पाई-पाई जोड़कर आशियाना बनाया, ताकि बच्चे खुशनुमा जीवन जी सकें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्दन बांध आया और हम बर्बाद हो गए। जिस उम्र में बच्चों को सबकुछ सौंपकर माला जपते हुए भजन करना था, उस 75 साल की उम्र में बेघर हो गए। बुढ़ापे में घर और गांव छोड़ना पड़ रहा है। अब कहां जाएंगे और कैसे रहेंगे? कुछ पता नहीं। मुनादी सुनकर रातों की नींद उड़ गई है। हर वक्त यही डर सताता है कि अब सिर छिपाने के लिए छत कहां मिलेगी? यह दर्द है उल्दन डैम प्रोजेक्ट के प्रभावित सलैया खुर्द गांव के देव सिंह राजपूत का। दरअसल, सागर जिले के बंडा ब्लॉक में उल्दन गांव के पास बन रहे उल्दन बांध का काम लगभग पूरा हो चुका है। नाला क्लोजर का काम अंतिम चरण में है। इसी बारिश से बांध में पानी भरना शुरू होगा। बांध की जद में आ रहे 17 गांवों में सलैया खुर्द गांव पूरी तरह से पानी में समा जाएगा। इस साल बांध में पानी भरने से 386 मकान व संरचनाएं प्रभावित होगीं। इसमें 312 स्थायी और 74 अस्थायी प्रकृति की हैं। डूब प्रभावितों को विस्थापित करने का काम शुरू हो गया है। पनारी और पिथौली गांव में प्रभावितों को जमीन उपलब्ध कराई गई है, जिसके उन्हें पट्टे भी दिए गए हैं। दैनिक भास्कर टीम सलैया गांव पहुंची। यहां रहने वालों से बात की। उनके दर्द को समझा। पढ़िए रिपोर्ट… तीन तस्वीरों में देखिए गांव और बांध… बच्चों को पढ़ाने बाहर गई तो कर दिया अपात्र सलैया खुर्द की रहने वाली सावित्री बाई कहती हैं- सरकार गांव छुड़ा रही है। मैं और मेरे तीन बेटे हैं। एक बेटे को पैसा दे दिया। वहीं दो बेटों को मुआवजा नहीं मिला। छोटे बेटे की शादी नहीं हुई है। हमें तो अपात्र घोषित कर दिया। एक मकान का मुआवजा दिया, लेकिन दूसरे मकान और करीब तीन एकड़ जमीन पर मुआवजा नहीं मिला है। अधिकारी कहते हैं- तुम यहां नहीं रहती हो। मैं तो बच्चों को पढ़ाने के लिए कर्रापुर में किराए से रहती थी। सबकुछ तो मेरा गांव में ही है। यह बात पूरा गांव जानता है। कलेक्टर, एसडीएम से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक पर शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब घर खाली कर गांव से बाहर जाने का फरमान जारी कर दिया गया है। समझ नहीं आ रहा कहां जाएं। अब न रहने को घर है और न ही खेती। छोटे बच्चे छोड़कर पति चला गया, मेहनत कर बनाया था घर मीरा बाई बताती हैं- छोटे-छोटे बच्चे छोड़कर पति छोड़कर चला गया। पूरे घर का भार मुझ पर आ गया। मेहनत, मजदूरी कर बच्चों को बड़ा किया। घर बनाया। दो बच्चे हैं। उनकी शादी करना थी, लेकिन अब प्रशासन गांव से भगा रहा है। पहाड़ पर रहने के लिए कह रहा। मेरे पति नहीं हैं। बच्चे बाहर जाएंगे तो मैं अकेली कैसे पहाड़ पर रहूंगी। प्रशासन मुझे उचित मुआवजा और जगह दे। मुआवजे के नाम पर 6.36 लाख रुपए दिए गजराज लोधी कहते हैं- 250 साल पुराना हमारा सलैया गांव डूब में आया तो यहां का हर व्यक्ति बर्बाद हो गया। गांव में करीब 40 घर हैं। इनमें 105 परिवार रहते हैं। मुआवजे के नाम पर 6.36 लाख रुपए का पैकेज दिया गया है। एक एकड़ जमीन का मुआवजा 2.80 लाख रुपए दिया गया। प्रशासन को भी यह पता है कि विस्थापित होकर जाएंगे, इतने मुआवजे में मकान भी नहीं बना पाऊंगा। मकान बना भी लिया तो पेट भरने के लिए जमीन कैसे खरीदूंगा। अब रहने और खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। कमलेश