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15 साल से ग्वालियर में है भोजशाला की मां वाग्देवी:26 कलाकारों ने सिर्फ 35 दिन में बनाई थी प्रतिमा; लंदन म्यूजियम वाली ‘ओरिजिनल’ मूर्ति की हूबहू

मध्यप्रदेश के धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर कोर्ट द्वारा इसे मंदिर मानते हुए वर्षभर बिना रोक-टोक पूजा-अर्चना के आदेश के बाद पूरे प्रदेश में खुशी की लहर है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भोजशाला के गर्भगृह के लिए तैयार की गई मां वाग्देवी (सरस्वती) की मुख्य अष्टधातु प्रतिमा पिछले 15 सालों से ग्वालियर में ही कड़ी सुरक्षा के बीच रखी हुई है। साल 2011 की बसंत पंचमी पर इस मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा होनी थी, लेकिन उस समय उपजे सांप्रदायिक और प्रशासनिक विवाद के बाद इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया था। अब कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद ग्वालियर के मूर्तिकार के घर में भी उम्मीद का दीया जल उठा है। लंदन म्यूजियम वाली ‘ओरिजिनल’ मूर्ति का हूबहू रूप
ग्वालियर के प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे ने मां वाग्देवी की इस प्रतिमा और उसकी बनावट से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं को साझा किया। आरएसएस नेता ने दिया था ऑर्डर मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे अनुज ने बताया कि साल 2011 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता नवल किशोर जी ने उन्हें इस मूर्ति को बनाने का ऑर्डर दिया था। “2011 में जब मूर्ति बनकर तैयार हुई और इसे धार भेजने की तैयारी थी, तभी वहां धार्मिक और प्रशासनिक विवाद भड़क गया। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से मूर्ति को ग्वालियर में ही रोकने का आदेश दिया। उस समय विवाद इतना बढ़ा कि लगभग दो हफ्तों तक 2 से 5 पुलिसकर्मी हमारे घर पर सुरक्षा में तैनात रहे। इसके बाद भी साल 2011 से 2015 तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस प्रोटेक्शन के साये में ही 2 से 3 दिन के लिए मूर्ति रखी जाती थी।” भावुक हो गए मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे अनुज का कहना है कि कोर्ट का फैसला आने के बाद से वे भी बेहद उत्साहित हैं। हालांकि फिलहाल अभी किसी पक्ष या प्रशासन ने उनसे मूर्ति ले जाने के लिए संपर्क नहीं किया है, क्योंकि सभी कोर्ट के लिखित आदेश और उसकी कानूनी बारीकियों का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “अगर भविष्य में भी कोई इस मूर्ति को लेने नहीं आता है, तो मैं इसे बेहद खुशी और गर्व के साथ अपने पास रखूंगा, क्योंकि यह भारत के गौरवशाली इतिहास का एक जीवंत हिस्सा है।” धार में महासत्याग्रह, वंदना और ‘विजय दीपोत्सव’ का माहौल
ग्वालियर में जहां मूर्ति अपनी स्थापना का इंतजार कर रही है, वहीं धार स्थित भोजशाला में ऐतिहासिक नजारा देखने को मिल रहा है। कोर्ट द्वारा इसे मंदिर घोषित किए जाने के बाद यहां श्रद्धालुओं ने ‘महासत्याग्रह’ के साथ मां वाग्देवी की स्तुति और आरती की। भोजशाला के गर्भगृह में मां वाग्देवी के प्रतीकात्मक स्वरूप और अखंड ज्योति की स्थापना कर दी गई है। करीब 700 वर्षों के लंबे संघर्ष और प्रतीक्षा के बाद हिंदू पक्ष को मिले इस अधिकार के बाद धार, इंदौर, झाबुआ, खरगोन और आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु अपने परिवारों के साथ दर्शन करने पहुंच रहे हैं। पूरे परिसर में आस्था, उल्लास और विजय का वातावरण है। ये खबर भी पढ़ें… राजा भोज से हाईकोर्ट तक…भोजशाला, 100 साल का विवाद मेरे जीते जी कोर्ट का फैसला आया है। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। भोजशाला मंदिर है, यह साबित करने के लिए मैंने और मेरे साथियों ने बहुत संघर्ष किया है। यह कहते हुए 95 साल के विमल गोधा की आंखें चमक जाती हैं। गोधा उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर साबित करने के लिए संघर्ष किया। भोज उत्सव समिति ने भी इसमें बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। पूरी खबर पढ़ें… वो 15 तस्वीरें देखिए जो मंदिर होने का आधार बनीं अमध्य प्रदेश के धार की भोजशाला मामले में हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया। कोर्ट ने भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट और कोर्ट में पेश की गईं 15 तस्वीरें अहम आधार बनीं। इन तस्वीरों में शिलालेख, देवी-देवताओं की आकृतियां, स्तंभों की नक्काशी और मंदिर शैली के स्थापत्य के प्रमाण बताए गए। मंदिर और कमाल मौलाना मस्जिद को लेकर विवाद 1995 से चल रहा था। पूरी खबर पढ़ें…

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