मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का काम जारी है, लेकिन यह प्रक्रिया किसानों के लिए राहत कम और आफत ज्यादा साबित हो रही है। प्रदेश में अब तक 5 लाख किसानों से 20 लाख टन गेहूं खरीदा जा चुका है। स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निरीक्षण के बावजूद जमीनी स्तर पर अव्यवस्थाओं का अंबार लगा है। दो-दो रात जागकर भी नहीं मिल रहा स्लॉट सर्वर और इंटरनेट की धीमी रफ्तार ने किसानों के पसीने छुड़ा दिए हैं। सतना के मौहारी और खंडवा केंद्रों पर किसान 2-3 दिनों से तौल का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे दो-दो रातें जागकर जैसे-तैसे स्लॉट बुक कर पा रहे हैं। ऑनलाइन धोखाधड़ी: डबरा में तकनीकी अज्ञानता का फायदा उठाकर ऑपरेटरों द्वारा गलत पंजीयन करने के मामले सामने आए हैं, जिससे असली किसान दर-दर भटक रहे हैं। देखिए तस्वीरें भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप खरीदी केंद्रों पर किसानों से ‘सुविधा शुल्क’ और ‘सैंपल’ के नाम पर लूट मची है। कटनी के डोकरिया केंद्र पर एक महिला किसान से पोर्टल एंट्री के नाम पर 810 रुपए मांगने का वीडियो सामने आया है। हरदा और देवास के किसानों का आरोप है कि प्रति ट्रॉली 2 से 5 किलो गेहूं ‘सैंपल’ के नाम पर लिया जा रहा है। वहीं, झाड़ू और पल्लेदारी के नाम पर भी अवैध वसूली की जा रही है। देवास में मिट्टी और चूरी बताकर प्रति क्विंटल 1.5 किलो तक की कटौती की जा रही है। न छांव, न पानी; तपती धूप में ट्रैक्टर के नीचे रह रहे आगर मालवा और देवास के केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। प्रशासन के निर्देशों के बावजूद किसानों के लिए छांव और ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं है। किसान चिलचिलाती धूप में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के नीचे बैठने को मजबूर हैं। घटिया और फटा हुआ बारदाना भेज दिया कटनी के मुरवारी में चार दिनों से खरीदी ठप है, क्योंकि केंद्र पर घटिया और फटा हुआ बारदाना (बोरे) भेजा गया है। खरीदी के बाद गेहूं का उठाव न होने से अनाज खुले आसमान के नीचे पड़ा है। बारिश होने पर फसल खराब होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। शादी-ब्याह के लिए ऊंचे ब्याज पर कर्ज भुगतान में देरी और खरीदी न होने के कारण किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। छतरपुर के किसानों का कहना है कि घर में शादी-ब्याह के कामों के लिए उन्हें 3 से 5 प्रतिशत ब्याज पर साहूकारों से पैसा लेना पड़ रहा है। मजबूरी में कई किसान सरकारी भाव (2625 रु.) के बजाय खुले बाजार में 300-400 रुपए कम दाम पर गेहूं बेच रहे हैं। कागजों पर ही है महिला सशक्तीकरण नर्मदापुरम में पिंक केंद्रों की हकीकत चौंकाने वाली है। जासलपुर में महिला समूह को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन केंद्र पर एक भी महिला कर्मचारी मौजूद नहीं थी। पुरुषों द्वारा ही केंद्र का संचालन किया जा रहा है, जो सरकारी दावों की पोल खोलता है। खबर के मिनट टु मिनट अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
