बढ़ती बेरोजगारी युवाओं को ऐसे रास्तों की तरफ धकेल रही है, जिनकी शायद कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। जबलपुर में ट्रेनों में किन्नरों के भेष में घूमकर यात्रियों से पैसे मांगने वाले कई लोगों की असलियत सामने आई है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की कार्रवाई में खुलासा हुआ है कि बीते छह माह में पकड़े गए 100 से ज्यादा किन्नरों में से करीब 60 प्रतिशत असल में युवक थे, जो बेरोजगारी और आसान कमाई के लिए नकली किन्नर बनकर ट्रेनों में घूम रहे थे। आरोपियों का कहना है कि नौकरी नहीं मिलने और आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने यह रास्ता अपनाया। ट्रेनों में यात्रियों के बीच घूमकर ये रोजाना 1500 से 2 हजार रुपए तक कमा लेते हैं और उन्हें पता है कि रेलवे एक्ट में आसानी से जमानत मिल जाती है। तीन युवकों को पकड़ा तब आई सच्चाई सामने यात्रियों की शिकायत पर जबलपुर आरपीएफ ने 3 जून को ट्रेनों में छापामार कार्रवाई करते हुए तीन किन्नरों को पकड़ा। पूछताछ में सामने आया कि वे असली किन्नर नहीं, बल्कि युवक हैं, जो महिलाओं जैसी वेशभूषा और मेकअप कर ट्रेनों में यात्रियों से पैसे मांगते थे। ये लोग यात्रियों से 10 से लेकर 100 रुपए तक वसूलते थे। बेरोजगारी के कारण यह रास्ता अपनाया: आशीष आरपीएफ की गिरफ्त में आए कानपुर निवासी आशीष उर्फ आशी ने बताया कि वह किन्नर नहीं बल्कि युवक है। उसने कहा कि देश में बढ़ती बेरोजगारी और काम नहीं मिलने के कारण उसे यह रास्ता अपनाना पड़ा। युवक का कहना है कि नौकरी के लिए कई शहरों में भटका, लेकिन कहीं काम नहीं मिला। सोशल मीडिया पर देखा कि ट्रेनों में घूमने वाले किन्नर आसानी से अच्छी कमाई कर लेते हैं। लोगों के डर और झिझक का फायदा उठाकर उसने भी यही तरीका अपनाया। शुरुआत में अजीब लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह काम आदत बन गया और अब वह महीने में 50 से 60 हजार रुपए तक कमा लेता है। सोशल मीडिया पर ट्रेनों में घूमने वाले किन्नरों को देखकर उसके मन में यह रास्ता अपनाने का विचार आया। डिजिटल तरीके से भी पैसे वसूलना शुरू जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रेनों में सक्रिय यह गैंग अब डिजिटल तरीके से भी पैसे वसूल रहा है। यदि यात्रियों के पास नकद नहीं होता तो वे मोबाइल पर क्यूआर कोड दिखाकर ऑनलाइन पेमेंट ले लेते हैं। यात्रियों के सामने ताली बजाते हुए पैसे मांगना और दबाव बनाना इनका आम तरीका बन चुका है। कुछ युवक तो अब जेंडर चेंज ऑपरेशन कराने तक की बात कह रहे हैं, क्योंकि उन्हें इस काम में कम समय में ज्यादा कमाई नजर आ रही है। स्टेशन पहुंचने से पहले मेकअप करते हैं आशी अपने साथियों माही उर्फ महेश और तरन्नुम उर्फ पिंचू के साथ जबलपुर के गायत्री नगर में किराए का मकान लेकर रहता है। ये लोग घर से सामान्य युवक बनकर निकलते हैं, लेकिन रेलवे स्टेशन पहुंचने से पहले कपड़े बदलकर, मेकअप कर और महिलाओं जैसी वेशभूषा पहनकर पूरी तरह किन्नरों जैसा रूप धारण कर लेते हैं। इनके हावभाव और बोलचाल को देखकर पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है कि वे युवक हैं या असली किन्नर। किराए का मकान लेकर गैंग बनाई आरपीएफ पोस्ट प्रभारी राजीव खरब ने बताया कि बीते छह महीनों में 120 से अधिक ऐसे लोगों को पकड़ा गया है, जो ट्रेनों में यात्रियों से जबरन पैसे मांगते थे। इनमें से करीब 60 प्रतिशत नकली किन्नर निकले। अधिकतर युवक उत्तरप्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं, लेकिन जबलपुर, कटनी और नरसिंहपुर जैसे इलाकों में किराए के मकान लेकर गैंग बनाकर रहते हैं। उन्होंने बताया कि ये लोग इतने शातिर तरीके से तैयार होते हैं कि देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल होता है कि वे पुरुष हैं। साड़ी, सूट, मेकअप, मांग में सिंदूर और महिलाओं जैसी आवाज के कारण वे हूबहू किन्नर जैसे दिखाई देते हैं। पूछताछ में अधिकतर आरोपियों ने माना कि आसान कमाई की वजह से उन्होंने यह रास्ता चुना। असली किन्नर समुदाय ने जताई चिंता उधर, असली किन्नर समुदाय ने भी इस पर चिंता जताई है। जबलपुर निवासी माही किन्नर का कहना है कि नकली किन्नरों की वजह से पूरे समुदाय की छवि खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि अब मोहल्लों से लेकर ट्रेनों तक नकली किन्नरों का नेटवर्क फैल गया है, जो लोगों से जबरन वसूली कर रहा है। उन्होंने पुलिस-प्रशासन से ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ये खबर भी पढ़ें… ट्रेनों में जबरन वसूली पर RPF का एक्शन रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने भोपाल मंडल में ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों से जबरन पैसे मांगने तथा यात्रा में बाधा डालने वालों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। इस विशेष कार्रवाई के दौरान पूरे मंडल में कुल 346 किन्नरों को पकड़ा गया, जिनके खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।पूरी खबर पढ़ें
