मऊगंज जिले में गौशालाओं के संचालन और गोवंश के संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाले का मामला सामने आया है। नाम छापने की शर्त पर शिकायतकर्ता ने कहा कि कागजों पर गायों की फर्जी संख्या बढ़ाकर सरकार से भारी-भरकम अनुदान हड़पा गया है। इस मामले में पशुपालन विभाग के तत्कालीन उपसंचालक जे.एल. साकेत, कुछ संचालकों और बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। एक आरटीआई में दावा किया गया कि सरकारी पोर्टल पर तो हजारों गायें दर्ज हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। जिले की 77 गौशालाओं में कुल 24,140 गोवंश दर्ज हैं। (हनुमना में 9,539, मऊगंज में 12,388 और नईगढ़ी में 2,213)। लेकिन जब स्थानीय स्तर पर 56 गौशालाओं का मुआयना किया गया, तो वहां सिर्फ 3,278 गायें ही मिलीं। मलैगवा, बिछरहटा, सरदमन, बेलहा और खैरा जैसी कई गौशालाओं में तो गायों की संख्या शून्य पाई गई। इसके अलावा कई जगह चारा रखने की जगह नहीं थी, पानी का इंतजाम नहीं था और गायों की हालत बेहद खराब मिली। 25 महीनों में 50 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का अनुमान सरकार की तरफ से एक गाय के चारे-पानी और देखरेख के लिए प्रति दिन 40 रुपए का अनुदान दिया जाता है। शिकायतकर्ताओं का गणित है कि पोर्टल पर दर्ज संख्या के हिसाब से हर महीने करीब 2.90 करोड़ रुपए जारी हुए होंगे। अगर यह खेल 25 महीनों तक चला, तो यह भुगतान 50 करोड़ रुपए से ऊपर का हो सकता है। हालांकि, अभी किसी सरकारी एजेंसी ने इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की है। साथ ही कई गौशालाओं में न तो कैश बुक मिली और न ही भूसा खरीदने के बिल-वाउचर मिले। विवाद के केंद्र में ‘बेलहा गौशाला’ ग्राम पंचायत बेलहा की गौशाला इस मामले का सबसे बड़ा सस्पेंस बनी हुई है। आरोप है कि यह गौशाला अभी अधूरी है और यहां एक भी गाय नहीं थी, फिर भी करीब 42.57 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया। मार्च 2025 में जब संयुक्त जांच दल ने निरीक्षण किया था, तब भी यहां कोई गाय नहीं मिली थी। पहले अधिकारियों ने कहा कि इस गौशाला को कोई पैसा नहीं दिया गया, लेकिन बाद में इसी गौशाला के खाते में रकम ट्रांसफर होने के दस्तावेज सामने आ गए। रिश्वत के पैसों से रीवा में प्रॉपर्टी खरीदने का आरोप तत्कालीन उपसंचालक जे.एल. साकेत पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने गौशाला संचालकों से चेकों के जरिए पैसे लिए। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन्हीं चेकों का इस्तेमाल करके रीवा के संजय नगर में अधिकारी के बेटे के नाम पर करीब 42 लाख रुपए की प्रॉपर्टी खरीदी गई, जिसका जिक्र रजिस्ट्री के कागजातों में भी है। मऊगंज कलेक्टर का क्या कहना है? मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन ने बताया कि जिले में कुल 86 गौशालाएं (सरकारी और प्राइवेट मिलाकर) चल रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक इस घोटाले से जुड़ी कोई औपचारिक शिकायत सीधे उनके पास नहीं आई है। हालांकि, प्रशासन ने अपने स्तर पर जिले के अधिकारियों को दो-दो गौशालाओं की जिम्मेदारी सौंपकर जांच करवाई थी, जिसकी रिपोर्ट आ चुकी है। जिन गौशालाओं में छोटी-मोटी कमियां या गड़बड़ियां मिली हैं, उन्हें प्रशासन की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति इस मामले की विशेष शिकायत दर्ज कराता है, तो उसकी पूरी जांच कराकर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
