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देश में पहली बार सांकेतिक भाषा मध्यस्थता से मिला न्याय:इंदौर के साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट्स ने मूक-बधिर दंपती को दिलाया संपत्ति में हक; VIDEO से समझें केस

मूक-बधिर दंपती से जुड़े विवादों में सुलह और न्याय दिलाने के उद्देश्य से साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट्स की मदद से इंसाफ मिलने का एक अनुकरणीय केस हुआ है। देश में यह मामला देश का पहला ऐसा मामला है जिसमें मूक-बधिर दंपती का ऑनलाइन समझौता हुआ है। खास बात यह कि इसमें इंदौर के साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट ज्ञानेंद्र पुरोहित और अतुल राठौर ने उनकी समस्या जानी। फिर मेडिएशन रिपोर्ट शाजापुर कोर्ट में पेश की। कोर्ट ने इसे मजबूत आधार माना। दरअसल दंपती के परिवार के लोग उन्हें प्रपॉर्टी के मामले में उनका हक नहीं दे रहे थे। मीडिएशन के बाद वे तैयार हो गए और दंपती को इंसाफ मिल गया। इसके लिए साइन लैंग्वेज एक्सपर्टस ने उनकी दो बार ऑन लाइन मीडिएशन से सुनवाई की। इसमें दंपती के अलावा उनके परिवार (ससुराल पक्ष) के लोग भी शामिल हुए। उन्हें बताया कि दंपती भले ही मूक-बधिर हैं, लेकिन परिवार उन्हें कानूनन संपत्ति के हक वंचित नहीं कर सकता। वे भी संपत्ति के हकदार हैं। इसके साथ ही संपत्ति से जुड़े कानून को लेकर बताया गया। इस पर ससुराल पक्ष ने अपनी गलती मानी और प्रॉपर्टी से हिस्सा देने के लिए राजी हो गए। इसमें आखिरी सुनवाई 18 अप्रैल को हुई। इसके बाद एक्सपर्टस ने रिपोर्ट शाजापुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोर्ट में पेश की।
मामले में 18 अप्रैल को शाजापुर कोर्ट ने ने रिपोर्ट को आधार माना और दंपती को न्याय मिला। ससुराल पक्ष उन्हें संपत्ति का हक देने के लिए तैयार हो गया है। ससुराल पक्ष ने दंपती के घर की बिजली भी काट दी थी उसे भी फिर से चालू कर दिया गया। अब दंपती खुश हैं। तलाक लेने के लिए उतारू हैं दंपती दूसरा मामला एक अन्य मूक-बधिर दंपती का रहा। युवक मूलत: पांढुर्णा का है। शादी के बाद से ही दोनों में वैचारिक मतभेद बढ़ना शुरू हो गए और आए दिन विवाद होने लगे। पिछले साल दोनों ने तलाक के लिए इंदौर फैमिली कोर्ट की शरण ली। यहां दोनों अपना पक्ष सही तरीके से रख नहीं पा रहे थे। इस पर इंदौर के साइन एक्सपर्ट्स की मदद ली गई। 8 मई को इसमें पहली बार मेडिएशन हुआ। इसमें एक पक्ष तलाक न देने के लिए पूरी तरह सहमत हो गया जबकि दूसरा पक्ष अभी पूरी तरह सहमत नहीं है। इसकी अगली सुनवाई 27 जून को होगी। साइन लैंग्वेज के जरिए न्याय दिलाने की तैयारी दरअसल देश में पहली बार मूक-बधिरों को साइन लैंग्वेज के माध्यम से न्याय दिलाने की तैयारी हो गई है। मप्र हाई कोर्ट ने मूक-बधिरों के सालों से पेंडिंग केसों के जल्द निराकरण के लिए 28 लोगों की स्पेशल टीम बनाई है। इन 28 मीडिएटर्स में 21 मूक-बधिर हैं और 7 साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट हैं। इस टीम में 9 महिलाएं भी हैं। ये मूक-बधिरों के वैवाहिक, पारिवारिक और संपत्ति से जुड़े विवादों को कोर्ट से बाहर आपसी सहमति से सुलझाएंगे। इन स्पेशल 28 को सुप्रीम कोर्ट से भी हरी झंडी मिल गई है। इसलिए देश में कोई भी मूक-बधिर अपने फैमिली या सिविल विवादों में इनकी मदद ले सकेगा। सांकेतिक भाषा में हल होंगे मूक-बधिरों के विवाद मप्र हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के नेतृत्व में मध्य प्रदेश विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विवेक रूसिया के मार्गदर्शन में 1 अप्रैल से एक्सपर्ट मीडिएटर्स ने मध्यस्थता शुरू भी कर दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत 16 मई को जबलपुर आ रहे हैं। संभवतः इसी दिन मप्र में मूक-बधिरों के लिए 5 स्पेशल मीडिएशन सेंटर इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा और सीधी में शुरू होंगे। किस शहर में कहां होंगे सेंटर स्पेशल-28 में 8 इंदौर से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव सुमन श्रीवास्तव ने बताया कि 1 अप्रैल से मीडिएशन शुरू होने की जानकारी मिलने के बाद गुजरात और दिल्ली से भी पारिवारिक विवाद से जुड़े दो केसों के पक्षकारों ने स्पेशल-28 से संपर्क किया है।

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