 रुपए के ई-स्टाम्प पर करोड़ों रुपए के पार्टनरशिप अनुबंध तैयार किए जाते थे। आरोप है कि अनुबंध का पूरा ड्राफ्ट यूवी ऑनलाइन सेंटर में तैयार होता था। बाद में वहीं नोटरी बुलाकर दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाता था। इसके एवज में बड़ी रकम वसूली जाती थी। 100 करोड़ के अनुबंध का आरोप अमित द्विवेदी का आरोप है कि उज्ज्वल पचौरी ने सरकारी स्टाम्पों के नियमों से छेड़छाड़ करते हुए करीब 100 करोड़ रुपए के टोल प्लाजा पार्टनरशिप अनुबंध तैयार कराए। इससे शासन को स्टाम्प शुल्क का नुकसान हुआ और ठेकेदार कंपनी को अनुचित लाभ मिला। गवाहों ने भी दिए बयान पुलिस जांच में नोटरी, अनुबंध तैयार कराने वाले लोगों और गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। शिकायत के मुताबिक सभी ने बताया कि 500-500 रुपए के ई-स्टाम्प पर करोड़ों रुपए के अनुबंध तैयार किए गए। पूछने पर बताया जाता था कि ऐसा करने का अधिकार सरकार और एनएचएआई ने दिया है। यूवी ऑनलाइन सेंटर पर लगे आरोप शिकायत में कहा गया है कि यूवी ऑनलाइन सेंटर का लाइसेंस कल्पना पचौरी के नाम पर है, जबकि संचालन उज्ज्वल पचौरी करता था। आरोप है कि वह खुद को अधिकृत स्टाम्प वेंडर बताकर लोगों को भरोसा दिलाता था कि उसके पास ऐसे अनुबंध तैयार करने की अनुमति है। हालांकि उज्ज्वल पचौरी का कहना था कि वह केवल स्टाम्प बेचता था और स्टाम्प पर लिखी सामग्री से उसका कोई संबंध नहीं है। पुलिस ने पंजीयक कार्यालय से मांगी जानकारी मदनमहल थाना पुलिस ने जिला पंजीयक कार्यालय से तीन सवाल पूछे- उप-पंजीयक ने क्या जवाब दिया वरिष्ठ उप-पंजीयक ने पुलिस को बताया- एनएचएआई ने भी अनुबंधों को बताया अवैध जांच के दौरान पुलिस ने एनएचएआई रायबरेली से भी जानकारी मांगी। एनएचएआई ने लिखित जवाब में बताया कि विभाग इस तरह के किसी भी पार्टनरशिप अनुबंध की अनुमति नहीं देता। परियोजना निदेशक ने स्पष्ट किया कि टोल एजेंसी और एनएचएआई के बीच हुए मूल अनुबंध में टोल प्लाजा किसी अन्य व्यक्ति को किराए या पार्टनरशिप पर देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए इस प्रकार के सभी अनुबंध अवैध और अमान्य हैं। एनएचएआई ने यह भी कहा कि यूवी ऑनलाइन संचालक उज्ज्वल पचौरी का विभाग से वेंडर के रूप में कोई संबंध नहीं है। जमीन के अनुबंध कराने का भी आरोप शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अमित खम्परिया और उसके सहयोगियों के बीच कई जमीनों के अनुबंध भी यूवी ऑनलाइन सेंटर से कराए गए। आरोप है कि इन मामलों में भी नियमों का पालन नहीं किया गया और राजस्व की चोरी हुई। एएसपी ने जांच के दिए निर्देश एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि अमित द्विवेदी की शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत में उज्ज्वल पचौरी पर टोल प्लाजा पार्टनरशिप अनुबंधों में लोगों, एनएचएआई और पंजीयक कार्यालय से धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत संबंधित थाना प्रभारी को जांच के लिए भेजी जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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