शहडोल में कोल माफिया ने वन विभाग के रेंजर को पीटा। उनकी वर्दी फाड़ दी। डीएफओ के साथ भी गाली-गलौज की। माफिया ने पहले गांव वालों को भी पीटा। अवैध कोयले से भरे ट्रैक्टर को बीच सड़क पर डंप करके भाग गए। शिकायत के बाद वन विभाग की टीम शिकायत के बाद पहुंची थी। बड़ी बात ये है कि घटना के बाद भी 24 घंटे तक पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। गुरुवार देर रात मामले में केस दर्ज किया गया। डीएफओ श्रद्धा पंद्र का आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई में सहयोग नहीं किया। यहां तक कि अधिकारियों ने फोन तक नहीं रिसीव किया। घटना खेतावली गांव के ऊपर टोला में 11 फरवरी की रात की है। वन विभाग को सूचना मिली थी कि ग्रामीण अवैध कोयला परिवहन कर रहे ट्रैक्टर को पकड़े हैं। ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग दोनों को शिकायत की थी। वन विभाग की टीम पहले मौके पर पहुंची, जबकि पुलिस टीम देर से पहुंची। वन विभाग की टीम को अकेला पाकर कोल माफिया हमला कर दिया। उन्होंने रेंजर की गाड़ी रोकी, उन्हें बाहर निकाला और मारपीट की। बाद में मौके पर पहुंची। डीएफओ श्रद्धा पंद्रे ने बताया कि 11 फरवरी की रात ट्रैक्टर पकड़ने की सूचना मिली थी। इस पर रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा को मौके पर भेजा। मैं बुढ़ार में मीटिंग के बाद घटनास्थल के लिए रवाना हुई। हथियारों से लैस आरोपियों ने रेंजर की गाड़ी रोक ली, घेर लिया। रेंजर को गाड़ी से बाहर खींचा गया और उनके साथ मारपीट हुई, उनकी वर्दी भी फट गई। रेंजर जैसे-तैसे वहां से भाग निकले। मुझे घटना की जानकारी दी। मैंने उन्हें तुरंत पुलिस से मदद लेने और खुद आला अधिकारियों को सूचना देने को कहा। डीएफओ बोलीं- पुलिस नहीं लिख रही थी एफआईआर डीएफओ ने बताया कि पुलिस कोल माफिया के पक्ष में काम कर रही है। रेंजर घटना के बाद रात 11 बजे तक सोहागपुर थाना पहुंचे, लेकिन सुबह 4 बजे तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा का कहना है कि पुलिस ने तीन बार आवेदन तीन बार बदलवाया। पुलिस कह रही थी कि आवेदन उनकी तरह नहीं, बल्कि पुलिस के अनुसार लिखा जाए। रेंजर बार-बार आवेदन बदल रहे थे, लेकिन बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई। अफसरों ने फोन उठाना बंद कर दिया डीएफओ ने बताया कि घटना 11 फरवरी की शाम करीब 7 बजे हुई। रेंजर उसी रात करीब 11 बजे सोहागपुर थाना पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने गुमराह किया। कहा कि एफआईआर दर्ज हो गई है। बावजूद 12 फरवरी की रात 8 बजे तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। पुलिस लगातार कह रही थी कि पहले वन कर्मचारियों के बयान लेंगे, उसके बाद ही कोल माफिया के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। उन्होंने बताया कि जब वह पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रही थीं, तो अधिकारी कई बार फोन नहीं उठाते थे। 