25 हजार का बजट बनाकर जेब में रखकर ले चलो। अपन सीधे बात करेंगे कि सर इतनी ही गुंजाइश है। पहले 20 की बात करेंगे। वैसे, उन्होंने दो-तीन सहायिकाओं से तो 50 से 80 हजार रुपए तक लिए हैं। बातचीत के ये अंश हैं- दलाल और शिकायतकर्ता के बीच। मामला सरकारी नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। ऑनलाइन प्रक्रिया होने के बाद भी अधिकारी-कर्मचारी फर्जीवाड़ा करने से बाज नहीं आ रहे हैं। गुना में आंगनवाड़ी सहायिका की भर्ती प्रक्रिया में क्लर्क ने एक जैसे सरनेम वाली महिलाओं के आगे का नाम बदलकर कलेक्टर से अनुमोदन कराने की कोशिश की। क्लर्क ने रानी की जगह रजनी और पूजा की जगह पूनम को सहायिका बनाने के लिए कागजों में हेरफेर कर दी। यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ और क्लर्क को सस्पेंड कर दिया गया। पहले पढ़िए, शिकायतकर्ता और दलाल के बीच बातचीत का ऑडियो … मामले में एक ऑडियो भी सामने आया है। यह ऑडियो शिकायतकर्ता के पति और दलाल के बीच का बताया जा रहा है। इसमें पैसे मेहरा बाबू के नाम पर नहीं, बल्कि वहां के अधिकारी के नाम पर मांगे जा रहे हैं। यह बात भी सामने आई है कि नियुक्ति के लिए 25 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। पैसे नहीं देने पर नियुक्ति नहीं दी गई। दलाल : फोन क्यों लगवा रहे हो यार। नेतागिरी मत लगवाओ। शिकायतकर्ता : कहां से? दलाल : साहब का फोन आया था। शिकायतकर्ता : किसका। अपने साहब का। क्या कह रहे थे? दलाल : साहब ने पूछा कि वो तिलक चौक वाले से परिचित हो क्या। मैंने कहा हां सर। साहब ने कहा कि वो नेतागिरी लगवा रहा है। तुम बोल दो उससे। मैं फिर आदेश रोक दूंगा। दे भी नहीं पाऊंगा फिर। मैंने कहा सर ऐसी बात नहीं है। हम तो कल तैयार भी हो गए थे। शिकायतकर्ता : फोन तो किसी से नहीं लगवाए। बाकी मैं अंकल से बात करने जरूर गया था, क्योंकि उनसे ही पैसे लूंगा। हो सकता है उन्होंने बोला हो। दलाल : मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है सर। वो तो तैयार है, पर मीणा जी ने थोड़ा बजट ज्यादा बताया, इस कारण। शिकायतकर्ता : वो कोई बात नहीं है, मैं तो कह रहा हूं कि अपन बात कर लें, साहब से। दलाल : मैंने तुम्हे कल बताए थे न 25 हजार। इतना बजट बनाकर जेब में रखकर ले चलो। अपन तो डायरेक्ट ही बात करेंगे कि सर ऐसा है कि इतनी गुंजाइश नहीं है। पहले अपन 20 की बात करेंगे। शिकायतकर्ता : भाई साहब तुम्हारी कसम। अभी 15 की ही व्यवस्था हो पा रही है। दलाल : दो-तीन सहायिका थीं, उनसे कुछ से 50 तो कुछ से 80 हजार रुपए लिए हैं। शिकायतकर्ता : चलो फिर मैं अंकल से बात करूं, फिर बताता हूं।
सबसे पहले पूरा मामला जिले में आंगनवाड़ी सहायिकाओं की भर्ती निकली थी। 30 दिसंबर को नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी की गई थी। जिले के 74 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 147 आंगनवाड़ी सहायिकाओं के पद पर भर्ती होनी थी। 10 जनवरी तक आवेदन होने थे। 12 जनवरी तक आवेदन में त्रुटि सुधार और इसके बाद दावे, आपत्ति होनी थी। जिले में कई महिलाओं ने इन पर भर्ती के लिए आवेदन दिए। चयनित महिला को क्लर्क ने घुमाया आंगनवाड़ी सहायिका के पद के लिए मधुसुदनगढ़ के वार्ड- 4 की रहने वाली रानी सेन पत्नी सुधांशु सेन ने भी आवेदन किया। सारे दस्तावेज सही थे और बाकी महिलाओं से मेरिट में भी वह सबसे ऊपर थी, इसलिए वह वार्ड- 4 स्थित तिलक चौक आंगनवाड़ी केंद्र के लिए चयनित हो गई। नियुक्ति पत्र के लिए जब वह महिला बाल विकास विभाग के दफ्तर पहुंची तो वहां उसे निराशा हाथ लगी। नियुक्ति पत्र का तो पता नहीं था, उल्टा क्लर्क ने उसे चक्कर कटवाना शुरू कर दिया। महिला रानी सेन ने बताया कि मेरिट के आधार पर मेरा सिलेक्शन होना था, लेकिन बाबू द्वारा लगातार गुमराह किया जा रहा था। मुझसे 25 हजार रुपए की मांग भी की गई, लेकिन मैंने पैसे नहीं दिए। जब भी बाबू के पास जाते, वो कहता था कि तुम्हारी फाइल कलेक्ट्रेट में है, अभी आई नहीं है। कलेक्टर साहब के पास है। पिछले दो महीने से लगातार परेशान हो रही थी। बाबू भी ठीक से जवाब नहीं दे रहा था। इधर-उधर से मेरे पास बात आई कि मेरी जगह किसी और का नाम लिख दिया गया है। इसके बाद यह तय किया को जनसुनवाई में जाकर अपनी बात कलेक्टर साहब के सामने रखूंगी, तभी कुछ हाल निकलेगा। कलेक्टर के पास पहुंची तो खुली पोल महिला को गुमराह किया गया कि लेटर कलेक्टर साहब के पास है। इन सबके बीच अचानक एक दिन एक अनजान व्यक्ति का उससे सामना हुआ, उसने नियुक्ति पत्र के बदले पैसों की डिमांड की। महिला ने कहा कि