उज्जैन जमीन खरीद मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम डॉ. मोहन यादव की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। भोपाल में अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उनके परिवार, रिश्तेदारों और उनसे जुड़ी कंपनियों की ओर से उज्जैन जिले में कथित भूमि खरीद के मामले में कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 23 जून को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के तीन दिन बाद भी मुख्यमंत्री की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। यदि सब कुछ वैध है तो मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर दस्तावेजों के साथ प्रदेश की जनता को जवाब दें। पिता के इस्तीफे के बाद बेटा डायरेक्टर है सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 अक्टूबर 2017 को श्री सिद्धिविनायक डेवकॉन्स के निदेशक पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन 30 सितंबर 2018 को उनके पुत्र वैभव यादव कंपनी के निदेशक बन गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “दुकान वही… दुकानदार नया।” नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि खोजी रिपोर्ट सामने आने के बाद न मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, न तथ्यों का खंडन किया और न ही कोई दस्तावेज सार्वजनिक किए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो उन्हें स्वयं सामने आकर सभी सवालों का जवाब देना चाहिए।
बीजेपी नेताओं को भी दिया जवाब नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा के उस जवाब पर भी सवाल उठाए, जिसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. मोहन यादव की व्यक्तिगत भूमि होल्डिंग में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई और अधिकांश जमीनें मास्टर प्लान लागू होने से पहले खरीदी गई थीं। सिंघार ने कहा कि यदि हर सवाल का जवाब केवल यह होगा कि रिश्तेदार स्वतंत्र नागरिक हैं, तो जवाबदेही किसकी तय होगी। सिंघार ने दावा किया कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से पहले परिवार के पास करीब 82 एकड़ भूमि थी। वर्ष 2021 से 2023 के बीच, जब डॉ. मोहन यादव मंत्री थे, तब लगभग 85 एकड़ अतिरिक्त भूमि खरीदी गई। वहीं मुख्यमंत्री बनने के बाद वर्ष 2024-25 में दो वर्षों के भीतर लगभग 168 एकड़ भूमि खरीदे जाने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि यह केवल संयोग नहीं बल्कि गंभीर जांच का विषय है। कंपनियों की जमीन वाले क्षेत्र को मास्टर प्लान में शामिल किया प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्यमंत्री की पुत्रवधू शालिनी यादव द्वारा जून-जुलाई 2025 में उज्जैन के गंगेड़ी क्षेत्र में लगभग 10.35 एकड़ भूमि खरीदने का भी उल्लेख किया। इसके साथ ही सिद्धिविनायक डेवलपर्स द्वारा दिसंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच भूमि खरीद, कंपनी की शेयरहोल्डिंग और मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों के बीच हुए कथित भूमि लेन-देन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि वैभव यादव और मंगलमूर्ति इंफ्राटेक ने वर्ष 2023 में लगभग 30 एकड़ भूमि खरीदी, जिसे बाद में उज्जैन मास्टर प्लान-2035 के विकास क्षेत्र में शामिल किया गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्होंने यह मामला पहली बार 1 नवंबर 2025 को किसानों की शिकायतों के आधार पर उठाया था। विधानसभा में प्रश्न क्रमांक 1189 के माध्यम से उज्जैन जिले के उन्हेल क्षेत्र में कथित अनियमित भूमि रजिस्ट्री का मुद्दा भी उठाया गया था। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने अपने जवाब में शिकायत दर्ज होने और पुलिस जांच लंबित होने की बात स्वीकार की थी। सिंघार ने कहा कि सत्ता में रहते हुए हुई सभी भूमि खरीद और उससे जुड़े लेन-देन की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता पारदर्शिता चाहती है, चुप्पी नहीं, इसलिए मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर हर सवाल का जवाब दें।
