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पंजाब कांग्रेस में बगावत पर दिल्ली चुप क्यों ?:क्या 2021 की गलती दोहरा रहा हाईकमान, चन्नी-वड़िंग की लड़ाई पड़ेगी भारी, एक्सपर्ट्स से समझिए

पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर ठीक 2021 वाली विस्फोटक स्थिति पैदा हो गई है। तब कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तनातनी थी और दोनों गुट अपना-अपना वर्चस्व दिखा रहे थे। अब 2026 में वही काम पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग कर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दिल्ली बैठे कांग्रेस हाईकमान का पंजाब के इस संकट को डील करने का पैटर्न भी बिल्कुल सेम यानी ‘साइलेंट मोड’ वाला है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स की माने तो कांग्रेस हाईकमान को पंजाब की ‘इमोशन’ का अंदाजा ही नहीं है, जिसके कारण वे यहां की गंभीर स्थिति को संभाल नहीं पा रहे हैं। पंजाब कांग्रेस में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी गुट में वर्चस्व की जंग अब सड़कों पर आ चुकी है। चन्नी ने अपने मोरिंडा स्थित घर पर नाराज पूर्व विधायकों और नेताओं का जमघट लगाकर अपनी ताकत दिखाई, तो दूसरी तरफ राजा वड़िंग हर हलके में जाकर स्थानीय नेताओं से अपने समर्थन का खुला ऐलान करवा रहे हैं। इसी गुटबाजी के बीच अब नवजोत सिंह सिद्धू गुट की एंट्री ने मामले को और त्रिकोणीय बना दिया है। इस सरेआम मचे घमासान के बावजूद हाईकमान इस पर विराम लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। 2021 और 2026 में गुटबाजी व हाईकमान के रवैये का पैटर्न जानिए… अब पढ़िए एक्सपर्ट ने क्या कहा… 2021 में कांग्रेस हाईकमान की क्या भूमिका रही… 2026 में हाईकमान की इस भूमिका के क्या इंपैक्ट होंगे, जानिए..

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