भोपाल में NSUI के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के प्रेस कॉन्फ्रेंस में CBSC से 12वीं का छात्र रो पड़ा। छात्र ने बताया- 10वीं बोर्ड परीक्षा में 95.8 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। मैंने टॉप किया था। हमेशा पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन 13 मई को घोषित हुए CBSE परीक्षा परिणाम ने उन्हें गहरा झटका दिया। पन्ना जिले के छात्र लक्ष्य मिश्रा ने बताया- CBSC के अधिकारियों ने मूल्यांकन में गड़बड़ी की। मेरा भविष्य बर्बाद कर दिया। लक्ष्य ने अपनी हिंदी विषय की उत्तर पुस्तिका दिखाए। मूल्यांकन के दौरान कई गलतियां दिखाई। मार्किंग स्कीम के हिसाब से 17 अंक और मिलने चाहिए थे। सही उत्तर लिखने के बाद भी नंबर नहीं मिले लक्ष्य ने कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के सामने अपनी पीड़ा साझा की। बताया रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) के बहुविकल्पीय प्रश्न क्रमांक 6 के ‘बी’ भाग में सही उत्तर देने के बावजूद उन्हें अंक नहीं दिए गए। पूरा उत्तर लिखने के बावजूद परीक्षक ने मूल्यांकन नहीं किया। अपनी बातें रखते हुए लक्ष्य भावुक हो गए और फूट-फूटकर रो पड़े। इस दौरान उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने लक्ष्य को शांत कराया। छात्रों की पीड़ा सुनकर सांसद मसूद भी भावुक हो गए। उन्होंने CBSC और सरकार को घेरा। कहा- 10 साल 89 पेपर लीक हुए। करोड़ों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया गया। डेढ़ महीने से परिवार और छात्र टेंशन में लक्ष्य ने बताया कि परिणाम और उसके बाद की प्रक्रिया से वह मानसिक रूप से काफी प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि पिछले डेढ़ महीने से वह गहरे अवसाद में हैं। परिवार भी चिंतित है और माता-पिता को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उनका बेटा कोई गलत कदम न उठा ले। लक्ष्य मिश्रा ने बताया- कक्षा 12वीं की रिजल्ट में CBSE ने गड़बड़ी की है। हिंदी के 15 प्रश्नों (लगभग 17 अंक), केमिस्ट्री के 3 प्रश्नों (4 अंक), फिजिक्स के 2 प्रश्नों (1 अंक) और मैथ्स के 1 प्रश्न (1 अंक) के लिए पुनर्मूल्यांकन कराया। पुनर्मूल्यांकन में केवल गणित का 1 अंक बढ़ाया। इससे साफ हुआ कि गड़बड़ी की गई। लक्ष्य बोला- मुझे कहा गया कि अब कुछ नहीं हो सकता वहीं केमिस्ट्री के प्रश्न 6 (MCQ) में मेरा उत्तर (Option B) आधिकारिक मार्किंग स्कीम के अनुसार सही होने के बावजूद 0 अंक ही रहने दिए गए। हिंदी विषय में भी अंक नहीं बढ़ाया गया, जबकि मेरी आपत्तियां पूरी तरह तथ्य आधारित थीं। इसके बाद मैंने CBSE रिजनल ऑफिस भोपाल में फोन किया। डिटेल में लिखित अपील भी भेजी, लेकिन मुझे कहा गया कि अब कुछ नहीं हो सकता। NEET अभ्यर्थी खुशी सिटोके ने भी सुनाई आपबीती खंडवा से आई NEET अभ्यर्थी खुशी सिटोके ने कहा कि आज देश का युवा उस स्थिति में खड़ा है, जहां वर्षों की मेहनत और माता-पिता के त्याग पर सिस्टम की कमियों का असर पड़ रहा है। पेपर लीक जैसी घटनाओं का खामियाजा लाखों ईमानदार छात्रों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने बताया कि हॉस्टल में रहकर कठिन परिस्थितियों में तैयारी करने वाले छात्रों को जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तो कई बार उनके मन में आत्महत्या जैसे विचार भी आने लगते हैं। उन्होंने मांग की कि वर्तमान परीक्षा प्रणाली के साथ-साथ राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में भी व्यापक सुधार किए जाएं। 10 साल में 89 पेपर लीक होने का दावा वहीं सांसद इमरान मसूद ने कहा- सरकारी आंकड़ों और पीआईबी (PIB) रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 वर्षों में देश में 89 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। उनके अनुसार, इन घटनाओं से लगभग 6.5 करोड़ युवाओं और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में 48 परीक्षाओं को दोबारा आयोजित करना पड़ा, जबकि 22 परीक्षाएं आयोजित होने से पहले ही निरस्त करनी पड़ीं। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। कांग्रेस की मांगें एक नजर में भोपाल में शुरू हुआ ‘छात्रों की गूंज’ अभियान गुरुवार को भोपाल में NSUI ने ‘छात्रों की गूंज’ नाम से राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की। अभियान का पोस्टर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और NSUI नेता अंशुल त्रिवेदी की मौजूदगी में जारी किया। इस कार्यक्रम में NEET और CBSE की कथित विसंगतियों से प्रभावित छात्र-छात्राओं ने अपनी समस्याएं और अनुभव साझा किए। ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का पूरा रोडमैप
