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‘तुम भिंडी बनाती हो, मैं तलाक दूंगा’:रंग और मोटापा भी बना पति-पत्नी के अलग होने की वजह, रिश्ते पहुंचे टूटने की कगार पर

शादी जैसे रिश्ते, जो कभी समझौते, भरोसे और साथ निभाने की मिसाल माने जाते थे, अब छोटी-छोटी पसंद-नापसंद की भेंट चढ़ते नजर आ रहे हैं। राजधानी भोपाल के परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचे तीन मामलों ने बदलते रिश्तों की इसी हकीकत को उजागर किया। यहां कहीं भिंडी की सब्जी विवाद की वजह बनी तो कहीं रंग-रूप और बढ़ता वजन पति-पत्नी के बीच दूरियों का कारण बन गया। ये मामले बताते हैं कि संवाद और समझ की कमी मामूली बातों को भी कोर्ट-काउंसलिंग तक पहुंचा रही है। केस-1 भिंडी और सूखी सब्जी से शुरू विवाद कोर्ट तक पहुंचा भोपाल के एक दंपती का विवाद शुरुआत में बेहद साधारण लग रहा था, लेकिन धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लिया। पत्नी ने काउंसलिंग सेंटर पहुंचकर रीता तुली से शिकायत की कि उसका पति उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता है और उसके बनाए खाने में हमेशा कमियां निकालता है। काउंसलर ने जब पति से बात की तो उसने अपनी तरफ की कहानी रखी। पति का कहना था कि उसने शादी से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उसे भिंडी और गीली सब्जियां बिल्कुल पसंद नहीं हैं, इसलिए वह चाहता था कि घर में ये चीजें न बनाई जाएं। पत्नी बार-बार वही सब्जियां बनाती रही। कई दौर की काउंसलिंग के बावजूद दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई। फॉलोअप सेशंस में भी पति की यही शिकायत बनी रही। अंततः स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दोनों ने साथ रहने से इनकार कर दिया और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। कोर्ट में अब कानूनी प्रक्रिया के जरिए समाधान तलाशा जा रहा है। केस-2 रंग-रूप से बनी दूरी, अलग होने का फैसला एक अन्य मामला भी भोपाल का ही है, जहां शादी के कुछ साल बाद पति-पत्नी के बीच रंग-रूप को लेकर गंभीर मतभेद पैदा हो गए। पत्नी ने काउंसलर से कहा कि उसका पति उसके “स्टैंडर्ड” का नहीं है और उसके साथ सार्वजनिक जगहों पर जाने में उसे शर्म महसूस होती है। वहीं पति ने अपनी सफाई में कहा कि शादी से पहले दोनों ने एक-दूसरे को देखा-समझा था और परिवार की सहमति से ही विवाह हुआ था। उसका कहना था कि अगर पत्नी को आपत्ति थी तो वह शादी से पहले मना कर सकती थी। तीन से चार साल तक यह रिश्ता चला और इस दौरान कई बार काउंसलिंग सेशन भी हुए। काउंसलर ने दोनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन पत्नी अपने फैसले पर अडिग रही। अंततः दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया और अपने-अपने रास्ते चुन लिए। इस मामले में कोई संतान नहीं थी, जिससे निर्णय लेना अपेक्षाकृत आसान हो गया। केस-3 पत्नी बोली- पति पतला नहीं होगा तो नहीं रहूंगी तीसरा मामला भी भोपाल का ही है, जहां एक अरेंज मैरिज में पति का मोटापा विवाद की मुख्य वजह बन गया। पत्नी ने काउंसलिंग के दौरान कहा कि उसे अपने पति के मोटापे से समस्या है और वह उसके साथ सहज महसूस नहीं करती। काउंसलर ने जब उससे अन्य संभावित समस्याओं के बारे में पूछा जैसे आर्थिक दिक्कत, व्यवहार, या पारिवारिक दबाव तो उसने साफ किया कि ऐसी कोई समस्या नहीं है। उसकी एकमात्र आपत्ति पति का शारीरिक वजन था। काउंसलिंग के दौरान पत्नी को समझाया गया कि वह अपने पति का सहयोग कर सकती है। जैसे डाइट प्लान, एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल सुधार के जरिए स्थिति बदली जा सकती है। पत्नी इस पर राजी नहीं हुई और उसने स्पष्ट कर दिया कि जब तक पति दुबला नहीं होगा वह उसके साथ नहीं रहेगी। कई सेशन के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला तो दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई और मामला अलगाव की ओर बढ़ गया। सिर्फ अलगाव तक सीमित नहीं रिश्तों में बढ़ती खटास अब सिर्फ तलाक और अलगाव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कई मामलों में यह महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों की वजह भी बन रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश दहेज हत्या के मामलों में देश में तीसरे स्थान पर रहा। प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान दहेज हत्या के 450 मामले दर्ज किए गए। इनमें 232 मामले IPC और 218 मामले BNS की धाराओं के तहत दर्ज हुए। महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में भी मध्यप्रदेश लगातार चौथे साल देश में पांचवें स्थान पर बना हुआ है। राज्य में 2024 में महिलाओं से जुड़े 32,832 मामले दर्ज किए गए, यानी हर दिन औसतन 90 से ज्यादा महिलाएं अपराध का शिकार हुईं। ये खबर भी पढ़ें… NCRB रिपोर्ट 2024-MP में हर 3 घंटे में एक रेप नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में एमपी की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ अपराध के मामलों में मध्य प्रदेश देश में पहले नंबर पर है। रिपोर्ट के अनुसार हर तीन घंटे में एमपी में एक रेप का केस दर्ज हो रहा है। इसके अलावा हर दिन करीब 32 अपहरण हो रहे हैं।पूरी खबर पढ़ें

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