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PM से जुड़े फर्जी वीडियो को रीट्वीट करना पड़ा भारी:राइटर मधु किश्वर और सिद्दीकी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, चंडीगढ़ कोर्ट ने जताई नाराजगी

देश के प्रधानमंत्री से जुड़े कथित फर्जी और भ्रामक वीडियो को इंटरनेट मीडिया पर शेयर करने के मामले में फेमस राइटर मधु किश्वर को चंडीगढ़ पुलिस इन्वेस्टिगेशन ज्वाइन करने के लिए दूसरा नोटिस भेज चुकी है, लेकिन वह अब तक पेश नहीं हुई हैं। वहीं, मधु किश्वर पुलिस के सामने पेश होने के बजाय चंडीगढ़ कोर्ट पहुंच गईं। मधु किश्वर ने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसी मामले में हैदराबाद निवासी 44 वर्षीय हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी इस समय जेल में बंद है और उसकी जमानत अर्जी भी अदालत ने खारिज कर दी है। मामले के अनुसार, हसन सिद्दीकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल वीडियो को री-ट्वीट किया था। पुलिस का कहना है कि इस पोस्ट के जरिए भ्रामक वीडियो को और फैलाया गया। बताया जा रहा है कि आरोपी पहले फूड डिलीवरी का काम करता था और पिछले कुछ समय से पैनक्रियास संबंधी बीमारी से जूझ रहा था। इसी दौरान चंडीगढ़ पुलिस की टीम तेलंगाना पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार हाल ही में चंडीगढ़ के एडवोकेट अभय जोशी और तुनीष नागर ने जिला अदालत में उसकी जमानत याचिका दायर की थी। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने वीडियो न तो बनाया और न ही उसमें कोई छेड़छाड़ की। उसने केवल यह पूछते हुए पोस्ट साझा की थी कि वीडियो असली है या नहीं। हालांकि एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सोनाली सिंह ने ये दलीलें स्वीकार नहीं कीं और जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में बीएनएस और आईटी एक्ट की धाराएं लागू होती हैं। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ मानहानिकारक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और पोस्ट को इंटरनेट मीडिया पर सनसनीखेज बनाने की कोशिश की गई। अदालत ने कहा कि बोलने की आजादी का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति बिना जिम्मेदारी के कुछ भी पोस्ट या टिप्पणी कर दे। कोर्ट में याचिका दायर कर FIR की कॉपी मांगी मधु किश्वर ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्हें उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी नहीं दी गई। उन्होंने अदालत से मांग की कि पुलिस को एफआईआर की कॉपी देने के निर्देश दिए जाएं। इस पर कोर्ट ने चंडीगढ़ पुलिस से जवाब मांगा है। वहीं, मिसलीडिंग वीडियो मामले में एफआईआर में दिखाई दे रहे दंपति ने इन्वेस्टिगेशन ज्वाइन कर ली है। पूर्व पार्षद की शिकायत पर दर्ज हुआ केस मामले की शुरुआत 19 अप्रैल को हुई थी, जब पूर्व भाजपा पार्षद और एडवोकेट सतिंदर सिंह ने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कई इंटरनेट मीडिया यूजर्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो भ्रामक कैप्शन के साथ वायरल कर रहे हैं। शिकायत में मधु किश्वर, हसन सिद्दीकी, मिर्जा बेग, सोनू सिंह, हसीबुर रहमान और साबिर अहमद समेत 6 सोशल मीडिया हैंडल्स के नाम शामिल किए गए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, मूल वीडियो पहले अमेरिका में रहने वाले एक इंटरनेट मीडिया इन्फ्लूएंसर ने अपलोड किया था, जिसे बाद में प्रधानमंत्री मोदी से जोड़कर वायरल किया गया। इस मामले में सेक्टर-26 थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी।

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