मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV) के फल अनुसंधान केंद्र में एक साथ करीब 450 पेड़ काट दिए गए। इनमें कुछ नए पेड़ भी थे, जिन्हें काटने की जरूरत नहीं थी। विश्वविद्यालय का इमलाई गांव में 55 एकड़ में फल अनुसंधान केंद्र है। कटाई के लिए बाकायदा टेंडर जारी किया गया था। टेंडर समीर नाम की फर्म को मिला था। फर्म ने मजदूर लगाकर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई कर दी। यही नहीं ठेकेदार कीमती लकड़ियां भी ले गया। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि बारिश से पहले वृक्षों की छंटाई की गई थी, न कि फलदार वृक्ष काटे गए हैं। मामला सुर्खियों में आया तो विश्वविद्यालय प्रबंधन ने आनन-फानन में जांच समिति गठित कर दी। दावा किया गया है कि जांच रिपोर्ट आने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। इधर दैनिक भास्कर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। रिसर्च सेंटर में बड़ी संख्या में बेर, जामुन, आम और आंवला के अलावा यूकेलिप्टस के पेड़ भी कटे हुए मिले हैं। तस्वीरों में देखें कटे हुए पेड़.. 52 साल पहले स्थापित हुआ था सेंटर फल अनुसंधान केंद्र की स्थापना 52 साल पहले वर्ष 1974-75 में की गई थी। 55 एकड़ क्षेत्र में फैले इस केंद्र में हजारों फलदार और फूलदार वृक्ष लगाए गए हैं। इनमें आम, बेर, यूकेलिप्टस, आंवला सहित कई अन्य प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। यह परिसर कई किलोमीटर के दायरे में ऑक्सीजन बैंक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शहर के आसपास इतने बड़े क्षेत्र में विकसित बाग नहीं होने के कारण इसका पर्यावरणीय महत्व भी काफी अधिक है। इसी वजह से इसकी देखभाल और संरक्षण के लिए जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति की है। यहां विशेषज्ञों की टीम नियमित रूप से पेड़-पौधों पर अनुसंधान और अध्ययन कार्य करती है। इंजार्च बोले- डेढ़ लाख में दिया था टेंडर फल अनुसंधान केंद्र के इंचार्ज डॉ. उमेश चंदेरिया ने दैनिक भास्कर को बताया कि सेंटर में बहुत से ऐसे पेड़ थे, जिसमें सालों से फल नहीं आ रहे थे। सेंटर चारों तरफ से घना हो गया था, जिसके चलते कोई भी चोरी-छिपे अंदर घुसता तो पता नहीं चल पाता था। गांव वाले भी लगातार लकड़ियों चोरी कर रहे थे। जिस वजह से फरवरी में पेड़ की कटाई के लिए टेंडर निकाला गया। टेंडर जबलपुर की ही समीर फर्म को दिया था। डॉ. उमेश चंदेरिया ने बताया- ठेकेदार ने साढ़े चार सौ पेड़ काटने के लिए डेढ़ लाख रुपए देने और सारी लकड़ी ले जाने की बात कही थी। इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भी दी गई थी। 4 फरवरी से 24 फरवरी के बीच ठेकेदार ने मजदूरों से पेड़ कटवाना शुरू किया। इस दौरान साढ़े चार सौ पेड़ काट दिए गए और लकड़ी ठेकेदार ले गया। दो माह मई माह में पता चला कि ठेकेदार ने कुछ ऐसे पेड़ भी काट दिए हैं, जिसकी अनुमति भी नहीं थी। डॉ.उमेश चंदेरिया का कहना है कि जिन पेड़ों को काटा गया, उनमें फल नहीं आ रहे थे और जगह भी घेरे हुए थे। आम, आवंला, जामुन और बेर के पेड़ों को पूरी तरह से नहीं, बल्कि उन्हें छांटा गया था। पेड़ काटने से किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। पेड़ वे ही काटे गए हैं, जिनमें फल नहीं आ रहे थे। रजिस्ट्रार बोले- हमें जांच रिपोर्ट का इंतजार जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एके जैन का कहना है कि बारिश के पहले वृक्ष अच्छे से बड़े हो जाएं, इसके लिए कटाई, छंटाई कराई जाती है, जिसकी अनुमति भी दी गई थी। अभी पता चला कि सेंटर में स्थित कुछ पेड़ों को जड़ से काट दिया गया, जिसमें फल लगे हुए थे। यह खबर भी पढ़ें… भोपाल के 10 लेन अयोध्या बायपास पर कटे पेड़ भोपाल के 10 लेन अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट को नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (NGT) ने हरी झंडी दे दी है। आदेश मिलते ही हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के जरिए ठेकेदार ने पेड़ काटने शुरू किए। शुक्रवार को कई मशीनों से पेड़ों की कटाई की गई। पूरी खबर यहां पढ़ें…
