प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद उज्जैन जिला प्रशासन ने भी पेट्रोल-डीजल बचाने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। बुधवार से सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारी अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही गाड़ी में सफर कर रहे हैं। बुधवार सुबह संभागायुक्त और सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र, यूडीए सीईओ संदीप सोनी, तहसीलदार आलोक चोरे, जल संसाधन विभाग के ईई मयंक सिंह, योगेश बिरला, अवनेंद्र सिंह, ट्रैफिक डीएसपी दिलीप सिंह परिहार सहित 15 अधिकारी एक साथ अर्बेनिया वाहन में बैठकर सिंहस्थ मेले के लिए बनाए जा रहे 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे। एक सप्ताह से रोज किया जा रहा निरीक्षण सिंहस्थ के कार्यों का पिछले एक सप्ताह से अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। रोज कमिश्नर, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी अलग-अलग 15 वाहनों से पहुंचते थे। वे करीब 16 किमी का सफर करते हैं। अब समझिए कैसे हुई खर्च में कटौती 15 अधिकारी रोज सिंहस्थ क्षेत्र के 16 किमी का सफर तय करते हैं। उससे पहले अपने बंगले से घाट तक पहुंचते हैं, यह भी पांच से सात किमी होता है। ज्यादातर इनोवा कार हैं, जिनका एवरेज 10 किमी प्रति लीटर होता है। वहीं जब अधिकारी निरीक्षण करते हैं, वाहनों के एसी चालू रहते हैं। इस हिसाब से देखें तो प्रत्येक वाहन पर चार लीटर पेट्रोल या डीजल खर्च होता है। 450 रुपए प्रति कार के हिसाब से मानें तो 6750 रुपए प्रतिदिन खर्च होते थे। अधिकारियों ने बुधवार से ट्रैवलर बस से सफर शुरू किया है। इस बस में पहले दिन वे 12 किमी गए। जिसमें ढाई लीटर डीजल खर्च हुआ, जो करीब 250 रुपए से भी कम का होता है। हालांकि ट्रैवलर बस 4100 रुपए प्रतिदिन के किराए पर ली गई है। रोज सुबह किया जा रहा निरीक्षण सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। घाटों से जुड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के स्थान चिन्हित करने के लिए अधिकारी रोज सुबह 6 बजे से निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान वे करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं। टीम भावना भी मजबूत होगी मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले अलग-अलग विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी गाड़ियों से आते थे, जिससे अनावश्यक ईंधन और शासकीय धन का अपव्यय होता था। अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे, जिससे टीम भावना भी मजबूत होगी और ईंधन की खपत में भी भारी कमी आएगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि अलग-अलग गाड़ियों का काफिला बनने से ट्रैफिक पर भी असर पड़ता था। अब एक बस में सभी अधिकारियों के साथ जाने से ईंधन की बचत के साथ जाम जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी। उन्होंने इसे बेहतर और अनुकरणीय पहल बताया।
