मध्यप्रदेश के सतना में वित्तीय अनियमितताओं समेत कई शिकायतों के बाद निलंबित किए गए मझगवां जनपद पंचायत के संविदा उपयंत्री सतीश समेले गुरुवार को पहली बार मीडिया के सामने आए। उन्होंने दावा किया कि जनपद पंचायत से लेकर भोपाल तक कमीशन का पूरा सिस्टम चलता है। समेले का कहना है कि उनसे भी अधिकारियों के लिए वसूली कराई गई और इसके ऑडियो, वीडियो समेत अन्य सबूत उनके पास हैं, जिन्हें वह हाईकोर्ट में पेश करेंगे। बोले- सब इंजीनियर वसूली एजेंट बनकर रह गए समेले ने आरोप लगाया कि सब इंजीनियर अब वसूली एजेंट बनकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद भी इस व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं और उनसे भी वसूली कराई गई। कब-कब चंदा हुआ और किस तरह पैसा नीचे से ऊपर तक पहुंचा, इसके ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड उनके पास हैं। उनका दावा है कि ये सभी सबूत वह हाईकोर्ट में पेश करेंगे। कहा- कौन माई का लाल कमीशन नहीं खाता
समेले ने कहा, “कौन माई का लाल है जो पैसा नहीं लेता। अगर कोई नहीं लेता तो हनुमान जी के सामने अपने बेटे की कसम खाए, तब मैं मान जाऊंगा।” उनका दावा है कि निर्माण कार्यों में नीचे से ऊपर तक अलग-अलग स्तर पर कमीशन तय रहता है। उन्होंने अपने ऊपर लगे कमीशन लेने के आरोपों को भी निराधार बताया। उनका कहना है कि ईएमएफ, ग्रांट और अन्य मद के कार्यों में 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता है। उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) से लेकर भुगतान तक कई स्तरों पर पैसा देना पड़ता है। दावा- हर स्तर पर तय है कमीशन
समेले का दावा है कि सरपंच, सचिव, जीआरएस, सब इंजीनियर, सहायक यंत्री और जनपद स्तर तक कमीशन का प्रतिशत पहले से तय रहता है। किसका कितना कमीशन बोले- भोपाल के अफसरों को भेजे जाते हैं सूटकेस समेले ने आरोप लगाया कि जिले, कमिश्नरी और भोपाल से निरीक्षण के लिए आने वाले अधिकारियों के लिए भी “सूटकेस” भेजे जाते हैं। उनका कहना है कि पूरी व्यवस्था कमीशन पर आधारित है। समेले ने कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पूरे सिस्टम को बचाने की कोशिश है। उनका दावा है कि हाईकोर्ट में सभी प्रमाण पेश कर बताएंगे कि किस तरह वसूली होती है और सब इंजीनियरों को बलि का बकरा बनाया जाता है। उनका आरोप है कि भोपाल तक के अधिकारी भी इस व्यवस्था का हिस्सा हैं। पहले बंदूक लेकर निरीक्षण करने पर हुई थी कार्रवाई सतीश समेले मझगवां जनपद पंचायत की हिरौंदी ग्राम पंचायत में आरईएस के संविदा उपयंत्री थे। उनके खिलाफ सरपंचों, सचिवों और ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि वह निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर जाते थे। जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। समेले ने बंदूक साथ ले जाने की बात स्वीकार की थी, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं माना गया। इसके बाद उन्हें पहले कार्यालय से अटैच किया गया और बाद में निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई। ————– यह खबर भी पढ़ें 3 करोड़ की सड़क हाथ लगाते ही उखड़ी:ठेकेदार बोला- कॉम्पिटिशन में ज्यादा बचत नहीं होती; सब इंजीनियर ने कहा- सब ठीक है मुरैना में 3 करोड़ की लागत से बन रही सड़क निर्माण के दौरान ही उखड़ने लगी है। पोरसा के हुसैनपुरा-माधोपुरा मार्ग पर ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का आरोप लगाते हुए वीडियो अधिकारियों को भेजा है। ठेकेदार रामनिवास शर्मा ने कमी होने पर सुधार कराने की बात कही। वहीं, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने जांच के बाद खामियां दूर कराने और गलत बिल पास नहीं करने का दावा किया। पढ़ें पूरी खबर
