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वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान में जियो न्यूज पर 15 दिन की रोक: मुहर्रम कार्यक्रम पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप

पाकिस्तान के प्रमुख उर्दू न्यूज चैनल जियो न्यूज का प्रसारण लाइसेंस 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (PEMRA) ने आरोप लगाया है कि मुहर्रम के दौरान प्रसारित एक कार्यक्रम में ऐसे धार्मिक दृश्य दिखाए गए, जो धार्मिक भावनाएं आहत कर सकते थे और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा पैदा कर सकते थे। PEMRA के अनुसार, 26 जून को प्रसारित ‘सफर-ए-इश्क’ कार्यक्रम में ऐसे दृश्य शामिल थे, जो पाकिस्तान की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संवेदनशीलताओं के अनुरूप नहीं थे। नियामक ने जियो न्यूज को आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं और मामले को काउंसिल ऑफ कंप्लेंट्स के पास भेज दिया है। कार्रवाई के बाद जियो न्यूज ने विवादित कार्यक्रम को अपने सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटा दिया और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। चैनल ने इसे संपादकीय चूक बताते हुए कहा कि कार्यक्रम में इराक और कुछ अन्य मध्य-पूर्वी देशों में शिया समुदाय द्वारा निभाई जाने वाली स्थानीय धार्मिक परंपराओं को केवल जानकारी के उद्देश्य से दिखाया गया था, किसी विशेष धार्मिक विचारधारा का समर्थन करने के लिए नहीं। इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता और मीडिया पर बढ़ते नियामक नियंत्रण को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबर… डोनेट्स्क के अहम शहर पर रूस का दबाव बढ़ा: यूक्रेन के ‘फोर्ट्रेस बेल्ट’ में घुसपैठ तेज
पूर्वी यूक्रेन के रणनीतिक शहर कोस्तियांतिनिव्का पर रूस का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक रूसी सैनिक शहर के बाहरी इलाकों तक पहुंच चुके हैं और छोटे-छोटे समूहों में घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं। यह शहर डोनेट्स्क क्षेत्र में यूक्रेन के ‘फोर्ट्रेस बेल्ट’ का अहम हिस्सा माना जाता है। कोस्तियांतिनिव्का चार प्रमुख शहरों की उस रक्षात्मक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके सहारे यूक्रेन डोनेट्स्क क्षेत्र की रक्षा कर रहा है। रूसी सेना ड्रोन, तोपखाने और गाइडेड बमों के जरिए यूक्रेन की आपूर्ति लाइनों पर लगातार हमले कर रही है। हालात इतने चुनौतीपूर्ण हो चुके हैं कि कई क्षेत्रों में भोजन, पानी और सैन्य सामग्री मानव रहित जमीनी रोबोट के माध्यम से पहुंचाई जा रही है। ड्रोन हमलों के कारण घायल और मृत सैनिकों को सुरक्षित निकालना भी बेहद मुश्किल हो गया है। कोस्तियांतिनिव्का के आसपास के इलाकों से लोग लगातार पलायन कर रहे हैं और ड्रोन हमलों के कारण भय का माहौल बना हुआ है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही कह चुके हैं कि युद्ध समाप्त होने से पहले पूरे डोनेट्स्क क्षेत्र पर नियंत्रण उनका प्रमुख लक्ष्य है। रिपोर्ट- जंगली जानवरों की अवैध तस्करी का सबसे बड़ा ऑनलाइन बाजार बना फेसबुक वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फेसबुक दुनिया में अवैध वन्यजीव तस्करी का सबसे बड़ा ऑनलाइन बाजार बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा की कमजोर मॉडरेशन व्यवस्था और कंटेंट से कमाई (मॉनेटाइजेशन) की सुविधा इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रही है। ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम (GI-TOC) के अध्ययन में अप्रैल 2024 से मार्च 2026 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 20 हजार से अधिक विज्ञापन और 2.60 लाख से ज्यादा वन्यजीव उत्पादों की बिक्री से जुड़े पोस्ट मिले। इनमें करीब 75% विज्ञापन फेसबुक पर पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, बिक्री के लिए पेश किए गए लगभग 84% वन्यजीव ऐसे थे, जिनके अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक व्यापार पर CITES संधि के तहत प्रतिबंध है। इनमें आधे से अधिक प्रजातियां संकटग्रस्त या अत्यंत संकटग्रस्त हैं। इन उत्पादों का कुल विज्ञापित मूल्य 6.6 करोड़ डॉलर (करीब 560 करोड़ रुपए) से अधिक बताया गया है। रिपोर्ट में पैंगोलिन, गैंडे के सींग, चिंपैंजी और संरक्षित पक्षियों समेत कई वन्यजीवों और उनके अंगों की खुलेआम बिक्री के उदाहरण दिए गए हैं। शोधकर्ताओं का आरोप है कि मेटा के विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन जैसे मॉनेटाइजेशन मॉडल ऐसे अकाउंट्स को आर्थिक लाभ पहुंचाते हैं, जिससे अवैध तस्करी को बढ़ावा मिलता है। हालांकि, मेटा ने इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि उसके प्लेटफॉर्म पर संकटग्रस्त वन्यजीवों और उनके उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। ब्रिटेन बदलेगा नौसेना की रणनीति: पुराने डेस्ट्रॉयर नहीं, ड्रोन-सक्षम 6 नए हाइब्रिड युद्धपोत बनाएगा
ब्रिटेन ने अपनी नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने पुराने Type-45 डेस्ट्रॉयर की जगह Type-83 युद्धपोत विकसित करने की योजना रद्द कर दी है। इसके बजाय कम से कम छह नए ड्रोन-सक्षम कॉमन कॉम्बैट वेसल्स बनाए जाएंगे, जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप मानव रहित प्रणालियों के साथ मिलकर काम करेंगे। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय (MoD) के अनुसार, ये हाइब्रिड युद्धपोत हवा, समुद्र की सतह और पानी के भीतर संचालित ड्रोन सिस्टम का समन्वय कर सकेंगे। इससे नौसेना की वायु रक्षा, निगरानी क्षमता और मारक शक्ति बढ़ेगी, जबकि चालक दल और संचालन लागत में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी होगी। इन जहाजों की डिलीवरी 2030 के दशक में शुरू होने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना को समुद्री रक्षा क्षमता में “एक पीढ़ी में एक बार होने वाला निवेश” बताया है। हालांकि रक्षा निवेश योजना (DIP) के बजट को लेकर सरकार के भीतर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। पर्याप्त फंडिंग नहीं मिलने के मुद्दे पर हाल ही में रक्षा सचिव जॉन हीली और सशस्त्र बल मंत्री अल कार्न्स ने इस्तीफा दिया था। विपक्ष का कहना है कि सरकार की रक्षा योजनाएं अब भी जरूरत के मुकाबले अपर्याप्त हैं। ब्रिटेन सरकार ने 2027 तक रक्षा खर्च को जीडीपी के 2.5% और 2035 तक 3.5% तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।

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