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12 राज्यों-UT में SIR, 6.08 करोड़ लोगों के नाम कटे:UP में सबसे ज्यादा 2.04 करोड़, बंगाल में 91 लाख वोटर फाइनल लिस्ट से बाहर

चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे फेज के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में फाइनल वोटर लिस्ट जारी की गई। इसके पूरा होने के बाद 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट में कुल 6.08 करोड़ नाम कम हुए हैं। पिछले साल 27 अक्टूबर को SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 51 करोड़ थी। फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद यह संख्या 44.92 करोड़ रह गई है। SIR के दूसरे फेज में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा समेत पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप की फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की गई है। उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को जारी हुई SIR की फाइनल लिस्ट में वोटर्स की संख्या 13% घटकर 13.39 करोड़ हो गई है। यानी लिस्ट में से 2.04 करोड़ लोगों के नाम कटे हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में करीब 91 लाख वोटर्स के नाम फाइनल लिस्ट से बाहर हुए हैं। अब तक 60 करोड़ वोटर कवर, 39 करोड़ बाकी चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के पहले फेज में बिहार, दूसरे फेज में 9 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR कराया गया था। वहीं असम में SIR के बजाय 10 फरवरी को स्पेशल रिवीजन पूरा किया गया था। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कई राज्यों में शेड्यूल में बार-बार बदलाव हुए। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। देश के करीब 99 करोड़ मतदाताओं में से 60 करोड़ को इस अभियान में शामिल किया जा चुका है। अब बाकी 39 करोड़ मतदाताओं को SIR के तीसरे फेज 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में कवर किया जाएगा। इन 22 राज्यों-UT में SIR प्रक्रिया इस महीने पांच विधानसभा चुनावों के बाद शुरू की जाएगी। चुनावी राज्य बंगाल में SIR के बाद 90.83 लाख नाम हटे पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, यह कार्रवाई नवंबर से चल रही प्रक्रिया के तहत की गई है, आयोग के 28 फरवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक, SIR शुरू होने के बाद 63.66 लाख नाम हटाए गए थे, जिससे मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई। बाद में जांच और प्रक्रिया पूरी होने के साथ कुल हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर करीब 90.83 लाख हो गई है। SIR की प्रोसेस को 6 सवाल-जवाब में जानें 1. SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा के नए वोटरों को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है। 2. पहले किस राज्य में हुआ? पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में SIR की घोषणा हुई। 3. कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं। 4. SIR में वोटर को क्या करना होगा? SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। 5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य? पेंशनर पहचान पत्र किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र जन्म प्रमाणपत्र पासपोर्ट 10वीं की मार्कशीट स्थायी निवास प्रमाणपत्र वन अधिकार प्रमाणपत्र जाति प्रमाणपत्र राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम परिवार रजिस्टर में नाम जमीन या मकान आवंटन पत्र आधार कार्ड 6. SIR का मकसद क्या है? 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।

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