5-7 बार कॉल करने पर एक बार ही बात होती थी। पहले पुलिस बोली- कोयला नहीं, फिर बोली हूटर के कारण विवाद डीएफओ श्रद्धा पेंद्र ने बताया कि मामले को पुलिस दबाने की कोशिश कर गुमराह कर रही थी। पहले पुलिस कह रही थी कि मौके पर कोयला ही नहीं मिला, जबकि वहां कोयला पड़ा हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि खनन माफिया ट्रैक्टर से कोयला ले जा रहे थे। जब ग्रामीणों ने उन्हें रोका, तो माफिया ट्रैक्टर खाली करके भाग गए। बाद में जब पुलिस को मौके पर कोयला मिला, तो उन्होंने कहा कि विवाद वन विभाग के कर्मचारियों के हूटर बजाने से हुआ। डीएफओ ने कहा कि पुलिस की दोनों दलीलें गलत हैं। बस्ती से निकलता है अवैध कोयले से लदा ट्रैक्टर खितौली के उमर टोला निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि गांव की बीच बस्ती से अवैध कोयले का परिवहन करते हुए ट्रैक्टर तेज रफ्तार में निकलता हैं। हमारे बच्चे सड़क पर ही खेलते रहते हैं, लेकिन खनन माफिया को जल्दी होती है। कई बार हादसे भी हो चुके हैं। हम लोग पिछले कई साल से विरोध करते आ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। जब भी पुलिस के पास जाते हैं, वह कार्रवाई करने की जगह भगा देते हैं। इस बार हमने ट्रैक्टर को नहीं जाने दिया ग्रामीण लाल सिंह का कहना है कि हम प्रशासन और पुलिस से शिकायत कर करके थक गए थे। उसके बाद भी कोयले का अवैध परिवहन हमारी बस्ती से बंद नहीं हो रहा था, हम लोगों ने ठान लिया कि अब हम लोग खुद ट्रैक्टर को यहां से नहीं जाने देंगे। इस कारण हम इकट्ठा हुए और कोयले का अवैध परिवहन करने वाले ट्रैक्टर को बीच बस्ती में रोक लिया। हालांकि जब मामले की शिकायत अधिकारियों से की थी, तो कोई नहीं पहुंचा। डीएफओ टीम के साथ पहुंचीं, तो रेंजर के साथ मारपीट की गई। बंदूक और तलवार लेकर आए थे खनन माफिया सुरेश सिंह ने बताया कि शाम करीब 7 बजे जब ट्रैक्टर को रोका, तो ड्राइवर ने तुरंत सूचना अपने मालिकों को दी। कुछ ही देर में घटनास्थल पर 15-20 लोग आ गए, जिनके हाथों में हथियार थे। कोई बंदूक लिए था और किसी के पास तलवार थी। वे हमें धमकी दे रहे थे कि वे हमें काटेंगे या मारेंगे। इसके बावजूद हम लोग एकजुट होकर रुके रहे और अधिकारियों के आने का इंतजार किया। इस दौरान थोड़ी बहुत मारपीट हुई, लेकिन किसी को ज्यादा चोट नहीं आई। हर दिन 7 किलोमीटर की करते हैं रेकी, निकलते हैं दर्जनों ट्रैक्टर खितौली के ग्रामीणों ने बताया कि घोड़सा नाला में कोयले का अवैध खनन हो रहा है। यहां से हर दिन दर्जनों ट्रैक्टर अवैध कोयला लेकर बरखेड़ा गांव की ओर जाते हैं। नाले से गांव की दूरी लगभग 7 किलोमीटर है। खनन माफिया 24 घंटे इलाके की रेकी करते हैं। ट्रैक्टर निकलते ही माफिया अपने वाहनों से पीछा करते हैं और हथियार के साथ एक-दूसरे से मोबाइल पर संपर्क में रहते हैं। यह सिलसिला कई सालों से चल रहा है। तेज रफ्तार ट्रैक्टरों के कारण आए दिन हादसे भी हो रहे हैं। 24 घंटे बाद पुलिस ने दर्ज की एफआईआर सोहागपुर पुलिस ने गुरुवार रात रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा की शिकायत पर बिट्टन सिंह, चिंटू सिंह, राजू सिंह समय अन्य पर शासकीय कार्य में बाधा डालने, झगड़ा करने, वाहनों में तोड़फोड़ करने गाली देने के विवाद पर केस दर्ज किया है।
