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मौलाना इलाही बोले- भारत को गहराई से समझते हैं खामेनेई:पंडित नेहरू की किताब ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ को बताया अद्भुत, छात्रों को पढ़ने की दी सलाह

भोपाल शहर में मुस्लिम समाज की एकता और भाईचारे को मजबूत करने के उद्देश्य से कोहेफिजा स्थित एमआईजी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में ‘इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसा’ जारी है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग तिरंगा लेकर पहुंचे हैं, जिससे आयोजन स्थल पर एकजुटता का माहौल देखने को मिल रहा है। वहीं कुछ छोटे बच्चे फिलिस्तीन झंडे छपी हुई टी-शर्ट में नजर आए, जिसकी दूसरी तरफ ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई का फोटो लगा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की भारत के प्रति गहरी रुचि और ज्ञान का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आयतुल्लाह खामेनेई ने भारत के इतिहास, संस्कृति और समाज को समझने के लिए 22 से अधिक किताबों का अध्ययन किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने कई मौकों पर अपनी तकरीरों में भारत और भारतीयों के इतिहास, सभ्यता और बौद्धिक परंपरा का जिक्र किया है। ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ को बताया अद्भुत कृति
मौलाना इलाही ने कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई विशेष रूप से जवाहर लाल नेहरू की प्रसिद्ध पुस्तक द डिस्कवर ऑफ इंडिया से बेहद प्रभावित रहे हैं। उन्होंने छात्रों को कई बार इस पुस्तक का अध्ययन करने की सलाह दी और इसे एक मोजजे जैसी रचना बताया। उन्होंने कहा कि जिस परिस्थिति में नेहरू ने जेल में रहते हुए, बिना पर्याप्त संसाधनों के यह विस्तृत और गहन पुस्तक लिखी, वह अपने आप में अद्वितीय उदाहरण है। खुद आयतुल्लाह खामेनेई ने इस पुस्तक को दो बार पढ़ने की बात कही थी। भारतीय साहित्य और व्यक्तित्वों में विशेष रुचि
मौलाना इलाही ने आगे बताया कि आयतुल्लाह खामेनेई को भारतीय लेखकों, बुद्धिजीवियों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बारे में गहरी जानकारी थी। जब भी भारत से कोई प्रतिनिधिमंडल या व्यक्ति उनसे मिलता, तो वे भारतीय साहित्यकारों और लेखकों के बारे में विस्तार से चर्चा करते और नई पुस्तकों के बारे में भी पूछताछ करते थे। यह उनकी बौद्धिक जिज्ञासा और भारत के प्रति लगाव को दर्शाता है। भारतीय प्रधानमंत्री से मुलाकात का उल्लेख
मौलाना इलाही ने एक रोचक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब भारत के एक पूर्व प्रधानमंत्री उनसे मिलने गए। तो तय समय 15 मिनट का था, लेकिन बातचीत करीब डेढ़ घंटे तक चली। इस दौरान आयतुल्लाह खामेनेई ने भारत के इतिहास, संस्कृति, दर्शन और सभ्यता पर गहन चर्चा की। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री के पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनके पूर्वजों के बारे में भी जानकारी साझा की, जिसे सुनकर प्रधानमंत्री भी आश्चर्यचकित रह गए और कहा कि इतनी जानकारी तो उन्हें स्वयं भी नहीं थी। भारत-ईरान संबंधों को बताया 5000 साल पुराना
मौलाना इलाही ने कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई हमेशा भारत और ईरान के संबंधों को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के रिश्ते 5000 साल से भी अधिक पुराने हैं, जो केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, शैक्षणिक, दार्शनिक और सभ्यतागत आधार पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संबंध पहले से ही मजबूत हैं, लेकिन समय के साथ इन्हें और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है। आपसी संबंध मजबूत करने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में मौलाना इलाही ने भारत और ईरान के बीच आपसी समझ, सहयोग और भाईचारे को और मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझा विरासत और सांस्कृतिक जुड़ाव दुनिया के लिए एक मिसाल है, जिसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। जुल्म के खिलाफ खड़े होना हमारी जिम्मेदारी
इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसे में एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान ने अपने संबोधन में कहा कि आज समाज के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जुल्म के खिलाफ किस तरह खड़ा हुआ जाए। उन्होंने कहा कि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, अगर जुल्म को ताकत से नहीं रोक सकते तो कम से कम जुबान से उसका विरोध करना चाहिए, और यदि वह भी संभव न हो तो दिल में उसे गलत मानना जरूरी है। उन्होंने अफसोस जताया कि आज कुछ लोग जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने वालों की ही आलोचना करने लगते हैं और सोशल मीडिया पर बिना सच्चाई जाने भ्रामक बातें फैलाते हैं, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। हक और बातिल के बीच चुनना होगा रास्ता
मोहसिन अली खान ने कहा कि आज दुनिया के सामने साफ दो रास्ते है, एक हक का और दूसरा बातिल का, और हर व्यक्ति को तय करना होगा कि वह किसके साथ खड़ा है। उन्होंने ईरान का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी दुनिया में कहीं जुल्म हुआ, खासकर फिलिस्तीन और गाजा के मुद्दे पर, तो ईरान ने खुलकर उसका विरोध किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी भी जानकारी को आगे न बढ़ाएं और समाज में एकजुट होकर अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करें। मप्र कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव बोले- मानवता और हक के लिए खड़ा होना जरूरी इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसे में मप्र कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव शैलेंद्र शैली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अंतरराष्ट्रीय सम्मान वापस लेने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जिस सम्मान को देने के तुरंत बाद ईरान पर हमला हुआ, वह मानवता पर “काला धब्बा” है। ऐसे में भारत की गरिमा और नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए उस सम्मान को लौटाया जाना चाहिए। शैली ने अपने संबोधन में ईरान और भारत के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान को वे “पूर्वजों का देश” मानते हैं और दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक व ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं। उन्होंने 1994 के संयुक्त राष्ट्र के उस घटनाक्रम का उल्लेख किया, जब पाकिस्तान भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाना चाहता था, लेकिन ईरान ने भारत का समर्थन किया था। उन्होंने आगे कहा कि ईरान के साथ खड़ा होना मानवता, न्याय और मानवीय मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करना है। उनके मुताबिक, यह फासीवाद और अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ आवाज उठाने का भी प्रतीक है। शैली ने फिलिस्तीन के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय ईरान के समर्थन का मतलब फिलिस्तीन के साथ एकजुटता दिखाना भी है। अपने संबोधन के अंत में शैली ने लोगों से अपील की कि वे ईरान के समर्थन में एकजुट हों, ताकि आने वाली पीढ़ियां यह न कहें कि जब अन्याय और अत्याचार बढ़ रहा था, तब हम चुप रहे। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि हक और इंसाफ के लिए आवाज बुलंद की जाए और दुनिया भर के लोग एकजुट होकर अन्याय का विरोध करें। शिया समुदाय के इमाम सहित अन्य धर्मगुरु भी रहे शामिल कार्यक्रम में मुफ्ती डॉ. इरफान आलम साहब कासमी, रणवीर सिंह वजीर (प्रदेश उपाध्यक्ष, अल्पसंख्यक विभाग), राजकुमार वर्मा (सदस्य, कांग्रेस कमेटी), फतेहगढ़ इमामबाड़ा के इमाम मौलाना राजीउल हसन साहब और शाहजहानाबाद गुरुद्वारे के ग्रंथी अरिजीत सिंह भी शामिल हुए। विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को सांप्रदायिक सौहार्द और एकता का संदेश दिया। शिया समुदाय के इमाम सहित अन्य धर्मगुरु भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। मौलाना इलाही इत्तेहाद-ए-उम्मत पर मार्गदर्शन देंगे, जबकि अन्य उलेमा भी अपने विचार रखेंगे। आयोजकों के अनुसार, मुख्य जलसे के बाद शाम को फतेहगढ़ इमामबाड़ा में मगरिब की नमाज़ के बाद ताज़ियती कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मौलाना इलाही संक्षिप्त तकरीर करेंगे और लोगों से मुलाकात भी करेंगे।

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