जबलपुर में मानसून की देरी और जून में सामान्य से बेहद कम बारिश का असर अब जलाशयों पर साफ दिखाई देने लगा है। शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले बरगी बांध का जलस्तर लगातार घट रहा है। परियट और खंदारी जलाशयों में भी पानी कम होने लगा है। बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार बांध का जलस्तर प्रतिदिन करीब 5 सेंटीमीटर घट रहा है। कम पानी के कारण बिजली उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। दो में से एक बिजली उत्पादन यूनिट बंद कर दी गई है, जबकि दूसरी यूनिट का संचालन भी सीमित कर दिया गया है। 15 साल में सबसे खराब स्थिति बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार 15 जून को बांध का जलस्तर 407.85 मीटर था, जो घटकर अब 407.45 मीटर रह गया है। यानी करीब 40 सेंटीमीटर पानी कम हो चुका है। वर्तमान में बांध में केवल 12.59 प्रतिशत पानी शेष है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जल भंडारण करीब 22 प्रतिशत था। जून में सिर्फ डेढ़ इंच बारिश सामान्य तौर पर 30 जून तक जबलपुर में करीब 8 इंच बारिश दर्ज होती है, लेकिन इस वर्ष अब तक केवल करीब 1.5 इंच बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा अभी मंडला के आसपास है और इसके आगे बढ़ने की संभावना है। बिजली उत्पादन पर असर कम जलस्तर का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। बरगी बांध की दो उत्पादन इकाइयों में से एक को 27 जून से बंद कर दिया गया है। दूसरी यूनिट, जो पहले 8 से 10 घंटे चलती थी, अब केवल 3 घंटे प्रतिदिन संचालित की जा रही है। गेट खोलने पर भी नहीं निकलेगा पानी एक्सपर्ट का कहना है कि बांध का जलस्तर इतना नीचे पहुंच गया है कि यदि सभी 21 गेट खोल भी दिए जाएं तो उनसे पानी बाहर नहीं निकलेगा। बांध का एक हिस्सा सूख चुका है और इसे देखने के लिए लोग भी पहुंच रहे हैं। 15 साल का रिकॉर्ड टूटा मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष मानसून की दस्तक में भी देरी हुई है। इससे पहले 2009 में 29 जून और 2019 में 28 जून को मानसून सक्रिय हुआ था। वहीं 2013 और 2021 में मानसून 11 जून को ही पहुंच गया था। पानी की सप्लाई और सिंचाई पर बढ़ सकता है संकट बरगी बांध से नर्मदा का पानी जबलपुर समेत कई शहरों में पेयजल आपूर्ति के लिए भेजा जाता है। इसी बांध से निकलने वाली नहरों से जबलपुर और नरसिंहपुर में सिंचाई होती है और भविष्य में कटनी व सतना तक पानी पहुंचाने की योजना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट गहरा सकता है। लोग देखने पहुंच रहे सूखता बांध जबलपुर निवासी आकाश कोष्ठा ने बताया कि बरगी बांध के सूखने की चर्चा सुनकर वे मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि बांध का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। नर्मदा के कई घाटों पर चट्टानें दिखाई देने लगी हैं और नदी का पानी भी पहले की तुलना में कम व गंदला नजर आ रहा है। अल नीनो का असर भी माना जा रहा कारण मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अल नीनो प्रभाव के कारण इस वर्ष कम बारिश की संभावना बनी हुई है। यदि जुलाई में अच्छी बारिश नहीं हुई तो मध्य प्रदेश के कई जलाशयों में जल संकट गहरा सकता है और इसका असर बिजली उत्पादन, सिंचाई तथा पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
