मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। नए विवाद में फंस गए जीतू पटवारी
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एक नए विवाद में घिर गए हैं। वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जहां कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत राधा-कृष्ण की फोटो और ‘जय श्री राधे’ लिखे दुपट्टों से किया। जीतू पटवारी ने स्वागत में मिले इन दुपट्टों को उतारकर साइड में फेंक दिया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। यादव समाज ने इसे भगवान श्रीकृष्ण और सनातन परंपरा के प्रति अनादर बताते हुए आपत्ति जताई है। दिलचस्प बात यह है कि यह वीडियो खुद मध्य प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा किया गया है। मध्य प्रदेश यादव महासभा के प्रदेश महामंत्री कप्तान सिंह यादव ने इसे अमर्यादित आचरण बताते हुए इसकी निंदा की और कहा कि यह कांग्रेस की सोच को दर्शाता है। उधर, जीतू पटवारी पहले से ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिए ‘दो कौड़ी का’ और ‘रद्दी अध्यक्ष’ वाले बयान को लेकर राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। ऐसे में यह नया विवाद उनके लिए अलग मुश्किल खड़ी करता नजर आ रहा है। टी राजा बोले- बाकी मुख्यमंत्री नपुंसक थे
धार की भोजशाला पहुंचे तेलंगाना के विधायक टी राजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जमकर तारीफ की, लेकिन इसी दौरान दिया गया उनका एक बयान चर्चा का विषय बन गया। भोजशाला परिसर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए टी राजा ने कहा कि इस स्थल पर केवल दो ही मुख्यमंत्री आए हैं- पहले नरेंद्र मोदी और उसके बाद मोहन यादव। बाकी मुख्यमंत्री तो नपुंसक थे। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्टाइल में कार्रवाई करने की सलाह भी दी। भोजशाला विवाद का जिक्र करते हुए टी राजा ने कहा कि कानूनी लड़ाई अपनी जगह चलती रहे, लेकिन बाहर जो ‘कलंक’ है, उसे हटाने के लिए बुलडोजर चलाना चाहिए। अब उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। लोगों का कहना है कि भोजशाला विवाद के दौरान कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों के कई मुख्यमंत्री रहे हैं। ऐसे में टी राजा का निशाना आखिर किस ओर था, यह सवाल उठ रहा है। वहीं, उनके आलोचक इसे सुर्खियों में बने रहने की रणनीति भी बता रहे हैं। पंडित जी के रोल में आ गए शिवराज
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक अलग अंदाज रायसेन में देखने को मिला। देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के शुभारंभ कार्यक्रम में जब पूजा-अर्चना की तैयारी चल रही थी, तब वहां कोई पंडित मौजूद नहीं था। ऐसे में शिवराज सिंह चौहान ने खुद मंत्रोच्चार शुरू कर दिया और विधि-विधान से खेत, मिट्टी और धरती माता की पूजा संपन्न कराई। इससे पहले कार्यक्रम में पहुंचते ही शिवराज सिंह सीधे बच्चों के बीच जा पहुंचे। बच्चों ने ‘शिवराज मामा जिंदाबाद’ के नारे लगाए, जिसके बाद उन्होंने बच्चों से बातचीत की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। जिस पर लोग कह रहे हैं कि मामा का अंदाज हमेशा कुछ अलग होता है और वे जहां जाते हैं, वहां कोई न कोई ऐसी तस्वीर या दृश्य छोड़ जाते हैं जो चर्चा का विषय बन जाता है। कई दिनों से ‘बेरोजगार’ एक आईएएस
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को लेकर चर्चा गर्म है। सचिव स्तर के इस अधिकारी के पास फिलहाल कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं है। मतलब, उनके पास कोई काम नहीं है। वे लंबे समय से ‘बेरोजगार’ बैठे हैं। साहब महाकौशल क्षेत्र में कांग्रेस के एक बड़े नेता के जिले में कलेक्टर रह चुके हैं। अब मंत्रालय के गलियारों में इसी बात को लेकर चर्चाएं हो रही हैं कि यह व्यवस्था उनके लिए ‘सजा’ है या फिर ‘बिना काम के आराम’ का मौका। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि उन्हें अगली जिम्मेदारी कब, क्या और कहां मिलती है। इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), देव शाक्य (रायसेन), अमन चौहान (धार), राजेश शर्मा (भोपाल) ये भी पढ़ें –
शिवराज मामा ने मामी के लिए खरीदी 24 चूड़ियां: कांग्रेस अध्यक्ष की तुलना बंदर से कर सीएम बोले- हम भाजपा के शेर आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी- ‘सौ सुनार की, एक लुहार की।’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुछ इसी अंदाज में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को जवाब दे दिया। उन्होंने पटवारी को ‘दो कौड़ी का’ और ‘रद्दी अध्यक्ष’ तक कह दिया। साथ ही एक नया नाम भी दे डाला। पूरी खबर पढ़ें