यादव बताते हैं- हम 6 भाई हैं। पिता के नाम पर जमीन और मकान था। हम लोग तो भगवान भरोसे जा रहे हैं। पढ़ाई कर रहा था, इसलिए अपात्र बना दिया गांव के युवा वृंदावन लोधी ने बताया कि वह 24 साल का है। घर में रहकर पढ़ाई कर रहा था। मुझे डूब प्रभावितों में शामिल नहीं किया गया। एसडीएम से बात की तो उन्होंने कहा कि तुम पढ़ाई कर रहे हो। इसलिए अपात्र किया है। मेरा बचपन इसी गांव में बीता। अब गांव छोड़ना पड़ रहा है। गांव के करीब 88 लोग ऐसे हैं, जिन्हें मुआवजा नहीं मिला, जिन्हें मुआवजा मिला, वह उससे न तो मकान बना पाएंगे, न जमीन खरीद पाएंगे। आंखों में हताशा लिए खुद उजाड़ रहे आशियाना प्रशासन की तरफ से बेदखली का अल्टीमेटम मिलने के बाद अब ग्रामीणों के पास कोई रास्ता नहीं बचा है। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में लोग गैंती-हथौड़ा लेकर अपने घरों को तोड़ रहे हैं। दरवाजे, खिड़कियां और छत का जो भी मटेरियल बच सकता है, उसे निकालकर ट्रैक्टरों में भरकर ले जा रहे हैं। इन सबके बीच गांव के मासूम बच्चे सहमे हुए एक-दूसरे का चेहरा देख रहे हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि जिस आंगन में वे कल तक खेलते थे, वह कुछ दिनों में पानी के भीतर समा जाएगा। विस्थापन के लिए प्रशासन ने पनारी और पिथौली में जमीन के पट्टे तो दे दिए, लेकिन बुनियादी सुविधाओं और नाकाफी मुआवजे के अभाव में ग्रामीणों का भविष्य अंधकार में लटका है। प्रोजेक्ट में ये गांव हो रहे प्रभावित प्रोजेक्ट मैनेजर अनिरुद्ध आनंद ने बताया- परियोजना में सलैया खुर्द, पुरा बिनेका, बमूरा बिनेका, मुडिया गुसाईं और आंशिक प्रभावित उल्दन, किरौला, कुल्ल, बहरोल, पिपरिया इल्लाई, हनौता उवारी, सेमरा अहीर, कोटिया, पिथौली, पहरगुवां गांव डूब में आ रहे हैं। इसी साल से बांध में पानी भरा जाएगा। पहले साल जल भराव में ही 457 मीटर पर बहरोल, उल्दन, पिपरिया इल्लाई, सलैया खुर्द, हनौता उबारी, किरोला, कुल्ल तहसील बंडा और मुडिया गुसाईं तहसील मालथौन के करीब 386 मकान डूब क्षेत्र में आएंगे, जिनका विस्थापन कराया जा रहा है। बांध से सागर और छतरपुर जिले में 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य है, जिसमें बंडा तहसील में 35253 हेक्टेयर सिंचित भूमि, मालथौन तहसील में 16266 हेक्टेयर, बक्सवाहा (छतरपुर) में 13379 हेक्टेयर और शाहगढ़ तहसील में 10675 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। बहरोल-बंडा, गढ़पहरा-धामोनी मार्ग जलमग्न होगा बांध में जल भराव और अधिक बारिश होने से कैचमेंट एरिया में पानी जमा होगा। जल भराव होने से बंडा-बांदरी मार्ग, गढ़पहरा-धामोनी मार्ग, बहरोल-उल्दन-बंडा मार्ग समेत अन्य लोकल मार्ग बंद होंगे। इसके लिए प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों का निर्माण शुरू कराया है। बहरोल और उल्दन के रास्तों पर सड़क निर्माण का काम चल रहा है। किसी को कहीं कमी लग रही हो तो कोर्ट जा सकते हैं… कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि उल्दन बांध प्रोजेक्ट के प्रभावितों को नियमानुसार मुआवजा दिया गया है। अवॉर्ड पारित हो चुके हैं, लेकिन कुछ हितग्राही जरूर मुआवजे को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। हमारी टीम लगातार प्रभावितों के संपर्क में रही और उनसे बात भी की।