मेरा चयन तो पक्का है और फाइल कलेक्टर सर के पास गई हुई है, इस पर उसने कहा- बिना पैसा नियुक्ति भूल जाओ। महिला क्लर्क के पास पहुंची, लेकिन वहां से कोई संतुष्ट जवाब नहीं मिला। परेशान होकर वह 28 अप्रैल को वह कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंची। उसने कलेक्टर को पूरी कहानी बताई और कार्रवाई की मांग की। कलेक्टर ने मौके पर ही महिला बाल विकास अधिकारी अब्दुल गफ्फार से पूरे मामले की पड़ताल करने को कहा। दस्तावेज जांचने पर पूरी असलियत सामने आ गई। पता चला कि विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड- 3 विजय कुमार मेहरा ने पूरा हेरफेर किया है। पड़ताल में सामने आया कि विजय कुमार ने फाइल में भारी हेरफेर किया है। ऑनलाइन चयन सूची में राघौगढ़ सेक्टर के नांदनेर तरी केंद्र के लिए पूजा कुशवाह का चयन हुआ था, लेकिन मेहरा ने कागज में उसका नाम बदलकर पूनम कुशवाह कर दिया। इसी तरह, मधुसूदनगढ़ में रानी सेन की जगह रजनी सेन का नाम अंकित कर अनुमोदन प्राप्त करने का प्रयास किया गया। फर्जीवाड़ा सामने आने पर कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि यह मानवीय भूल नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया अपराध है, ताकि अपात्रों को लाभ पहुंचाया जा सके। एक जैसे सरनेम वाली महिलाओं के कागज में किया हेरफेर विजय कुमार ने बड़ी ही चतुराई से इस पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया में हेर-फेर करने का प्रयास किया। उसने एक जैसे सरनेम वाली महिलाओं की जानकारी ली और फिर एक बाहरी व्यक्ति से उनसे डील करने को कहा। जैसे पूनम और पूजा का सर नेम कुशवाह था। सिलेक्शन पूजा का हुआ था, लेकिन उसने फाइल में पूजा की जगह पूनम का नाम लिखकर उसे आगे बढ़ा दिया। इसी तरह मधुसुदनगढ़ में रानी का चयन हुआ था, लेकिन दस्तावेजों में रानी की जगह रजनी का नाम लिखकर कलेक्टर से अनुमोदन कराने की कोशिश की। खुद की नियुक्ति पर भी सवाल, अब सस्पेंड मामले में मुख्य भूमिका में रहे सहायक ग्रेड-3 विजय कुमार मेहरा की नियुक्ति पर भी सवाल उठे हैं। कर्मचारी विजय कुमार मेहरा पर केवल भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि विभागीय आदेशों की अवहेलना का भी आरोप है। मेहरा की नियुक्ति वर्ष 2016 में अनुकंपा के आधार पर हुई थी, जिसमें शर्त थी कि उन्हें 3 वर्ष के भीतर सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। प्रशासन द्वारा वर्ष 2019, 2021 और 2025 में कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद उन्होंने प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया। इन तमाम अनियमितताओं और पदीय कर्तव्यों में लापरवाही के कारण मप्र सिविल सेवा नियम 1966 के तहत उन्हें निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर ने सौंपा नियुक्ति पत्र कलेक्टर किशोर कन्याल ने पीड़ित रानी सेन को मौके पर ही वैध नियुक्ति पत्र सौंपा, जिसे पाकर महिला की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। कलेक्टर ने कहा- आज की सभी नियुक्तियां ऑनलाइन प्रक्रिया और तकनीकी पारदर्शिता के साथ होती हैं। कोई बाहरी व्यक्ति या कर्मचारी नियुक्ति के नाम पर पैसों की मांग करता है, तो वह सीधे प्रशासन को सूचित करें। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जांच बिठा दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिंडिकेट में और कितने लोग शामिल हैं। बाबू ने टाइपिंग मिस्टेक की बात कही थी महिला एवं बाल विकास अधिकारी अब्दुल गफ्फार ने बताया कि मेरे पास जो नियुक्ति आदेश भेजा गया था, उसमें रानी सेन के स्थान पर रजनी सेन का नाम आ रहा था। फाइल को रोक कर बाबू से स्पष्टीकरण मांगा था। उसने कंप्यूटर में टाइपिंग मिस्टेक होना बताया था, लेकिन यह संतोषप्रद नहीं था, क्योंकि प्रिंट होने के बाद देखा जा सकता था। शिकायतकर्ता को भी यह बात बताई गई थी। जांच टीम गठित की गई है। ऑडियो के संबंध में थाने में शिकायत की बात कही। कलेक्टर बोले- बाबू को सस्पेंड किया, महिला को नियुक्ति पत्र सौंपा कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने कहा कि एक सहायिका हमारे पास आई थी। उसका कहना था कि उसके अपॉइंटमेंट लेटर में उसके स्थान पर किसी और का नाम लिख दिया है। उसका कहना था कि मेरिट में मेरा नाम आना चाहिए था। हमने तत्काल महिला बाल विकास अधिकारी के माध्यम से उसकी जांच कराई। पता चला कि बाबू ने उसमें गलत नाम लिख दिया था। उसके स्थान पर किसी दूसरे का नाम लिख दिया गया था। हमने तत्काल उस बाबू को सस्पेंड किया।
