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नहर पर पहले लाखों फूंके, अब 26 करोड़ और लगेंगे:बरगी की नहर पर दोबारा किया जा रहा खर्च, किसानों ने लगाए एनवीडीए पर लापरवाही के आरोप

बरगी की एक नहर के तट की 80 लाख रुपए में मरम्मत करवाई गई, अब उसी नहर पर दोबारा 26 करोड़ रुपए खर्च कर मरम्मत की जा रही है।
बरगी दाई तट नहर का 27 मीटर हिस्सा फरवरी में कट गया था। एनवीडीए ने जल्दबाजी में 70 से 80 लाख रुपए खर्च कर मरम्मत कराई, लेकिन अब उसी क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने के लिए 26.47 करोड़ रुपए की नर्रई एक्वाडक्ट परियोजना के तहत दोबारा काम कराया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि पहली मरम्मत में गुणवत्ता की अनदेखी की गई और अब भी बिना निगरानी व परीक्षण के निर्माण कार्य कराया जा रहा है। मेंटेनेंस पर सवाल बरगी दाई तट नहर का निर्माण वर्ष 2002 में करोड़ों रुपए खर्च कर जबलपुर, कटनी, सतना और रीवा जिलों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए किया गया था। नहर के नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद देखरेख के अभाव में इसका एक हिस्सा फरवरी में टूट गया। खरीफ सीजन को देखते हुए एनवीडीए ने आनन-फानन में 70 से 80 लाख रुपए खर्च कर मरम्मत कराई और कुछ दिनों तक एक लाइन से किसानों को पानी भी उपलब्ध कराया। फिर तोड़कर शुरू किया 26 करोड़ का काम लाखों रुपए खर्च कर जिस हिस्से की मरम्मत कराई गई थी, उसे जून में दोबारा तोड़ दिया गया। एनवीडीए ने राइट बैंक कैनाल के नर्रई एक्वाडक्ट के मरम्मत और पुनर्वास कार्य के लिए 26.47 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया। परियोजना के तहत ट्रांजिशन स्ट्रक्चर, रिटेनिंग वॉल, क्लोज्ड बैरल, पाइल फाउंडेशन और अन्य आरसीसी संरचनाएं बनाई जा रही हैं। हालांकि किसानों का आरोप है कि निर्माण कार्य बिना पर्याप्त निगरानी, गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी मानकों के कराया जा रहा है, जिससे भविष्य में फिर हादसे की आशंका बनी हुई है। टर्नकी टेंडर से बढ़ी लागत, गुणवत्ता पर उठे सवाल जानकारों का कहना है कि नर्रई एक्वाडक्ट के मरम्मत कार्य को टर्नकी प्रोजेक्ट के रूप में स्वीकृति देकर इसकी लागत बढ़ा दी गई। आरोप है कि ट्रांजिशन स्ट्रक्चर क्षेत्र में करीब दो मीटर गहराई तक पीसीसी फाउंडेशन का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन कार्य शुरू करने से पहले आवश्यक बेंचमार्क (स्थायी स्तर बिंदु) स्थापित नहीं किए गए। वहीं निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के लिए गुणवत्ता नियंत्रण इकाई द्वारा नियमित परीक्षण और सत्यापन भी नहीं कराया जा रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक सिंचाई परियोजनाओं में खुदाई की गहराई, संरचनाओं की ऊंचाई और स्तरों के सत्यापन के लिए बेंचमार्क स्थापित करना अनिवार्य होता है। टेंडर दस्तावेजों के अनुसार परियोजना में 168 मीटर लंबी रिटेनिंग वॉल व कैनाल बेड, दो क्लोज्ड बैरल, पाइल फाउंडेशन, स्लोप प्रोटेक्शन और लगभग 850 मीटर लंबी संपर्क सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। ऐसे में 26.47 करोड़ रुपए की परियोजना में गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ठेकेदार बनाए ड्राइंग-डिजाइन स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, कंक्रीट क्यूब टेस्ट रिपोर्ट, मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट तथा गुणवत्ता नियंत्रण इकाई के निरीक्षण अभिलेख पर सवाल खड़े करते हुए कामों की रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। इसके साथ स्वतंत्र तकनीकी जांचकर यह सुनिश्चित किया जाने की बात कही है कि निर्माण कार्य स्वीकृत डिज़ाइन और मानकों के अनुरूप किया जा रहा है, या नहीं। बताया जा रहा है कि भोपाल की मेसर्स अलमायटी वेंचर प्रा.