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केरलम के वायनाड में लैंडस्लाइड, एक की मौत, कई दबे:टनल कंस्ट्रक्शन का मलबा सड़क पर आया; 2024 में यहां 400 मौतें हुई थीं

केरलम के वायनाड में मंगलवार दोपहर तेज बारिश के चलते लैंडस्लाइड हुआ। हादसे में एक की मौत हो गई, 8 लोग घायल हुए हैं। कई लोगों के फंसे होने की सूचना है। हादसा कल्लाडी स्थित मीनाक्षी ब्रिज के पास हुआ। यहां मलप्पुरम-वायनाड टनल प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। टनल से मिट्टी निकालकर बाहर जमा की गई थी। बारिश के चलते मिट्टी खिसक गई, जिससे पेड़ उखड़ गए और बैरिकेड भी बह गए। पुलिस, NDRF की टीम रेस्क्यू कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों की जरूरत होगी। अधिकारियों के अनुसार, लगातार बारिश के कारण सोमवार से ही सुरंग कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया गया था। दो साल पहले भी वायनाड में एक के बाद एक तीन भूस्खलन हुए थे, जिसमें 400 से ज्यादा जानें चली गई थीं। हादसे से जुड़ी 4 तस्वीरें… वायनाड में लैंडस्लाइड की क्या वजह है वायनाड, केरल के नॉर्थ-ईस्ट में है। यह केरल का एकमात्र पठारी इलाका है। यानी मिट्टी, पत्थर और उसके ऊपर उगे पेड़-पौधों के ऊंचे-नीचे टीलों वाला इलाका। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल का 43% इलाका लैंडस्लाइड प्रभावित है। वायनाड की 51% जमीन पर पहाड़ी ढलाने हैं। यानी लैंडस्लाइड की संभावना बहुत ज्यादा बनी रहती है। वायनाड का पठार वेस्टर्न घाट में 700 से 2100 मीटर की ऊंचाई पर है। मानसून की अरब सागर वाली ब्रांच देश के वेस्टर्न घाट से टकराकर ऊपर उठती है, इसलिए इस इलाके में मानसून सीजन में बहुत ज्यादा बारिश होती है। वायनाड में काबिनी नदी है। इसकी सहायक नदी मनंतावडी ‘थोंडारमुडी’ चोटी से निकलती है। लैंडस्लाइड के कारण इसी नदी में बाढ़ आने से भारी नुकसान हुआ है। वायनाड में 2024 में सबसे बड़ा हादसा, 400 से ज्यादा की मौत वायनाड में 2 साल पहले सबसे बड़ा लैंडस्लाइड हादसा हुआ था। 30 जुलाई 2024 रात करीब 2 बजे से 4 बजे के बीच मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों में लैंडस्लाइड हुईं। इस हादसे में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2019 में भी भारी बारिश के कारण इन्हीं इलाकों में लैंडस्लाइड हो चुकी हैं। उस हादसे में 17 लोगों की मौत हुई थी। 52 घर पूरी तरह तबाह हो गए थे। भारत का करीब 12.6% हिस्सा लैंडस्लाइड डेंजर जोन में आता है भारत के करीब 12.6% भूभाग (लगभग 4.2 लाख वर्ग किमी) को लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्र माना जाता है। हिमालय और पश्चिमी घाट देश के सबसे संवेदनशील लैंडस्लाइड क्षेत्र हैं। भारत में जून से सितंबर (मानसून) के दौरान सबसे ज्यादा भूस्खलन होते हैं। 80% से ज्यादा लैंडस्लाइड भारी बारिश के कारण होते हैं। सड़क, सुरंग, बांध, खनन और जंगलों की कटाई जैसी मानवीय गतिविधियां भी भूस्खलन का खतरा बढ़ाती हैं। केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दार्जिलिंग सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। भारत में हर साल सैकड़ों लोगों की मौत भूस्खलन की घटनाओं में होती है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) देशभर में लैंडस्लाइड सस्प्टिबिलिटी मैप तैयार करता है, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते चेतावनी दी जा सके। ————————- ये खबर भी पढ़ें… जम्मू-कश्मीर के डोडा में बादल फटा, मलबे में गाड़ियां दबीं: मुंबई में 48 घंटे में 15 इंच बारिश जम्मू-कश्मीर के डोडा में ऊपरी इलाके में बादल फटने से मलबा रिहायशी इलाकों में घुस गया। सड़कों पर कई गाड़ियां मलबे में दब गईं। महाराष्ट्र के कई जिलों में लगातार भारी बारिश हो रही है। मुंबई में पिछले 48 घंटे में करीब 15 इंच (380 मिमी) बारिश दर्ज की गई। IMD ने मंगलवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पूरी खबर पढ़ें…

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