शिवपुरी के पूर्व अमोला गांव में 20 साल बाद देवी-देवताओं की मूर्तियों की पुनः स्थापना की जा रही है। मड़ीखेड़ा डूब क्षेत्र के कारण विस्थापित हुए इस गांव में शनिवार को हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में कलश यात्रा निकाली गई। इसके साथ ही पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ हो गया। मड़ीखेड़ा परियोजना के कारण लगभग 20 वर्ष पहले अमोला गांव को विस्थापित कर करैरा के पास नए अमोला में बसाया गया था। इस दौरान गांव के प्राचीन मंदिरों से देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हटानी पड़ी थीं। ये मूर्तियां इतने वर्षों तक अलग-अलग स्थानों पर रखी हुई थीं। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि उनकी आस्था और आराध्य देव पुराने अमोला से विस्थापित नहीं होंगे। इसके बाद सभी ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से पुराने अमोला में मां के प्राचीन मंदिर के पास एक नए मंदिर का निर्माण कराया गया। इस मंदिर के निर्माण में करैरा निवासी समाजसेवी संतोष नीखरा (सेठ) का विशेष योगदान रहा। शनिवार को निकाली गई कलश यात्रा में हजारों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण किए। इस यात्रा में पुरुष, बच्चे, कन्याएं और अमोला से विस्थापित हुए परिवारों के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। 17 जून को हवन-पूजन और भंडारा
आयोजन समिति के अनुसार, पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन के बाद 17 जून को हवन-पूजन, कन्या भोज और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन यज्ञाचार्य पंडित अरविंद कुमार शास्त्री और अन्य विद्वान पंडितों द्वारा किया जा रहा है। इस आयोजन में पूर्व अमोला निवासी पंडित देवेंद्र भार्गव सहित सभी ग्रामीणों का सहयोग मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बाद उनके आराध्य देव एक बार फिर अपने मूल धाम में विराजमान होने जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है। यह भी पढ़ें… शिवपुरी में 12 साल से दुकान में बंद राम दरबार अयोध्या में तो भगवान राम अपने घर में विराजमान हो गए, लेकिन शिवपुरी के अमोला गांव में पिछले 12 वर्षों से भगवान श्री राम और उनका दरबार बाजार की एक दुकान में बंद हैं। शटर पर एक बड़ा सा ताला लटक रहा है। यह स्थिति अटल सागर बांध के निर्मित होने के कारण बनी है। पूरी खबर पढ़िए…
