गुना जिले के राघौगढ़ इलाके स्थित भैंसाना गांव में सोमवार से 11 दिवसीय श्रीराम महायज्ञ की शुरुआत हो गई है। पहले दिन सुबह तूमन खेड़ी से भैंसाना तक निकाली गई कलश यात्रा में 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए। वहीं, सोमवार देर शाम अभिनेता आशुतोष राणा, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और विधायक जयवर्धन सिंह ने यज्ञशाला पहुंचकर आहुतियां दीं और भगवान राम की आरती की। महायज्ञ के पहले दिन सुबह तूमन खेड़ी स्थित पार्वती नदी के घाट से कलश यात्रा शुरू हुई। यहां सभी श्रद्धालुओं ने कलश में जल भरा और भैंसाना गांव तक पदयात्रा की। इस दौरान नागरिक अपने सिर पर भागवत जी और महिलाएं कलश धारण कर चल रही थीं। यज्ञशाला पहुंचने के बाद सभी ने आयोजन स्थल की परिक्रमा की। आशुतोष राणा और दिग्विजय सिंह ने दी आहुतियां
सोमवार देर शाम अभिनेता आशुतोष राणा, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने सबसे पहले आयोजन स्थल का जायजा लिया और भागवत जी का पूजन किया। इसके बाद तीनों ने यज्ञशाला पहुंचकर यज्ञ में आहुतियां दीं और भगवान राम की आरती में हिस्सा लिया। ‘हम दशरथ की ओर यात्रा करें या रावण की ओर, यह हम पर निर्भर’
आयोजन को संबोधित करते हुए अभिनेता आशुतोष राणा ने भगवान राम के चरित्र पर बात की। उन्होंने कहा, “हमारे पास दशरथ भी है और दशमुख भी है। अब ये हमारे ऊपर है कि हम दशरथ की ओर यात्रा करें या फिर दशानन अर्थात रावण की ओर यात्रा करें। पांच ज्ञानेंद्रियों और पांच कर्मेंद्रियों से बना ये हमारा शरीर दशरथ कहलाता है।” राणा ने आगे कहा, “मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ऊपर निराकार से नीचे साकार की बिरादरी में आए ही इसीलिए थे, ताकि वो हमें नीचे से ऊपर उठा सकें। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम उनके चित्र, चरित्र और चिंतन के माध्यम से अपने व्यक्तित्व को ऊपर उठाने का प्रयास करते हैं या नहीं।” ‘महादेव ने अपने पास केवल राम नाम रखा’
भगवान शिव की स्तुति करते हुए उन्होंने कहा, “महादेव इतने विलक्षण हैं कि जिसने बनाया वो उसी के हो जाते हैं और जहां बनाया वो वहीं के हो जाते हैं। जब राम ने बनाया तो रामेश्वर हो गए और हमारे प्रिय भाई जयवर्धन ने उनका निर्माण किया तो वे जयवर्द्धनेश्वर महादेव हो गए। महादेव ऐसे हैं जो स्वयं अपने लिए कुछ नहीं रखते, लेकिन जिसने उन्हें अपनाया उसे अमर कर देते हैं।” राणा ने कहा, “शिव केवल देव नहीं, बल्कि त्याग, करुणा और समर्पण की सर्वोच्च चेतना हैं। महादेव ने सारी संपत्ति बांट दी, लेकिन अपने पास केवल दो अक्षर रखे— ‘रा’ और ‘म’। इसी राम नाम की शक्ति से हलाहल विष महादेव के कंठ में रुक गया और वे नीलकंठ कहलाए। जीवन में जब भी अमृत यानी सुख पाने की कोशिश होती है, तो सबसे पहले विष ही निकलता है। जो उस विष को धारण कर लेता है, वही अमृत तक पहुंचता है।” ‘संस्कार और संस्कृति के क्षेत्र में माने जाते हैं राणा’
मंच से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अभिनेता का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “आज हमारे बीच में एक ऐसी शख्सियत हैं, जो संस्कार और संस्कृति के क्षेत्र में माने जाते हैं। आप सब आशुतोष राणा जी का स्वागत करें।” दिग्विजय सिंह ने उनके नाटक का जिक्र करते हुए कहा, “आजकल वे ‘हमारे राम’ नाम का एक नाटक कर रहे हैं। इसमें उन्होंने स्वयं को रावण का पात्र बनाया है। कल ग्वालियर में उनका ये नाटक देखा, जो अद्भुत है।” तस्वीरों में देखिए आयोजन…
