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मेडिकल कॉलेज में 5 दिन तक डिब्बे में रहा मृत:प्रसूता की उम्र को लेकर भ्रम से हुई लापरवाही, नाबालिग से जुड़ा मामला समझा गया

जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक मृत नवजात शिशु का शव लगभग पांच दिनों तक ऑपरेशन थियेटर के बाहर एक डिब्बे में बंद पड़ा रहा। अस्पताल प्रशासन और पुलिस के बीच समन्वय की कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। यह घटना मंडला निवासी एक यादव परिवार से संबंधित है। परिवार की बहू को गंभीर हालत में रविवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार को प्रसूता के गर्भ में पानी भर जाने के कारण जटिल ऑपरेशन के बाद मृत शिशु का जन्म हुआ। मेडिकल रिकॉर्ड में प्रसूता की उम्र 17 वर्ष दर्ज होने के कारण अस्पताल ने इसे नाबालिग से जुड़ा मामला मानते हुए गढ़ा थाना पुलिस को सूचित किया। शिशु के शव को एक डिब्बे में रखकर टैग लगा दिया गया। पुलिस ने प्रसूता की सास के बयान दर्ज किए, लेकिन शव को अपने सुपुर्द नहीं लिया और वापस लौट गई। इसके बाद, मृत शिशु के शव को मोर्चरी में भिजवाने के बजाय ऑपरेशन थियेटर के बाहर ही उपेक्षित अवस्था में छोड़ दिया गया। यह लापरवाही पाँच दिनों तक जारी रही, जिससे अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। पाँच दिन बाद, शनिवार को पुलिस दोबारा अस्पताल पहुँची। उन्होंने स्पष्ट किया कि दस्तावेज़ी सुधार के बाद प्रसूता की वास्तविक उम्र 20 वर्ष (बालिग) पाई गई है। परिजनों द्वारा पोस्टमार्टम कराने से इनकार करने के बाद, पुलिस और अस्पताल ने अंततः शव परिजनों को सौंप दिया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा ने इस लापरवाही को स्वीकार करते हुए कहा कि शव को नियमानुसार मोर्चरी में रखा जाना चाहिए था। उन्होंने इस मामले में आंतरिक जाँच के आदेश दिए हैं। वहीं, गढ़ा सीएसपी आशीष जैन ने बताया कि अस्पताल से मिली जानकारी और पुलिस कार्रवाई में हुई देरी की जाँच कर आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। इस प्रशासनिक लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है।

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