मप्र के पदोन्नति के पात्र 4 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति प्रक्रिया पर हाई कोर्ट का कोई स्थगन (स्टे) नहीं है, इसलिए मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत रुकी प्रमोशन प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए। इसी के तहत जीएडी ने मंगलवार को सभी विभागों के सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। विभागों से कहा गया है कि वे पदोन्नति के पात्र कर्मचारियों और रिक्त पदों की सूची तैयार कर डीपीसी की बैठकें करें। राज्य सरकार ने यह फैसला प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन की कानूनी राय के आधार पर लिया है। जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया के आदेश में कहा गया है कि विभाग पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, कानूनी राय में सरकार को यह भी आगाह किया गया है कि यदि भविष्य में अदालत का अंतिम फैसला पदोन्नति नियमों के विपरीत आता है, तो की गई पदोन्नतियों में बदलाव करना पड़ सकता है। इससे प्रशासनिक स्तर पर व्यावहारिक कठिनाइयां और उथल-पुथल की स्थिति भी बन सकती है। जानिए, किस आधार पर शुरू की पदोन्नति प्रक्रिया 1. हाई कोर्ट का स्टे नहीं, नियम वैध : सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की राय है कि पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने इन पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई। इसलिए सरकार नियमों के तहत पदोन्नति प्रक्रिया जारी रख सकती है। 2. परिस्थितियां बदलीं, इसलिए फिर शुरू होगी सुनवाई
हाई हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था, लेकिन फैसला आने से पहले एक जज सुप्रीम कोर्ट चले गए और दूसरे का तबादला हो गया। अब नई बेंच नए सिरे से सुनवाई करेगी। 3. प्रमोशन होंगे, लेकिन कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन
विधिक राय के अनुसार, सरकार डीपीसी की बैठकें कर पदोन्नति दे सकती है। हालांकि हर पदोन्नति आदेश में स्पष्ट रहेगा कि यह हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम फैसले के अधीन होगी। विपरीत फैसला आने पर सरकार आवश्यक संशोधन कर सकेगी। आगे क्या…3 परिस्थितियां बनेंगी बड़ा दावा- मप्र में अभी 40% स्टाफ पर चल रहा है प्रशासन
सरकार ने विधिक परामर्श के दौरान बताया कि प्रदेश का प्रशासन स्वीकृत पदों के केवल 40% कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। वर्षों से प्रमोशन रुके होने से वरिष्ठ पद खाली हैं और निचले स्तर पर नई भर्तियां भी प्रभावित हुई हैं। जनहित में पदोन्नति शुरू करना आवश्यक बताया गया है। प्रमोशन का असर: 1.5 लाख नई नौकरियों का रास्ता खुलेगा
पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से न केवल 4 लाख अधिकारी कर्मचारियों को प्रमोशन मिल सकेगा, बल्कि उनके प्रमोट होने पर एक साल के भीतर निचले स्तर के 1.5 लाख पद खाली होंगे। इससे प्रदेश में नई भर्तियां को रास्ता भी खुलेगा।
