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रोहतक अग्निकांड- 5 फैक्टर जिनसे आग बेकाबू हुई:फायर ब्रिगेड लेट, शटर बंद, एक्सटिंग्विशर फेल, इन्हीं ने छीन लीं 3 जिंदगियां

रोहतक के डी-पार्क स्थित 10 दुकानों में लगी आग ने तीन लोगों की जान ले ली, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ एक हादसा था या फिर कई चूकों का नतीजा। शुरुआती जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से पांच ऐसे कारण सामने आए हैं, जिन्होंने आग को विकराल रूप देने में अहम भूमिका निभाई। फायर ब्रिगेड के पहुंचने में देरी, फायर एक्सटिंग्विशर का काम न करना, शटर गिरने से लोगों का अंदर फंस जाना, बाइकों के पेट्रोल से आग का और भड़कना तथा शोरूम में मौजूद रबर और कपड़े के भारी स्टॉक ने हालात को लगातार बदतर बनाया। यही वजह रही कि कुछ मिनटों में शुरू हुई आग ने देखते ही देखते पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। सिलसिलेवार ढंग से आग बढ़ने के पांचों कारण जानिए…. 1. फायर ब्रिगेड के पहुंचने में देरी, आग को मिला फैलने का समय प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग लगने के कुछ ही मिनटों में लपटें पूरे शोरूम में फैलने लगी थीं। आरोप है कि शुरुआती समय में फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंच पाई। आग पर पहले आधे घंटे में काबू नहीं पाया जा सका, जिससे वह शोरूम से निकलकर आसपास की दुकानों तक पहुंच गई। जितनी देर राहत कार्य में लगी, आग उतनी ही विकराल होती चली गई। 2. फायर एक्सटिंग्विशर नहीं चले, शुरुआती बचाव का मौका गंवाया दुकान में मौजूद लोगों ने आग बुझाने के लिए फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन वे प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पाए। ये दो साल पहले ही एक्सपायर हो चुके थे। यदि शुरुआती मिनटों में आग पर नियंत्रण पा लिया जाता तो लपटों को फैलने से रोका जा सकता था। आग लगने के बाद का सबसे महत्वपूर्ण समय यही होता है, लेकिन वहीं सबसे बड़ी चूक सामने आई। 3. शटर गिरा, अंदर फंसे लोग नहीं निकल पाए हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि आग के बीच रोहतक शूज शोरूम का शटर नीचे आ गया। कर्मचारी अमन और कपिल बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ़ पाए। धुआं तेजी से भरता गया और बचाव का समय लगातार कम होता गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अगर बाहर निकलने का रास्ता खुला रहता तो जान बचने की संभावना कहीं अधिक हो सकती थी। 4. बाइकें जलने से पेट्रोल बना आग का ईंधन आग जब शोरूम से बाहर निकली तो आसपास खड़ी 11 बाइक-स्कूटी भी इसकी चपेट में आ गईं। बाइकों की टंकियों में मौजूद पेट्रोल ने आग को और भड़का दिया। एक के बाद एक वाहन जलने लगे और आग की तीव्रता बढ़ती चली गई। इससे न केवल तापमान बढ़ा, बल्कि आग बुझाने का काम भी बेहद मुश्किल हो गया। 5. रबर और कपड़े का भारी स्टॉक बना सबसे बड़ी चुनौती दुकानों में बड़ी मात्रा में रबर और कपड़े के जूते समेत अन्य सामान रखा हुआ था। ये सभी अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री मानी जाती हैं। आग लगने के बाद रबर और कपड़ा लगातार जलते रहे, जिससे धुआं भी अधिक बना और तापमान भी बढ़ता गया। यही वजह रही कि आग पर पूरी तरह काबू पाने और कूलिंग ऑपरेशन में कई घंटे लग गए। ————————– ये खबर भी पढ़ें :- बेटी का जन्मदिन, फैक्ट्री का सपना और 20 साल नौकरी:रोहतक में 7 घंटे बाद कंकाल बनकर निकले शोरूम मालिक-दो वर्कर; आग लगते शटर गिरा रोहतक की डी-पार्क मार्केट में मंगलवार को लगी आग ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। किसी ने तीन दिन पहले ही अपनी बेटी का जन्मदिन मनाया था, कोई अपने भाई के साथ शू फैक्ट्री शुरू करने का सपना देख रहा था, तो कोई पिछले 20 वर्षों से एक ही शोरूम में नौकरी कर परिवार का सहारा बना हुआ था। पढ़ें पूरी खबर…

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