Homeमध्यप्रदेश60 रुपए की पानी की बोतल के वसूले 175 रुपए:4 साल बाद...

60 रुपए की पानी की बोतल के वसूले 175 रुपए:4 साल बाद उपभोक्ता फोरम का फैसला, होटल रेडिसन को लौटाने होंगे 8 हजार रुपए

60 रुपए एमआरपी वाली मिनरल वॉटर की बोतल के बदले 175 रुपए वसूलना भोपाल के एक होटल को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने कहा कि होटल परिसर में एमआरपी से अधिक कीमत पर पानी बेचना नियमों के खिलाफ नहीं है, लेकिन उस कीमत पर अलग से जीएसटी वसूलना अनुचित है। आयोग ने होटल को अतिरिक्त वसूले गए 10.80 रुपए लौटाने के साथ 5 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना और 3 हजार रुपए वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए हैं। मामला अप्रैल 2022 का है। रायसेन रोड निवासी हुकुम सिंह ठाकुर अपने चार साथियों के साथ होटल रेडिसन में बुफे डिनर के लिए गए थे। भोजन के दौरान उन्होंने मिनरल वॉटर की बोतल ली, जिसका एमआरपी 60 रुपए था, लेकिन बिल में इसके 175 रुपए जोड़ दिए गए। परिवादी ने आपत्ति जताई, लेकिन होटल प्रबंधन ने राशि वापस नहीं की। बाद में उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया गया। आयोग ने जून 2026 में सुनाए फैसले में माना कि 175 रुपए की कीमत में ही जीएसटी शामिल माना जाएगा। ऐसे में होटल द्वारा 18 प्रतिशत जीएसटी के रूप में अतिरिक्त 10.80 रुपए वसूलना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। तय अवधि में भुगतान नहीं करने पर होटल को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। बिल में राशि देखकर होश उड़ गए रायसेन रोड निवासी हुकुम सिंह ठाकुर अपने चार साथियों के साथ होटल रेडिसन में बुफे डिनर के लिए पहुंचे थे। जब बिल सामने आया तो कुल राशि 6809.88 रुपए थी, जिसमें एक पानी की बोतल के लिए 175 रुपए जोड़े गए थे, जबकि उसी बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) मात्र 60 रुपए अंकित था। विपक्ष का तर्क: सेवाओं के कारण एमआरपी से अधिक कीमत लेना जायज होटल प्रबंधन की ओर से यह तर्क रखा गया कि रेस्टोरेंट या होटल में दी जाने वाली वस्तुएं केवल उत्पाद नहीं होतीं, बल्कि उनके साथ कई प्रकार की सेवाएं भी शामिल होती हैं। इनमें एयर कंडीशनिंग, बैठने की सुविधा, लाउंज, संगीत, सर्विस और अन्य आतिथ्य सेवाएं शामिल हैं। इसी वजह से मेन्यू कार्ड में जो कीमतें लिखी होती हैं, वही लागू होती हैं और बोतल पर अंकित एमआरपी केवल रिटेल दुकानों के लिए होती है, न कि होटल में सर्व किए जाने के लिए। होटल ने यह भी कहा कि मेन्यू में पहले से स्पष्ट किया गया था कि जीएसटी अलग से लिया जाएगा। आयोग ने कहा: कीमत सही, लेकिन टैक्स वसूली में गलती आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए माना कि होटल में एमआरपी से अधिक कीमत लेना सेवा में कमी नहीं है। यह भी स्पष्ट किया कि एमआरपी में जीएसटी पहले से शामिल होता है, इसलिए उस पर अलग से टैक्स वसूलना गलत है। हालांकि, आयोग ने यह भी साफ किया कि एमआरपी में पहले से ही जीएसटी शामिल होता है, इसलिए उस पर अलग से जीएसटी वसूलना गलत है। इसी आधार पर आयोग ने होटल की कार्रवाई को आंशिक रूप से अनुचित व्यापार प्रथा मानते हुए उपभोक्ता को राहत प्रदान की। परिवादी ने कहा- स्टाफ ने बदतमीजी भी की परिवादी हुकुम सिंह ठाकुर का कहना है कि उन्होंने 2022 