पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों से मंगलवार को जीतू पटवारी मिले। उन्होंने प्रशासनिक विरोध के बावजूद प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर सरकार को सीधे तौर पर घेरा। लेकिन महिलाओं ने कहा कि वे जब तक अमित भटनाकर नहीं आएंगे, हम यहां से नहीं हटेंगे और न ही अन्न-पानी ग्रहण करेंगे। दोपहर करीब 2 बजे जब जीतू पटवारी बांध निर्माण स्थल की ओर बढ़े, तो पुलिस और प्रशासन ने वन्यजीवों की सुरक्षा का हवाला देते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के गेट पर बैरिकेडिंग कर दी। पटवारी को अंदर जाने से रोका गया और मुकदमों की धमकी दी गई, लेकिन वे कार्यकर्ताओं के साथ गेट फांदकर अंदर दाखिल हुए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें जनता के बीच भेजा है और वे आदिवासियों के हक के लिए सौ बार जेल जाने को भी तैयार हैं। परियोजना और भाजपा पर आरोप लगाए पटवारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि जिस कंपनी को इस प्रोजेक्ट का ठेका मिला है, वही भाजपा का करोड़ों का कार्यालय बना रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता के ऐशो-आराम की कीमत आदिवासियों के जीवन को तहस-नहस करके चुकाई जा रही है। उन्होंने मांग की कि विस्थापितों को ‘मकान के बदले मकान’ और ‘जमीन के बदले जमीन’ दी जाए। साथ ही, उन्होंने कार्यकर्ता अमित भटनागर की गिरफ्तारी को दमनकारी कदम बताया। मौत की जिद पर अड़ीं कलावती प्रदर्शन स्थल पर खरियानी की रहने वाली कलावती आदिवासी का विरोध देखकर हर कोई दंग रह गया। वे तपती धूप में अर्थी पर लेटकर न्याय की मांग कर रही हैं। कलावती का कहना है कि वे यहीं मर जाएंगी, लेकिन तब तक नहीं हटेंगी जब तक अमित भटनागर रिहा नहीं होते और कोई बड़ा अधिकारी उनसे बात नहीं करता। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें कूलर-पंखे की सुख-सुविधा नहीं चाहिए, बस उनके साथ न्याय हो। न्याय का भरोसा और संघर्ष जारी जीतू पटवारी और अन्य कांग्रेस नेताओं ने कलावती को इस कड़ी धूप में संघर्ष न करने की सलाह दी, लेकिन वे अपनी मांगों पर अडिग हैं। पटवारी ने भरोसा दिलाया कि पूरी कांग्रेस पार्टी आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए उनके साथ खड़ी है और इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाएगी। फिलहाल विस्थापितों के इस उग्र आंदोलन ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
ग्रामीण महिलाओं का रुख: “हमें सिर्फ अमित भाई साहब चाहिए” जीतू पटवारी के दौरे के बावजूद, प्रदर्शनकारी महिलाओं के सुर कुछ अलग नजर आए। उनका पूरा ध्यान अपने नेता अमित भटनागर की रिहाई पर टिका है। शीला आदिवासी (पलकुआ निवासी) ने कहा कि “जीतू पटवारी आए, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। उन्होंने सिर्फ पेड़-पौधे कटने की बात की, पर हमें न्याय नहीं मिला। हमें तो हमारे भाई साहब अमित भटनागर चाहिए, उनके आने पर ही न्याय मिलेगा।” मुन्नी आदिवासी ने कहा कि “हमारी पहली और आखिरी मांग अमित भाई साहब को बाहर निकालने की है। जब तक वे नहीं आएंगे, हम यहां से नहीं हटेंगे और न ही अन्न-पानी ग्रहण करेंगे। पहले उन्हें निकालो, मांगें बाद की बात हैं।” ग्रामीणों के इस कड़े रुख से स्पष्ट है कि विस्थापितों के लिए अमित भटनागर की रिहाई सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है, जबकि राजनीतिक हस्तक्षेप का उन पर विशेष प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है। धोड़न में सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात जीतू पटवारी के दौरे और चल रहे आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। धोड़न पलकोहा में प्रवेश द्वार पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और वन विभाग का अमला तैनात किया गया है। दरअसल, छतरपुर और पन्ना की सीमा पर स्थित धोड़न डैम पर केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में ‘चिता आंदोलन’ चल रहा है। यह आंदोलन शनिवार से तेज हो गया है, जिसमें सैकड़ों ग्रामीण सांकेतिक चिताओं पर लेटकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में उनके नेता अमित भटनागर की तत्काल रिहाई शामिल है, जिन्हें ग्रामीणों के अनुसार हिरासत में लिया गया है। साथ ही, परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन से विस्थापित होने वाले लोगों के लिए उचित मुआवजा और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग भी की जा रही है।
