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SC-ST एक्ट के 5423 केस 5 साल से ज्यादा पुराने:MP के जबलपुर-सागर में सबसे ज्यादा; नर्मदापुरम, खंडवा और हरदा में सिर्फ 1-1 मामले

मध्य प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट के 5423 मुकदमे 5 साल से अधिक समय से लंबित हैं। प्रदेश की विभिन्न अदालतों में चल रहे इन मामलों में सबसे ज्यादा केस जबलपुर में हैं। यहां 909 प्रकरण लंबित हैं। जबकि सागर 842 केस के साथ दूसरे नंबर पर है। सबसे कम संख्या नर्मदापुरम, खंडवा और हरदा की है। यहां सिर्फ एक-एक केस 5 साल से ज्यादा समय से लंबित है। पुराने मामलों की बढ़ती पेंडेंसी के चलते अब इन्हें जल्द सुलझाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार जुट गई है। हाल ही में लोक अभियोजन संचालनालय भोपाल ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन पुराने प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। आठ जिलों में एक भी केस 5 साल पुराना नहीं दूसरी ओर, प्रदेश के आलीराजपुर, अनूपपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, दतिया, झाबुआ, सीहोर और श्योपुर जिलों में एससी-एसटी एक्ट से जुड़ा एक भी मामला 5 साल से ज्यादा पुराना नहीं है। इन जिलों में 5 से कम केस
9 जिले ऐसे हैं जहां 5 साल से ज्यादा समय से 5 से कम केस पेंडिंग हैं। कटनी में चार, टीकमगढ़, नीमच, मंदसौर, डिंडोरी, धार में दो-दो और नर्मदापुरम, खंडवा, हरदा में एससी-एसटी एक्ट का एक केस पांच साल से ज्यादा समय से लंबित है। लंबित मामलों के लिए चलेगी स्पेशल ड्राइव लोक अभियोजन संचालनालय के इस पत्र के बाद अब सभी जिलों में इन पुराने लंबित मामलों पर स्पेशल ड्राइव चलाई जाएगी। अभियोजन विभाग के अधिकारी अब अदालतों में इन मामलों की नियमित सुनवाई सुनिश्चित करेंगे, गवाहों को कोर्ट में पेश करवाएंगे, दस्तावेज पूरे करवाएंगे और जहां संभव हो वहां समझौता या तथ्यों के आधार पर तेज फैसला दिलाने का प्रयास करेंगे। चूंकि ये मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, इसलिए अभियोजन पक्ष केवल सहयोगी भूमिका निभा सकता है। ऐसे में इन मामलों के जल्द निपटारे के लिए नियमित सुनवाई सुनिश्चित करने, गवाहों के बयान कराने, अतिरिक्त सबूत जुटाने के साथ ही जिन केसों में दोनों पक्ष राजी हैं वहां शांति से समझौते कराए जा सकते हैं। इसके साथ ही स्पेशल कोर्ट के जरिए ट्रायल में तेजी लाई जा सकती है। यह खबर भी पढ़ें… NCRB रिपोर्ट 2024-MP में हर 3 घंटे में एक रेप नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में एमपी की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ अपराध के मामलों में मध्य प्रदेश देश में पहले नंबर पर है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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