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कांग्रेस बोली-सरकार के संरक्षण में हुआ उज्जैन जमीन खरीद घोटाला:बीजेपी और संघ की मिलीभगत; बीजेपी का जवाब- ये राज्यसभा चुनाव हारने की हताशा

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश सरकार के संरक्षण में उज्जैन में जमीन खरीद घोटाले को अंजाम दिया गया है। कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा और पार्टी के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये बात कही। कांग्रेस नेताओं ने कहा- इस मुद्दे पर बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व चुप्पी साधे है। इससे साफ है कि ये उनकी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मिलीभगत है। इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज से करानी चाहिए। वहीं मंत्री चेतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आते हैं, इसलिए कांग्रेस उन्हें बदनाम कर रही है। राज्यसभा चुनाव में मिली करारी हार की हताशा के कारण कांग्रेस इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रही है। पटवारी ने पूछा- ओबीसी होने से गलत काम की छूट मिल जाती है? कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी ने भाजपा पर मामले को भटकाने का आरोप लगाया। पटवारी ने कहा- जब जमीन पर सवाल पूछा गया तो भाजपा ने मुख्यमंत्री के ओबीसी होने का कार्ड खेल दिया। क्या ओबीसी होने का मतलब यह है कि किसी को भी गलत काम करने की छूट मिल जाती है? मैं खुद ओबीसी समाज से आता हूं और मुख्यमंत्री से सीधे जवाब चाहता हूं। वीर भारत न्यास को 1 रुपए में 500 करोड़ की जमीन क्यों दी? पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा- उज्जैन में ‘वीर भारत न्यास’ नाम के एक ट्रस्ट को 500 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन महज 1 रुपए की टोकन राशि पर दे दी गई। इसके ट्रस्टी श्रीराम तिवारी हैं, जो मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार हैं। इस ट्रस्ट को इतनी महंगी जमीन किस आधार पर दी गई। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार ने जो जमीनों का लैंड बैंक बनाया, उसकी आय का स्रोत क्या था? क्या इन संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक नहीं होना चाहिए? यह घोटाला सिर्फ पहली सीरीज है। चार दिन पहले ही मुख्यमंत्री के सानिध्य में छह विभागों में ट्रांसफर इंडस्ट्री चलाकर 1000 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का स्टिंग ऑपरेशन सबने देखा है। पटवारी ने मांग की है कि सरकार सभी परियोजनाओं की टाइमलाइन साझा करे और 2023 के बाद मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा खरीदी गई सभी जमीनों को लेकर एक श्वेत पत्र जारी करे। मंत्री काश्यप बोले- जिस पर आरोप लगे, वह पुरानी जमीन मध्य प्रदेश के एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने कांग्रेस के आरोपों को मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा- जीतू पटवारी जिस ‘वीर भारत न्यास’ ट्रस्ट पर 500 करोड़ की जमीन हथियाने का आरोप लगा रहे हैं, वह कोई निजी ट्रस्ट नहीं बल्कि पूरी तरह से सरकारी ट्रस्ट है। काश्यप ने कहा कि जीतू पटवारी ने पढ़ना-लिखना बंद कर दिया है। कांग्रेस को पहले अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर लगे जमीन गड़बड़ी के आरोपों की जांच करानी चाहिए। खेड़ा बोले- शेयर मार्केट जैसी ‘इंसाइडर ट्रेडिंग’ की पवन खेड़ा ने मामले की तुलना शेयर बाजार की ‘इंसाइडर ट्रेडिंग’ से की। उन्होंने कहा- मुख्यमंत्री के पास अंदरूनी और गोपनीय जानकारी थी कि उज्जैन के मास्टर प्लान 2035 में कौन सी सड़कें कहां से गुजरेंगी? कौन सा क्षेत्र विकास योजनाओं के लिए चिह्नित किया जाएगा? इस जानकारी का दुरुपयोग करके मुख्यमंत्री के परिवार ने दिसंबर 2023 में 168 एकड़ में से 111 एकड़ जमीन उसी क्षेत्र में खरीद ली, जहां सिंहस्थ लगने वाला है। पवन खेड़ा ने कहा- आदर्श हाउसिंग सोसायटी में सिर्फ सास के नाम पर फ्लैट होने के आरोप पर कांग्रेस ने अशोक चव्हाण का इस्तीफा ले लिया था। लेकिन यहां सैकड़ों एकड़ जमीन के पुख्ता सबूत होने के बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी बरकरार है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री का उदाहरण देते हुए कहा कि संघ से जुड़े मुख्यमंत्रियों पर सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती। जमीन हड़पने के खेल को संघ का संरक्षण खेड़ा ने कहा- जमीन हड़पने के इस खेल में शामिल लोगों को संघ का पूरा संरक्षण प्राप्त है। आज के हालात ‘संघम शरणम् गच्छामि’ जैसे हो गए हैं। संघ खुद को एक गैर-पंजीकृत संस्था बनाकर रखता है ताकि उसके पास सारी शक्तियां तो रहें, लेकिन किसी भी गड़बड़ी पर उसकी कोई जिम्मेदारी और जवाबदेही तय न हो सके। ऊर्जा मंत्री बोले- कांग्रेस ने सीएम की छवि खराब की ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की छवि कांग्रेस ने खराब की है। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद से कोई जमीन नहीं खरीदी। डॉ. मोहन यादव का परिवार व्यापार करने के लिए स्वतंत्र है। सभी के परिवार के लोग व्यापार करते हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री की संपत्ति की बारे में गलत जानकारी दी जा रही है। मुख्यमंत्री को बदनाम करने की साजिश कामयाब नहीं हो पाएगी। सिंघार बोले- सभी ओबीसी तो आरक्षण लागू क्यों नहीं विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंडला में कहा- मुख्यमंत्री को ओबीसी चेहरा बताकर उनका बचाव किया जा रहा है, लेकिन अगर भाजपा वाकई में पिछड़ा वर्ग की हितैषी है, तो प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू क्यों नहीं कर पा रही? उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “वे ओबीसी मुख्यमंत्री की बात कर रहे हैं। इससे पहले शिवराज सिंह चौहान भी ओबीसी थे। जब सब ओबीसी हैं तो 27 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दे पा रहे हैं?” वहीं उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के CM के पक्ष में बयान को लेकर कहा कि यह तो केवल यादव प्रेम है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- आरोप पूरी तरह गलत इससे पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मंगलवार को कहा था कि मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं। 2023 विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते समय यादव के पास 17 एकड़ जमीन थी। आज 2026 में भी उतनी ही जमीन है। मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव के नाम 12.29 एकड़ जमीन थी, जिसमें भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव यादव के पास 2023 से पहले 16 एकड़ जमीन थी। मुख्यमंत्री की बहू शालिनी यादव ने 10 एकड़ कृषि भूमि खरीदी थी, जो मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर स्थित है। यह पूरी जमीन मास्टर प्लान लागू होने से पहले की है। आरोपों में जिस सिद्धि विनायक कंपनी का जिक्र किया गया है, उसके पास वर्ष 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो अब घटकर 65 एकड़ रह गई है। मोहन यादव ने वर्ष 2017 में ही इस कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। ये खबर भी पढ़ें… दिग्विजय की कुर्सी बदलने, बोलने से मना करने के वीडियो मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का 9 जून को नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के बीच मनमुटाव साफ दिखाई दिया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक और वीडियो सामने आया है। पढ़ें पूरी खबर…

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