प्रदेश के नर्सिंग होम में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। नियम कहता है कि एक डॉक्टर सिर्फ एक ही अस्पताल में पंजीकृत हो सकता हैं। वहीं एक पैथालोजिस्ट एक अपनी और एक अन्य कुल 2 पैथालॉजी में रजिस्टर्ड हो सकता हैं। लेकिन, कुछ डॉक्टर ऐसे हैं, जो एक ही समय में कई अस्पताल और पैथोलॉजी लैब में रजिस्टर्ड हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें एक अस्पताल भोपाल में है तो दूसरा बैतूल में और तीसरा सीधी में…। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इनमें से कुछ डॉक्टर इस बात की जानकारी होने से ही इनकार कर रहे हैं। मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के पास भी पहुंची है। प्रदेशभर में ऐसे करीब 100 डॉक्टर हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए राज्य स्तर पर डॉक्टर रजिस्ट्रेशन का रियल-टाइम डिजिटल प्लेटफॉर्म जरूरी है, जिसमें हर डॉक्टर की एक ही यूनिक एंट्री हो। दूसरे संस्थान में नाम जोड़ते ही अलर्ट मिले। शिकायत मिली है, जांच होगी ऐसी शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जांच कराई जाएगी। एक डॉक्टर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर एक से अधिक जगह उपयोग नहीं कर सकता। -डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल पेपर पर डॉक्टर दिखा रहे हैं नर्सिंग होम नियमों के अनुसार अस्पताल को पंजीयन के लिए फुल-टाइम रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर दिखाना अनिवार्य है। सूत्रों के अनुसार, कई निजी अस्पताल और लैब लाइसेंस लेने के दौरान पेपर पर डॉक्टर दिखा देते हैं। डॉक्टर की सहमति हो या न हो, उनके नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल कर लिया जाता है। कुछ मामलों में डॉक्टर खुद भी ऑन पेपर कई जगह जुड़ जाते हैं, बिना ड्यूटी किए। इससे जहां मरीजों की सेहत से समझौता होता है, वहीं गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी भी तय नहीं हो पाती। शहर के चार डॉक्टर… जिनका नाम एक ही समय में कई अस्पतालों में पंजीकृत डॉक्टर बोले- हमने कंसर्न फॉर्म नहीं दिया मैं अपना रजिस्ट्रेशन सिर्फ अपने अस्पताल में उपयोग कर रहा हूं। एक साफ्टवेयर डेवलपर को अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य डिटेल्स दी थी। लेकिन, ये नहीं पता कि मेरा रजिस्ट्रेशन कैसे उपयोग हो रहा है। -डॉ. अरुण मैती मुझे इस बात की जानकारी नहीं है। मैंने किसी भी अस्पताल को कंसर्न फॉर्म नहीं दिया है, न ही रजिस्ट्रेशन नंबर उपयोग के लिए कहा है। -डॉ. कृष्ण कुमार भारंग (डॉ. राजन जॉन और नीरज गुप्ता ने कॉल रिसीव नहीं किया।)
