सरदार सरोवर डैम की वजह से मध्य प्रदेश की करीब 21 हजार हेक्टेयर जमीन पानी में समा गई। 192 गांव उजड़ गए। राज्य सरकार ने गुजरात से 7,669 करोड़ रुपए का मुआवजा मांगा। 30 साल से अटके मामले पर 7 जुलाई को दिल्ली में समाधान हुआ है। मध्य प्रदेश को मुआवजा मिलना तो दूर, उल्टा 231.80 करोड़ रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। आखिर क्या है पूरा मामला और क्या मोहन सरकार ने घाटे का सौदा कर लिया; 5 सवालों में जानेंगे आज के एमपी एक्सप्लेनर में… सवाल 1: सरदार सरोवर डैम का ‘वन टाइम सेटलमेंट’ क्या है? जवाब: सवाल 2: एमपी की ज्यादा जमीन डूबी, फिर वही ₹232 करोड़ का मुआवजा क्यों देगा? जवाब: इसके पीछे गणित है… सवाल 3: क्या मोहन सरकार ने घाटे का सौदा कर लिया? जवाब: कांग्रेस इसे एमपी का बड़ा नुकसान बता रही है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने सीएम को ‘सरेंडर और कॉम्प्रोमाइज्ड सीएम’ कहा है। सवाल 4: आखिर इस सेटलमेंट से एमपी को हासिल क्या हुआ? जवाब: डैम गुजरात के आंगन में है, लेकिन उसकी चाबी मध्य प्रदेश के पास है… सवाल 5: अब उन विस्थापितों का क्या होगा, जिनके मुआवजे का पैसा डूब गया? जवाब: तकनीकी तौर पर विस्थापितों का पैसा डूबा नहीं है।
