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इंदौर के स्ट्रेचर वाले बच्चे को दुर्लभ बीमारी:शरीर इतना कमजोर की चल तक नहीं सकता; 11 साल की उम्र में भी दूध के दांत, पसीना भी नहीं आता

इंदौर के एमवाय अस्पताल और सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के बीच भीषण गर्मी में स्ट्रेचर पर एक बीमार बच्चे को ले जाते उसके माता-पिता का वीडियो वायरल होने के बाद इसके पीछे का एक दर्दभरा सच सामने आया है। स्ट्रेचर पर ले जाया जा रहा बच्चा कोई सामान्य मरीज नहीं, बल्कि एक दुर्लभ बीमारी और गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रहा 11 वर्षीय आदर्श मलक है, जिसका इलाज पिछले कई दिनों से एमवाय अस्पताल में चल रहा है। जबरन कॉलोनी निवासी आदर्श के पिता गोलू मलक और मां ज्योति ने बताया कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से चलने-फिरने में असमर्थ हो गया था। पहले उसे चेस्ट वार्ड में एडमिट कराया गया, जिसके बाद 20 मई से उसका उपचार एमवाय अस्पताल में चल रहा है। एम्बुलेंस नहीं मिली तो खुद धकेला स्ट्रेचर माता-पिता ने बताया कि शनिवार को डॉक्टरों ने बच्चे की रीढ़ संबंधी बेल्ट के लिए सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल भेजने को कहा था। अस्पताल स्टाफ और एम्बुलेंस के आने में देरी हो रही थी, इसलिए मजबूरी में वे स्वयं ही बच्चे को स्ट्रेचर पर लेकर निकल पड़े। भीषण गर्मी के बीच वे करीब एक किलोमीटर दूर स्थित सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल पहुंचे। वहां कुछ औपचारिकताओं और दस्तावेजी प्रक्रिया के बाद उन्हें फिर एमवाय अस्पताल लौटने के लिए कहा गया। इसके बाद दंपती ने बच्चे को दोबारा स्ट्रेचर पर धकेलते हुए उसी तपती धूप में एमवाय अस्पताल पहुंचाया। हर मौसम में गीले कपड़े से देनी पडती है ठंडक वीडियो में दिखाई दे रहा दृश्य अब और भी संवेदनशील हो गया है। माता-पिता ने बताया कि आदर्श को सामान्य बच्चों की तुलना में अत्यधिक गर्मी लगती है। उसके शरीर में पसीना बहुत कम आता है, जिससे गर्मी सहन करने की क्षमता बेहद कम हो जाती है। यही कारण था कि रास्ते भर उसकी मां बार-बार अपना दुपट्टा पानी में भिगोकर बच्चे के शरीर पर रखती रही, ताकि उसे कुछ राहत मिल सके। हाइपोहाइड्रोटिक एक्टोडर्मल डिस्प्लेसिया नाम की बीमारी परिजनों और उपलब्ध मेडिकल दस्तावेजों के अनुसार आदर्श हाइपोहाइड्रोटिक एक्टोडर्मल डिस्प्लेसिया (Hypohidrotic Ectodermal Dysplasia) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में शरीर की पसीना बनाने वाली ग्रंथियां सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाती। इसके कारण मरीज को बहुत कम या बिल्कुल पसीना नहीं आता। साथ ही बाल, दांत और त्वचा के विकास पर भी असर पड़ता है। आदर्श की उम्र 11 वर्ष है, लेकिन उसका शारीरिक विकास सामान्य बच्चों की तुलना में काफी कम है। उसका वजन नहीं बढ़ रहा और दूध के दांत भी पूरी तरह नहीं गिरे हैं। मेडिकल रिकॉर्ड में बीमारी का भी जिक्र बच्चे के मेडिकल रिकॉर्ड में डिमायलिनेटिंग डिजीज (Demyelinating Disease) का भी उल्लेख है। यह ऐसी स्थिति होती है जिसमें नसों के ऊपर मौजूद सुरक्षात्मक परत (मायलिन) प्रभावित हो जाती है, जिससे मस्तिष्क और शरीर के बीच संदेशों का संचार बाधित होने लगता है। 20 मई की मेडिकल जांच रिपोर्ट में गुलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। यह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं नसों पर हमला करने लगती है और मरीज के हाथ-पैरों में कमजोरी या लकवे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उधर, डॉ. अशोक यादव (सुपरिटेंडेंट, एमवायएच) ने बताया कि पहले उसे चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में एडमिट किया था और अभी एमवायएच में एडमिट है। उसे स्पाइन संबंधी बीमारी है और उसका इलाज चल रहा है। वह कुपोषित नहीं है। उन्होंने कहा कि उसके माता-पिता को बच्चे को भीषण धूप में सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। अगर किसी की लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी। यह खबर भी पढ़ें… धूप में बेटा तड़पता रहा, स्ट्रेचर धकेलते रहे माता-पिता इंदौर में एमवॉय हॉस्पिटल और सुपर स्पेशियलियटी हॉस्पिटल के बीच शनिवार दोपहर ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरे अस्पताल सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। भीषण गर्मी में एक बीमार बच्चे को उसके माता-पिता खुद स्ट्रेचर पर धकेलते हुए करीब 1 किलोमीटर तक ले जाते दिखे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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