भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अभनपुर के जमीन कारोबारी जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया है। ईडी ने आरोपी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत 3 जून को गिरफ्तार किया। मामले में करोड़ों रुपए के मुआवजा घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी है। वहीं, कारोबारी पर आरोप है कि उसने 56 लाख की जमीन पर 9.83 करोड़ का मुआवजा लिया और घोटाले से मिले पैसे को छिपाने के लिए उसे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया। इसे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। ACB/EOW की दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच ईडी की जांच छत्तीसगढ़ ACB/EOW की दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह मामला भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा है। अफसरों के साथ मिलकर रची साजिश जांच एजेंसी के मुताबिक जय प्रकाश गांधी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ अफसरों के साथ मिलकर साजिश रची। आरोप है कि हाईवे अलाइनमेंट में आने वाली भूमि को खरीदने के बाद उसे 500 वर्गमीटर से कम के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटा गया। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि एनएचएआई से अधिक दर पर मुआवजा मिल सके। 9 करोड़ 83 लाख हासिल किया ईडी के मुताबिक इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए आरोपी और उसके परिवार ने करीब 9 करोड़ 83 लाख रुपए का मुआवजा हासिल किया। जबकि नियमों के अनुसार उन्हें केवल 56 लाख 76 हजार रुपए ही मिलने थे। जांच में सामने आया है कि इस तरह लगभग 9 करोड़ 27 लाख रुपए की अवैध आय अर्जित की गई। शेयर बाजार-म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट किए पैसे जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले से मिले पैसे को छिपाने के लिए उसे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया। इसे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पहले 28 अप्रैल 2026 को ईडी ने रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य सबूत जब्त किए गए थे। गिरफ्तार आरोपी को विशेष पीएमएलए न्यायालय रायपुर में पेश किया गया, जहां से ईडी को तीन दिन की रिमांड मिली है। एजेंसी अब इस मामले में अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जानिए कैसे हुआ घोटाला ? भारत-माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया। इस केस में दैनिक भास्कर डिजिटल में खबर छपने के बाद कोरबा डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड किया गया था। इसके पहले जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था। शशिकांत और निर्भय पर जांच रिपोर्ट तैयार होने के 6 महीने बाद कार्रवाई हुई थी। निर्भय कुमार साहू सहित 5 अधिकारी-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा राशि की गड़बड़ी का आरोप है। जमीन को टुकड़ों में बांटा, 80 नए नाम चढ़ाए राजस्व विभाग के मुताबिक, मुआवजा करीब 29.5 करोड़ का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफिया ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे में बांट दिया। मुआवजा के लिए 80 नए नाम रिकॉर्ड में चढ़ा दिए गए। इससे 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 70 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ मुआवजा राशि निर्धारित की गई। जिसमें से 246 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं 78 करोड़ रुपए का भुगतान अभी रोक दिया गया। क्या है भारत माला परियोजना ? भारत माला परियोजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है, जिसके तहत करीब 26 हजार किलोमीटर आर्थिक कॉरिडोर विकसित किए जाने हैं। यह कॉरिडोर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, नॉर्थ-साउथ और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जुड़ेंगे। देश के अधिकांश फ्रेट ट्रैफिक को इन्हीं मार्गों से ले जाने की योजना है। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर इसी परियोजना का अहम हिस्सा है। ..………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 66.9 लाख कैश और 37 किलो चांदी जब्त:भारतमाला मुआवजा केस में ED की रेड, रायपुर-धमतरी में 8 ठिकानों पर कार्रवाई, अफसरों से बदसलूकी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने मंगलवार सुबह रायपुर, अभनपुर, धमतरी और कुरुद स्थित 8 अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। जांच एजेंसी को शिकायत मिली थी कि भारतमाला हाईवे प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। पढ़ें पूरी खबर…