में होटल में भोजन के दौरान केवल एक पानी की बोतल ली थी, जिसकी एमआरपी 60 रुपए थी, लेकिन उनसे 175 रुपए वसूले गए। जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो होटल स्टाफ ने न केवल बहस की, बल्कि उनके साथ बदतमीजी भी की। इसी व्यवहार और अधिक कीमत वसूले जाने के विरोध में उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि जीएसटी की राशि तकनीकी रूप से सही निकली, लेकिन मूल मुद्दा एमआरपी से अधिक कीमत और होटल के व्यवहार का था, जिस पर उन्हें न्याय आंशिक ही मिला है। यह सिर्फ कुछ रुपए का विवाद नहीं परिवादी पक्ष के अधिवक्ता शशिकांत वर्मा ने बताया कि क्लाइंट हुकुम सिंह ठाकुर होटल रेडिसन पहुंचे थे, जहां भोजन के दौरान 60 रुपए एमआरपी वाली पानी की बोतल के लिए 175 रुपए वसूले गए। जब इस पर आपत्ति जताई गई तो होटल स्टाफ ने न केवल कीमत को सही ठहराया बल्कि अभद्र व्यवहार करते हुए कहा कि होटल में रेट वही तय करते हैं, जिससे उनके क्लाइंट को अपमानित होना पड़ा। इसके बाद उन्होंने विधिक नोटिस भेजा, लेकिन होटल की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया, जिसके चलते मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा। अधिवक्ता वर्मा के मुताबिक यह सिर्फ कुछ रुपए का विवाद नहीं था, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों के हनन का मामला था, क्योंकि होटल और रेस्टोरेंट अक्सर अपनी सुविधाओं के नाम पर मनमाने दाम वसूलते हैं। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा 10.80 रुपए अतिरिक्त जीएसटी लौटाने का आदेश तकनीकी आधार पर दिया गया है, जो एक बोतल पर लागू टैक्स के अनुसार है, लेकिन इस फैसले का महत्व इससे कहीं ज्यादा है, क्योंकि यह उपभोक्ताओं को यह संदेश देता है कि अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने पर न्याय मिल सकता है। एमआरपी (MRP) को लेकर आयोग ने जिस केस का हवाला दिया है फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया (सिविल अपील नं. 21790/2017, निर्णय दिनांक 12.12.2017) इसके अलावा आयोग ने एक और फैसले ITC Ltd vs K.C. Khanna (अपील नं. A/2013/2201, निर्णय दिनांक 04.09.2023) का उल्लेख किया गया है। क्या कहा गया इन फैसलों में? इन दोनों निर्णयों में यह सिद्धांत स्थापित किया गया कि होटल, रेस्टोरेंट, एयरलाइन, रेलवे जैसे “संस्थागत उपभोक्ता” पैकेज्ड वस्तुएं (जैसे मिनरल वॉटर) निर्माता से खरीदकर अपनी सेवाओं के साथ ग्राहकों को देते हैं। इसलिए उन पर सामान्य रिटेल एमआरपी नियम (Legal Metrology Act) उसी तरह लागू नहीं होते जैसे दुकानों पर होते हैं। यही वजह है कि आयोग ने माना कि होटल द्वारा एमआरपी से अधिक कीमत लेना अपने आप में अवैध नहीं है। ये खबर भी पढ़ें… बीमा कंपनी बोली- नदी में क्यों कूदा,ये शर्तों का उल्लंघन भोपाल के कोलार इलाके के दत्तु सोनवाने ने 1 नवंबर 2022 को डूबते बच्चे को बचाने के लिए नर्मदा नदी में छलांग लगाई और अपनी जान गंवा दी। जब उनकी पत्नी ने बीमा कंपनी से मुआवजे का दावा किया, तो कंपनी ने सवाल उठाया, “तैरना नहीं आता था तो नदी में क्यों उतरे?” लेकिन जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, यह कदम लापरवाही नहीं, बल्कि एक मानवीय और साहसी प्रयास था।पूरी खबर पढ़ें

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here