नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध अर्पण और 210 साड़ियों के विसर्जन पर नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (NGT) ने रिपोर्ट मांगी है। यह वैज्ञानिक रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) से तलब की गई है। अर्पण और विसर्जन का कार्यक्रम अप्रैल में सीहोर जिले के सतदेव और भेरूंदा में एक कार्यक्रम के दौरान हुआ था। इस मामले में एनजीटी भोपाल की सेंट्रल जोन बेंच में याचिका दायर की गई थी। मामले की सुनवाई जस्टिज श्योकुमार सिंह और सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। याचिका में कहा गया कि सीहोर जिले की नसरुल्लागंज तहसील अंतर्गत ग्राम सतदेव एवं भेरूदा क्षेत्र में अप्रैल में धार्मिक कार्यक्रम हुआ था। इस दौरान नर्मदा नदी में लगभग 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियों का विसर्जन किया गया था। आवेदक ने इसे पर्यावरण एवं नदी पारिस्थितिकी के लिए हानिकारक बताते हुए जल प्रदूषण, जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव और सिंचाई एवं पेयजल स्रोतों के दूषित होने की आशंका व्यक्त की। जल प्रदूषण का डेटा प्रस्तुत नहीं किया एनजीटी ने सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा कि दूध विसर्जन से जल प्रदूषण के संबंध में कोई वैज्ञानिक डेटा अभी तक प्रस्तुत नहीं किया गया है। हालांकि, न्यायाधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 24 के अंतर्गत किसी भी प्रदूषक पदार्थ को जलधाराओं में प्रवाहित करना प्रतिबंधित है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि दूध जैसे कार्बनिक पदार्थ जल में जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD) बढ़ाकर जलीय जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि नर्मदा नदी में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान दूध प्रवाहित करने की प्रथा सार्वजनिक एवं पर्यावरणीय बहस का विषय है और इस पर CPCB एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गंभीर विचार आवश्यक है। अधिकरण ने CPCB एवं MPPCB को निर्देश दिया है कि वे विशेषज्ञों से वैज्ञानिक अध्ययन कराकर यह रिपोर्ट प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में पूछा कि क्या इस प्रकार की गतिविधियां किसी वर्तमान दिशा-निर्देश के अंतर्गत विनियमित हैं? यदि नहीं, तो क्या इनके लिए दिशा-निर्देश बनाए जाने की आवश्यकता है? क्या धार्मिक अवसरों पर नदी में दूध प्रवाहित करने से जल प्रदूषण होता है? अगली सुनवाई जुलाई में
मामले में अगली सुनवाई 17 जुलाई को निर्धारित होगी। इस दौरान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। ये खबरें भी पढ़िए… नर्मदा में 11 हजार लीटर दूध अर्पण से खतरा सीहोर जिले के सातदेव में नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध प्रवाहित करने का मामला अब नए खतरे की ओर इशारा कर रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञ सुभाष सी पांडे के अनुसार, इसका असर केवल तत्काल प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका “सेकेंड फेज” और ज्यादा खतरनाक है, जिसमें जलीय जीवों की मौत और सड़न से महीनों तक नदी का पानी प्रदूषित रहेगा और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। पढ़े पूरी खबर सीहोर के सातदेव में महायज्ञ संपन्न, बहाया 11 हजार लीटर दूध ग्राम सातदेव में पिछले कई दिनों से महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा था। इस यज्ञ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महायज्ञ की समाप्ति के पश्चात 11,000 लीटर दूध टैंकरों के माध्यम से नर्मदा नदी के तट तक लाया गया। पढ़ें पूरी खबर…
