Homeमध्यप्रदेश23 साल पुराने जर्जर भवन पर 1.77 करोड़ का निर्माण:डिप्टी सीएम ने...

23 साल पुराने जर्जर भवन पर 1.77 करोड़ का निर्माण:डिप्टी सीएम ने किया कैश काउंटरों का लोकार्पण; बिना नीलामी टोकन से बांटी दुकानें

मंदसौर जिले की पिपलियामंडी कृषि उपज मंडी में रविवार 28 जून को 32 नए कैश काउंटरों (सैंड्री शॉप) का लोकार्पण किया गया। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और सांसद सुधीर गुप्ता ने करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपए की लागत से बने इन काउंटरों का उद्घाटन किया। किसानों और व्यापारियों को भुगतान में सुविधा देने के लिए बनाए गए ये काउंटर लोकार्पण के साथ ही निर्माण कार्य और आवंटन प्रक्रिया को लेकर विवादों में आ गए हैं। मंडी प्रशासन ने 32 कैश काउंटरों का आवंटन पारंपरिक नीलामी प्रक्रिया के बजाय टोकन सिस्टम के माध्यम से किया है। इसके तहत सभी 32 व्यापारियों से लगभग 6 लाख 70 हजार रुपए जमा कराए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों के बीच यह चर्चा है कि जब मंडी की दुकानों का आवंटन आमतौर पर नीलामी के माध्यम से होता है, तो इस बार टोकन प्रणाली क्यों अपनाई गई। इससे मंडी को आर्थिक लाभ हुआ है या नुकसान, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। तोड़ने वाली बिल्डिंग पर ही कर दिया निर्माण जिन किसान शेड पर ये नए कैश काउंटर बनाए गए हैं, उनका निर्माण वर्ष 2003 में हुआ था। समय के साथ खराब हुए इस 23 साल पुराने भवन को कुछ साल पहले मंडी प्रशासन ने जर्जर मानते हुए ध्वस्त करने का प्रस्ताव तैयार किया था। मंडी बोर्ड से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण इसे तोड़ा नहीं जा सका और मरम्मत कर इसका उपयोग किया जाता रहा। रविवार रात दैनिक भास्कर की टीम ने मौके पर जाकर देखा तो भवन में कई जगह प्लास्टर उखड़ा हुआ था, दरारें थीं और सरिए बाहर निकले हुए नजर आए। नई मंडी का काम जारी, फिर पुराने परिसर में खर्च क्यों? पिपलियामंडी कृषि उपज मंडी को गुड़भेली बड़ी स्थित नए परिसर में स्थानांतरित किया जाना प्रस्तावित है। वहां निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है और भविष्य में पूरा व्यापार वहीं से संचालित होना है। ऐसे में पुराने परिसर में 1.77 करोड़ रुपए खर्च कर स्थायी निर्माण करने पर सवाल उठ रहे हैं। कृषि मंडी के पूर्व अध्यक्ष बंशीलाल पाटीदार और पूर्व उपाध्यक्ष कमलेश पटेल का कहना है कि जब मंडी को नई जगह जाना ही है, तो पुराने परिसर में इतनी बड़ी राशि खर्च करना वित्तीय दृष्टि से कितना उचित है, इसका जवाब प्रशासन को देना चाहिए। किसान नेता ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने आरोप लगाते हुए कहा, “पूरी तरह क्षतिग्रस्त बिल्डिंग पर केवल रंग-रोगन और मरम्मत कर 32 कैश काउंटर बना दिए गए हैं। पुराने जर्जर भवनों को नया बताकर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया जा रहा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि भवन की स्ट्रक्चरल सेफ्टी की जांच किस तकनीकी संस्था से कराई गई है और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। वहीं, मंडी व्यापारी संघ के अध्यक्ष कृष्णकुमार ने कहा, “पहले किसान शेड की स्थिति काफी खराब थी। लेकिन मरम्मत के बाद भवन पूरी तरह उपयोग योग्य हो गया है। इससे व्यापारियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।” मंडी सचिव जगदीश चंद्र से सीधे सवाल-जवाब सवाल: जिस भवन को डिस्मेंटल करने की योजना थी, उसी पर कैश काउंटर बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: कई व्यापारियों के पास गोदाम नहीं थे, जिससे किसानों को भुगतान में परेशानी होती थी। इसी कारण यह निर्णय लिया गया। सवाल: 23 वर्ष पुराने किसान शेड पर कैश काउंटर बनाना क्या उचित है? जवाब: आरसीसी शेड का तकनीकी परीक्षण कराने के बाद ही कैश काउंटरों का निर्माण कराया गया है। सवाल: यदि भविष्य में भवन को कोई नुकसान होता है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? जवाब: तकनीकी अधिकारियों द्वारा आरसीसी शेड का निरीक्षण एवं परीक्षण कराया गया है। नुकसान जैसी कोई संभावना नहीं है। सवाल: नई मंडी बनने वाली है, फिर यहां कैश काउंटर क्यों बनाए गए? जवाब: नई मंडी पूरी तरह विकसित होने में अभी समय लगेगा। तब तक किसानों को भुगतान सुविधा उपलब्ध कराना आवश्यक था। वर्तमान मंडी परिसर छोटा है, इसलिए नए स्थान पर कैश काउंटर बनाना संभव नहीं था। सवाल: क्या निर्माण के लिए तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति ली गई थी? जवाब: हां, सभी स्वीकृतियां नियमानुसार प्राप्त की गई हैं। तकनीकी स्वीकृति मंडी बोर्ड भोपाल के अधीक्षण यंत्री द्वारा दी गई है। यह निर्णय पूर्व में मंडी समिति द्वारा लिया गया था। देखिए तस्वीरें…

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here