उज्जैन में श्रीमहाकाल महालोक के बाद अब भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में 5 हेक्टेयर क्षेत्र में सांदीपनि लोक बनने जा रहा है। मोहन सरकार इसके लिए 139 करोड़ रुपए खर्च कर इसे सिंहस्थ कुम्भ से पहले तैयार करने की योजना बना चुकी है। यह वही स्थान है जहां पर भगवान श्रीकृष्ण ने बलराम और सुदामा के साथ 16 विद्या और 64 कलाओं का ज्ञान अर्जित किया था। ‘श्रीकृष्ण पाथेय योजना’ के तहत मिलेगा स्वरूप सरकार की महत्वाकांक्षी ‘श्रीकृष्ण पाथेय योजना’ के रूप में श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया जाएगा। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा महर्षि सांदीपनि आश्रम के कायाकल्प के लिए तैयार की गई यह एक बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना है। यह न केवल उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजेगी, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से युवा पीढ़ी को हमारी गौरवशाली गुरुकुल परंपरा से भी जोड़ेगी। महाकाल लोक के बाद अब सांदीपनि आश्रम में भी कॉरिडोर बनेगा। दैनिक भास्कर एप पर सबसे पहले देखिए पहली बार सांदीपनि आश्रम कायाकल्प के बाद कैसा दिखाई देगा। AR/VR से डिजिटल कंटेंट सुन-देख सकेंगे श्रद्धालुओं को सांदीपनि आश्रम में आने के बाद भगवान श्रीकृष्ण की गाथा जानने के लिए डिजिटल अनुभव भी देखने को मिलेगा। यहां श्रद्धालुओं के लिए एआर/वीआर (AR/VR) तकनीक, डिजिटल व ऑडियो-विजुअल प्रदर्शनी और मल्टी-लैंग्वेज डिजिटल कंटेंट उपलब्ध होगा। श्रद्धालु हेडफोन लगाकर या वीआर के द्वारा भगवान की शिक्षा स्थली का इतिहास उनकी महिमा और 64 कलाओं के ज्ञान के बारे में सुन और देख सकेंगे। प्रदेश की सबसे विराट 108 फीट की प्रतिमा आश्रम में भगवान श्री कृष्ण की 108 फीट की लगने वाली विराट प्रतिमा सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र होगी। इसका डिजाइन आईआईटी/एनआईआईटी के तकनीकी परीक्षण और विंड टनल स्टडी के बाद तैयार होगा। लाइट एंड साउंड शो में 64 कलाओं का वर्णन आश्रम में लाइट एंड साउंड भी लोगों को देखने को मिलेगा। इसमें परिसर में इमर्सिव लाइट एंड साउंड शो और थीम गोमती कुंड के पास देखने को मिलेगी। इस लाइट एन्ड साउंड में भी श्री कृष्ण की लीला और उज्जैन से उनके जुड़े महत्व को बताया जाएगा। आश्रम में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डवलप किया जाएगा। भाई के साथ उज्जैन पैदल पहुंचे थे भगवान श्रीकृष्ण द्वापर युग में उज्जैन को अवंतिका नगरी के नाम से जाना जाता था। यहां की राजमाता, देवीराजा जयसिंह की पत्नी हुआ करती थीं। वे वासुदेव की मुंहबोली बहन थीं और भगवान श्रीकृष्ण की बुआ थीं। स्कंद पुराण के अनुसार, 5266 साल पहले कंस का वध करने के बाद दोनों भाई श्रीकृष्ण और बलराम पैदल ही मथुरा से उज्जैन आए थे। मथुरा से उज्जैन शहर की दूरी 650 किलोमीटर है। तब उनकी उम्र 11 साल 7 दिन थी। महाकाल लोक बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में रिकार्ड बढ़ोतरी श्री महाकालेश्वर मंदिर में 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री द्वारा महाकाल लोक का लोकार्पण किए जाने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है। महाकाल लोक बनने के बाद बीते चार वर्षों में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या करीब चार गुना तक बढ़ गई है। महाकाल लोक अब सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुका है। महाकाल लोक बनने से पहले सामान्य दिनों में मंदिर में प्रतिदिन करीब 15 से 20 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे। शनिवार, रविवार, सोमवार और विशेष पर्वों पर ही भीड़ बढ़ती थी। महाकाल लोक बनने के बाद पहले ही वर्ष में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर प्रतिदिन 50 से 60 हजार तक पहुंच गई। वर्तमान स्थिति यह है कि अब रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं। खास अवसरों और पर्वों पर यह संख्या इससे भी अधिक हो जाती है। महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन, होटल व्यवसाय, स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। ये खबर भी पढ़ें… उज्जैन में महाकाल लोक के बाद अब शनि लोक 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में करीब दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में सिंहस्थ 2028 के लिए मध्य प्रदेश सरकार, उज्जैन को एक नए धार्मिक पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित करने में जुट गई है। इसी क्रम में अब सरकार यहां ‘शनि लोक’ बनाने जा रही है।पूरी खबर पढ़ें
