मुख्य सचिव अनुराग जैन ने आज प्रदेश के लाखों पेंशनर्स को तीन माह से पेंशन नहीं मिल पाने पर प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय को जमकर फटकार लगाई। मुख्य सचिव ने यहां तक कह दिया कि अगर आपको तीन माह तक वेतन न मिले तो आपको कैसा लगेगा? आज तक आप पेंशन संबंधी प्राब्लम ट्रेस आउट नहीं कर पाए।
सीएस जैन ने ये बातें बुधवार को तब कहीं जब वे विभाग प्रमुखों के साथ अलग-अलग एजेंडों पर समीक्षा बैठक कर रहे थे। दरअसल सीएस जैन ने समीक्षा बैठक के दौरान अप्रेल से जून तक लाखों पेंशनर्स को वेरिफिकेशन नहीं हो पाने के चलते पेंशन भुगतान नहीं हो पाने के मामले में जानकारी ले रहे थे। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय ने इस दौरान कहा कि भारत सरकार की गाइडलाइन…. तभी सीएस ने टोका और कहा कि आप अभी तक प्रॉब्लम ट्रेस नहीं कर पाए। इस दौरान वित्त सचिव रहे भास्कर लक्षकार का जिक्र भी आया तो फिर सीएस ने कहा कि जब आप की जिम्मेदारी थी तब आपने क्या किया? सीएस जैन ने इस पूरे मामले में लापरवाही पर खासी नाराजगी जताई है। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि सरकार की योजनाओं के फील्ड में क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति से सरकार के आला अफसर वाकिफ नहीं हैं। प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों की कलेक्टरों और फील्ड के अफसरों से योजनाओं पर अमल को लेकर बात नहीं होती है। इसलिए पेंडेंसी रहती है और लोगों को परेशान होना पड़ता है। सीएस जैन ने ये बातें बुधवार को मंत्रालय में विभाग प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक में कहीं। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे आमजन को सीधे राहत पहुंचाने वाली लोकसेवा गांरटी योजना और सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण करें। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी योजना के प्रकरणों का विभागाध्यक्ष साप्ताहिक रिव्यू और मॉनिटरिंग करें। निचले स्तर के अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा हो और समय-अवधि में ही प्रकरण निराकृत हों। उन्होंने कहा कि विभागाध्यक्ष कार्यालय तक तो प्रकरण आना ही नहीं चाहिए। बैठक के दौरान विभिन्न न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई और समय-सीमा में जबाव-दावा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने विभागाध्यक्षों से वार्षिक कार्य-योजना भी शीघ्र देने के लिए कहा है। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभागाध्यक्ष तय करें कि कैबिनेट से स्वीकृत प्रकरणों में शत-प्रतिशत आदेश हो जाएं। 1947 के पहले के एक्ट निरस्त करने और संशोधन के प्रस्ताव कैबिनेट में लाएं बैठक में वर्ष 1947 से पूर्व के कानूनों में पुन:संशोधन या निरस्त किए जाने की कार्यवाही की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि ऐसे कानून जिनकी अब जरूरत नहीं हैं- ठीक से परीक्षण कर लें और यथोचित प्रस्ताव प्रस्तुत करें। इस दौरान विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में आने वाले विधेयक और एक्ट आदि पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने शीघ्र ही इस तरह के विधेयकों को तैयार कर कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है जिससे आगामी सत्र में उन्हें सदन में प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि पूर्व सत्रों के शून्यकाल, अपूर्ण प्रश्न, आश्वासन और लोकलेखा समिति की सिफारिशों संबंधी उत्तर विधानसभा को समय-सीमा में प्रस्तुत कर दिए जाएं। मुख्य सचिव जैन ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी शासकीय भवनों की छत पर सोलर पैनल लगाने के काम में तेजी लाएं और राज्य स्तर पर समन्वय के लिए जिलावार नोडल आफीसर नियुक्त करें। इस दौरान उद्योग विभाग से संबंधित डी रेगुलेशन के 12 प्रकरणों पर भी चर्चा हुई। बैठक में गृह विभाग के साइबर धोखाधड़ी, पाक्सो एक्ट के प्रकरणों, मादक और विस्फोटक पदार्थों की रोकथाम तथा नवीन न्याय संहिता पर विमर्श किया गया। इस दौरान राजस्व और स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की गई।
