Homeमध्यप्रदेश1 करोड़ बरामदगी पर 20 लाख हड़पने का आरोप:गुना पुलिस से हाईकोर्ट...

1 करोड़ बरामदगी पर 20 लाख हड़पने का आरोप:गुना पुलिस से हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट; पूछा-फरियादी का बयान दर्ज हुआ या नहीं

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने गुना जिले की पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए नाराजगी जताई है। गुना पुलिस पर गुजरात को कुछ व्यापारियों के एक करोड़ रुपए की बरामदगी के दौरान 20 लाख रुपए हड़पने का आरोप लगा है। गुना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर लगाई गई याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त रूख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य शासन से पूछा है कि फरियादी का बयान दर्ज किया गया है या नहीं। इस संबंध में 20 अप्रैल तक स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
गुना में 1 करोड़ कैश पकड़कर 20 लाख में डील का आरोप ग्वालियर रेंज के गुना जिले की पुलिस 19-20 मार्च की दरमियानी रात नेशनल हाइवे-46 के टोल नाका रूठियाई पुलिस चौकी के पास वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान गुजरात पासिंग नंबर GJ 05 RK-9351 की एक स्कॉर्पियो को रोका गया, जो किसी जीरा कारोबारी की बताई जा रही थी। गाड़ी की तलाशी के दौरान उसमें नोटों के बंडल मिले। गाड़ी से मिले पैसे की कुल कीमत करीब एक करोड़ रुपए बताई गई। आरोप है कि इतनी बड़ी राशि पकड़े जाने के बाद नियमों के तहत आयकर विभाग या वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बजाय मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने सेटलमेंट का रास्ता चुना। पुलिस और व्यापारी के बीच 20 लाख रुपए में डील फाइनल हुई। पुलिस ने कथित तौर पर 20 लाख रुपए अपने पास रख लिए और बाकी 80 लाख रुपए के साथ कारोबारी को जाने दिया। इस मामले में हंगामा उस समय मचा जब गुजरात के एक आईपीएस अधिकारी का फोन गुना पुलिस के पास पहुंचा। इसके बाद रात को आईजी-डीआईजी व एसपी एक्टिव हुए और तत्काल थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मी सस्पेंड कर दिए गए।
याचिका पर सुनवाई में यह निकला निष्कर्ष
अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने बताया कि मामला 19 मार्च 2026 को गुना पुलिस द्वारा गुजरात के व्यापारियों से एक करोड़ रुपए की बरामदगी के दौरान 20 हजार रुपए हड़पने के आरोप से जुड़ा है। इस प्रकरण में खुद को फरियादी बताते हुए नीरज जादौन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसे कथित तौर पर उठाकर थाने लाया गया, जहां पुलिस अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट और टॉर्चर किया। आरोप है कि पुलिस ने दबाव बनाकर अपने मुताबिक बयान दर्ज कराए और जबरन हस्ताक्षर करवाए। रिहा होने के बाद उसने मेडिकल परीक्षण (ए) कराया, जिसमें शरीर पर चार गंभीर चोटें पाई गईं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने कोर्ट में तर्क दिया कि पुलिस बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए मामले में लीपापोती कर रही है और फरियादी का वास्तविक बयान दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि बयान दोबारा वकील की मौजूदगी में और वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किया जाए। साथ ही दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो। वहीं राज्य शासन की ओर से उपस्थित एडिशनल एडवोकेट जनरल विवेक खेड़कर ने दलील दी कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि फरियादी का बयान दर्ज हुआ भी है या नहीं, ऐसे में याचिका विचार योग्य नहीं है।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here