लि. को एनवीडीए ने यह काम दिया है। 1 हजार गांव के किसानों पर संकट सगड़ा-छपनी गांव के किसान नारायण सिंह बताते हैं कि बरगी बांध की दाई तट नहर एक हजार से अधिक गांवों के किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख साधन है। चार माह पहले नहर टूटने के बाद विभाग ने करीब 78 लाख रुपए खर्च कर मरम्मत कराई थी, लेकिन जून में 26.47 करोड़ रुपए के नए टेंडर के बाद उसी हिस्से को दोबारा तोड़कर निर्माण शुरू कर दिया गया। नारायण सिंह के मुताबिक जबलपुर के अलावा स्लीमनाबाद, बहोरीबंद, सिहोरा, कुंडम और पनागर क्षेत्र के किसान भी इसी नहर पर निर्भर हैं। ठेकेदार एक माह में नहर चालू करने का दावा कर रहा है, जबकि परियोजना की अवधि 18 माह निर्धारित है। ऐसे में यदि काम लंबा खिंचता है तो एक हजार गांवों के किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। खरीफ सीजन में धान, मक्का, सोयाबीन, मूंग और उड़द जैसी फसलों को मई-जून में पानी की सबसे अधिक जरूरत होती है। निर्माण कार्य के कारण दाई तट नहर पूरी तरह सूखी पड़ी है और किसानों की फसलें पानी के अभाव में सूखने लगी हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि 15 जून के बाद मानसून राहत देगा, लेकिन इस बार बारिश भी समय पर नहीं पहुंची। पहले रबी, अब खरीफ फसल पर संकट किसान मनीष कुमार उपाध्याय का कहना है कि फरवरी में नहर टूटने से रबी की फसल बर्बाद हो गई थी, लेकिन किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिला। अब नहर की मरम्मत के नाम पर पानी रोके जाने से खरीफ की फसलें भी सूखने लगी हैं। उनका आरोप है कि जिस मरम्मत पर 5 से 10 लाख रुपए खर्च होने चाहिए थे, उस पर पहले 70-80 लाख रुपए खर्च किए गए और अब उसी हिस्से पर 26 करोड़ रुपए की परियोजना चलाई जा रही है। कंपनी बोली- समय से पहले पूरा करेंगे काम 26.47 करोड़ रुपए की लागत से नहर मरम्मत का काम भोपाल की मेसर्स अलमायटी वेंचर प्रा.लि. को मिला है। कंपनी के सुपरवाइजर नितेश भार्गव के अनुसार 20 दिन से काम चल रहा है। पहले बनाई गई संरचना को तोड़कर नए सिरे से निर्माण किया जा रहा है। बारिश होने तक काम जारी रहेगा, जबकि फिलहाल मरम्मत के लिए बरगी बांध से पानी छोड़ना बंद कर दिया गया है। तीन साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी एनवीडीए के प्रमुख अभियंता डी.एल. वर्मा ने बताया कि 26 करोड़ रुपए में सिर्फ टूटा हिस्सा नहीं, बल्कि अन्य संरचनात्मक कार्य भी शामिल हैं। मरम्मत के बाद दो से तीन साल तक नहर के रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी और किसी भी कमी को उसे अपने खर्च पर दुरुस्त करना होगा। उनका कहना है कि हर साल जुलाई के पहले सप्ताह में ही नहर से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। स्वतंत्र जांच की मांग बरगी निवासी नीरज मिश्रा ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर निर्माण कार्य की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने, भुगतान और तकनीकी स्वीकृतियां रोकने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। ये खबर भी पढ़ें… बरगी बांध की नहर टूटी, खेतों में घुसा पानी बरगी थाना क्षेत्र में रविवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब दोपहर करीब 12 बजे बरगी बांध की मुख्य दाईं तट नहर ग्राम सगड़ा-झपनी के पास टूट गई। नहर टूटते ही तेज बहाव के साथ पानी आसपास के 6 गांवों के खेतों में घुस गया, जिससे किसानों की खड़ी फसलें डूब गईं। देखते ही देखते खेत तालाब में तब्दील हो गए और ग्रामीणों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।पूरी खबर पढ़ें

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