मोहन यादव सरकार ने 2027 में होने वाले नगर निगम, नगरपालिका चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। अभी चुनाव होने में डेढ़ साल का समय बाकी है लेकिन सरकार ने महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष के पद के लिए आरक्षण की कार्रवाई कराने अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर दी है। नगरीय विकास और आवास विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, आयुक्त नगरीय प्रशासन और विकास विभाग को इसके लिए अधिकृत अफसर घोषित कर दिया गया है। दूसरी ओर राज्य निर्वाचन आयोग भी इसी के मद्देनजर नगरीय निकायों की मतदाता सूची तैयार कराने में जुट गया है। नगरीय प्रशासन और विकास विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार मध्यप्रदेश नगरपालिका (महापौर और अध्यक्ष) के पद का आरक्षण नियम 1999 के प्रावधान के अंतर्गत होगा। इसलिए नगरीय निकायों के आगामी निर्वाचन के लिए महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण की कार्रवाई के लिए आयुक्त नगरीय प्रशासन और विकास अधिकृत होंगे। राज्य सरकार ने 12 जून को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। मौजूदा परिस्थितियों में ऐसी होगी नगर निकायों में आरक्षण की स्थिति महिला आरक्षण: कुल सीटों का 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित होता है। अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST): इन वर्गों के लिए आरक्षण संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तय किया जाता है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): ओबीसी वर्ग के लिए 27% आरक्षण का प्रावधान है। इसका रोटेशन इस तरह होता है कि पिछली बार आरक्षित रहे निकायों को छोड़कर नए निकायों को मौका मिले। सभी 16 नगर निगमों (जैसे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर आदि) के लिए हर चुनाव से पहले लॉटरी के माध्यम से यह तय किया जाता है कि किस निगम में महापौर की सीट किस वर्ग (जैसे- अनारक्षित, ओबीसी महिला, एससी, एसटी) के खाते में जाएगी। पिछले 12 साल की टाइमलाइन 2022 के मेयर चुनाव के लिए यह थी आरक्षण की स्थिति इसके पहले 2014 में मेयर पद के लिए ये थी आरक्षण की स्थिति
